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आज रात 8.30 बजे होगा 10 वें लोकरंग का आगाज

जोगिया जनूबी पट्टी में जुटे देश-विदेश के 100 से अधिक लोक कलाकार

राजस्थान के कालबेलिया और झारखंड के बिरजिया आदिवासी समुदाय का नृत्य-गीत देख सकेंगे दर्शक  

कुशीनगर , 11 अप्रैल। लोक कलाओं के विकास के लिए 2008 में जगिया जनूबी पट्टी में शुरू हुए लोकरंग के आयोजन के आज 10 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर आयोजित 10 वां लोकरंग आज से प्रारम्भ हो रहा है। रात 8.30 बजे भव्य मुक्ताकाशी मंच पर लोकरंग का आगाज होगा। दो दिवसीय इस आयोजन में शामिल होने के लिए देश -विदेश के 100 से अधिक कलाकार जोगिया में जुट गए हैं।

कथाकार सुभाष कुशवाहा की अगुवाई में लोकरंग सांस्कृतिक समिति के लोग कलाकारों के स्वागत से लेकर मंच की व्यवस्था के इंतजाम में जुटे हैं।

कुशीनगर जिले के फाजिलनगर कस्बे के पास स्थित गांव-जोगिया जनूबी पट्टी में 10वें लोकरंग में पहली बार पूर्वांचल की धरती से सूरीनाम भेजे जाने वाले गिरमिटिया मजदूरों के वंशज भी इस आयो गीतों के साथ भाग ले रहे हैं ।

प्रख्यात सरनामी (हिन्दुस्तानी मूल) भोजपुरी गायक राज मोहन जी अपने साथी सोरद्ज (सूरज) सेवलाल और पावन माहरे जोगिया पहुँच गए हैं। राज मोहन नीदरलैंड और सूरीनाम के जाने-पहचाने सरनामी भोजपुरी और पाॅप गायक हैं। इनके अब तक गजल, भजन, पाप के पाँच एलबम आ चुके हैं। इन्होंने फ्रांस, गुयाना, दक्षिण अफ्रिका, मारीशस , भारत सहित कई यूरोपीय देशों में अपनी प्रस्तुतियाँ दी हैं।

इस आयोजन में झारखंड का बिरजिया आदिवासी समुदाय के कलाकार भी आए हैं। ये कलाकार बिरजिया, करम, सरगुल और महादेव नृत्य प्रस्तुत करेंगे।

आज पहले दिन राजस्थान से आए कालबेलिया आदिवासी समाज का नृत्य, गीत भी प्रमुख आकर्षण होगा। इसके अलावा हिरावल पटना के जनगीत, रामजी सिंह व उनके साथियों का निर्गुण गायन भी सुनने -देखने को मिलेगा।

आज की रात परिवर्तन समूह, ग्वालियर द्वारा ‘बाबूजी’ नौटंकी नाटक प्रस्तुत किया जायेगा जिसको नौटंकी शैली में रूपांतरण एवं निर्देशन जाने-माने रंगकर्मी, फिल्म एवं संगीत निर्देशक, ज़फर संजरी ने किया है।

 लोकरंग का यह आयोजन हिन्दी के महान घुम्मकड़ साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन और दलित चेतना के गुमनाम कवि हीरा डोम को समर्पित है।

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