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आक्सीजन कांड की चार्जशीट में डा. राजीव मिश्र और डा. कफील खान पर गबन का भी आरोप

बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर

आईपीसी की धारा 409 में आजीवन कारावास की सजा का है प्रावधान
गोरखपुर, 26 नवम्बर। बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर में आक्सीजन संकट के कारण बच्चों की मौत के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार सभी नौ लोगों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दिया है. पुलिस ने चार्जशीट में बीआरडी मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. राजीव मिश्र और तत्कालीन एनएचएम नोडल अधिकारी डा. कफील खान पर सरकारी धन के गबन का भी आरोप लगाते हुए आईपीसी की धारा 409 जोड़ा है. इस अपराध में आजीवन कारावास की सजा है. अन्य सात आरोपियों पर जो धाराएं लगायी गई हैं उनमें पांच वर्ष से कम की सजा का प्रावधान है.
बीआरडी मेडिकल कालेज में 10 अगस्त की रात लिक्विड मेडिकल आक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो गई थी जो 13 अगस्त की अल सुबह बहाल हो पायी. इस दौरान 10, 11 और 12 अगस्त को क्रमशः 23, 11 व 12 बच्चों की की मौत हुई. 10 और 11 अगस्त को मेडिसिन वार्ड में 18 वयस्क मरीजों की भी मौत हुई. प्रदेश सरकार ने शुरू से ही आक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत होने से इनकार किया. उसका कहना था कि लिक्विड आक्सीजन की सप्लाई जरूर बाधित हुई थी लेकिन जम्बो आक्सीजन सिलेण्डर की पर्याप्त व्यवस्था थी जिसके कारण किसी मरीज की मौत नहीं हुई. सरकार द्वारा गठित जांच समितियों ने भी सरकार की ही बात को अपनी जांच रिपोर्ट में तस्दीक की.
इस मामले में डीएम द्वारा गठित जांच समिति और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की संस्तुतियों के आधार पर आक्सीजन कांड के लिए पूर्व प्राचार्य डॉ राजीव मिश्र, नोडल अधिकारी एनएचएम 100 बेड इंसेफेलाइटिस वार्ड डॉ कफील खान , एचओडी एनस्थीसिया विभाग एवं आक्सीजन प्रभारी डॉ सतीश कुमार, चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल, सहायक लेखा अनुभाग उदय प्रताप शर्मा, लेखा लिपिक लेखा अनुभाग संजय कुमार त्रिपाठी, सहायक लेखाकार सुधीर कुमार पांडेय, आक्सीजन सप्लाई करने वाली कम्पनी पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मनीष भंडारी और पूर्व प्राचार्य डा. राजीव मिश्र की पत्नी डॉ पूर्णिमा शुक्ला को दोषी ठहराया. इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफतार किया गया गया.
विवेचना अधिकारी सीओ कैंट अभिषेक सिंह ने सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी है. पहले डा. राजीव मिश्र और डा. कफील खान को छोड़ सात आरोपियों के खिलाफ अक्टूबर माह में चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी. डा. राजीव मिश्र और डा. कफील के खिलाफ दो दिन पहले चार्जशीट दाखिल की गई है.
सीओ कैंट अभिषेक सिंह ने गोरखपुर न्यूज़ लाइन को बताया कि विवेचना में पूर्व प्राचार्य डा. राजीव मिश्र और डाॅ. कफील खान के खिलाफ सरकारी धन के गबन के साक्ष्य मिले हैं। इसलिए दोनों पर आईपीसी की धारा 409 भी लगाया गया है। दोनों ने सरकारी धन का व्यक्तिगत हित में उपयोग किया। इस धारा में आजीवन कारावास की सजा है। इसके अलावा डा. कफील पर आईपीसी की धारा 308 यानि आपराधिक मानव वध का प्रयास और धारा 120 बी आपराधिक षडयंत्र लगाया गया है. आईपीसी की धारा 308 में अधिकतम पांच वर्ष की सजा का प्रावधान है.
डाॅ. कफील खान पर आक्सीजन की कमी को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में न लाने, उत्तर प्रदेश मेडिकल काउसिंल में पंजीकृत न होने के बावजूद अपनी पत्नी के नर्सिंग होम में प्राइवेट प्रेक्टिस  करने, मेडिकल कालेज में मरीजों के इलाज में अपेक्षित सावधानी और उनके जीवन को बचाने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं करने तथा संचार एवं डिजिटल माध्यम से धोखा देने के इरादे से गलत तथ्यों को संचार माध्यम से प्रसारित करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज किया गया था.
विवेचना में डा. कफील पर आईटीएक्ट की धारा 66 में कोई आपराधिक कृत्य का साक्ष्य नहीं मिला। इसलिए इसे हटा लिया गया. प्राइवेट प्रेक्टिस चूंकि क्रिमिनल केस नहीं है, इसलिए इसको चार्जशीट में शामिल नहीं किया गया है. इस मामले में विभागीय कार्रवाई चल रही है.
डा. राजीव मिश्र पर भी 409, 308, 120 बी और 7 13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा लगाई गई है.
अन्य आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धोखाधड़ी, रिकार्ड में कूटरचना, आपराधिक षडयंत्र के आरोप लगाए गए हैं. इन आरोपों में अधिकतम पांच वर्ष की सजा हो सकती है.
विवेचना अधिकारी सीओ कैंट अभिषेक सिंह का कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ विवेचना में पुख्ता साक्ष्य मिले हैं. आरोपी सजा से बच नहीं पाएंगें।

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