विचार विज्ञान - टेक्नोलॉजी

अवैज्ञानिकता के इस दौर में जनता के वैज्ञानिक का जाना…

राम नरेश राम
जन संस्कृति मंच

जन विज्ञान के लिए मशहूर बहुप्रतिभा के धनी प्रो. यशपाल हमारे बीच नहीं रहे। 24 जुलाई 2017 को 90 वर्ष की उम्र में नोएडा में उनका देहांत हो गया। वे महान वैज्ञानिक और शिक्षाविद थे।

उनका जन्म 26 नवम्बर 1926 को पाकिस्तान वाले पंजाब के हिस्से में चिनाब के किनारे झंग नाम के शहर में हुआ था। 1976 में उनको पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उन्होंने दूरदर्शन के कार्यक्रमों के माध्यम से जनता को विज्ञान जैसे दुरूह विषय को लोकप्रिय ढंग से समझाया और लोगों को जागरूक बनाया । वे विज्ञान को प्रयोगशाला से बाहर निकालकर जनता के सहज जीवन का हिस्सा बना देने के लिए प्रतिबद्ध थे। उन्होंने विज्ञान के ज्ञान को किसी एक वर्ग की कब्जेदारी से मुक्त कर ज्ञान के बारे में ब्राह्मणवादी समझ को चुनौती दी। ज्ञान को सर्वसुलभ बनाने का अभियान चलाया। ग्रहण जैसे विषय पर उनका जनता के बीच कैम्प लगाकर उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का अभियान इसका सबसे बड़ा उदाहरण हो सकता है। दूरदर्शन पर ‘ टर्निंग पॉइंट ‘ और ‘ भारत की छाप  ‘ जैसे कार्यक्रम भी इसी अभियान के हिस्से थे।
ऐसे समय में जब विज्ञान और वैज्ञानिक राजकीय अवैज्ञानिकता का प्रसार करने पर तुले हुए हैं, तब ऐसे महान जन वैज्ञानिक का हमारे बीच से चला जाना बेहद दुखद है।

भारतीय शिक्षा के बारे में उनकी रिपोर्ट ‘ बिना बोझ के शिक्षा’ को एक असाधारण दस्तावेज माना जाता है। यशपाल समिति की रिपोर्ट में उन्होंने शिक्षा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। उनका मानना था कि चुनाव आयोग की तर्ज पर ही राष्ट्रीय उच्च शिक्षा और शोध आयोग का गठन हो। आई आई टी और आई आई एम को विश्वविद्यालय की मान्यता मिले। उन्होंने यह भी सुझाया कि विदेशी शिक्षाविद और विश्वविद्यालयों से परहेज किया जाय। स्पष्ट है कि वे भारत में विदेशी विश्वविद्यालय के खोले जाने के पक्ष में नहीं थे। इस तरह वे शिक्षा को बाजार की वस्तु बनाने के भी खिलाफ थे।
उनके वैज्ञानिक व्यक्तित्व पर फ़िल्मकार युसूफ सईद ने ‘ यशपाल : अ लाइफ इन साइंस ‘ नामक फिल्म भी बनाई है।
ऐसी सूझबूझ वाले महान वैज्ञानिक का निधन हम सब के लिए असहनीय है। जन संस्कृति मंच उनके के प्रति अपनी हार्दिक श्रद्धांजलि व्यक्त करता है।

 

Leave a Comment

aplikasitogel.xyz hasiltogel.xyz paitogel.xyz