जनपद

इश्क-ए-नबी ईमान की रूह : मौलाना अजहर

नबियों, वलियों के दर से मिलता है फैज : मौलाना असलम

गाजी मियां की जिंदगी हमारे लिए नमूना : मौलाना शादाब

गाजी मियां के उर्स के मौके पर रसूलपुर में जलसा

गोरखपुर, 22 अप्रैल । हजरत सैयद सालार गाजी मसूद रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स के मौके पर गुलामाने मुस्तफा नौजवान कमेटी के तत्वावधान में शुक्रवार को रसूलपुर  में  रात ९.३० बजे जलसा-ए-ईद मिलाद का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरूआत तिलावत कुरआन पाक से मौलाना जहांगीर अहमद ने की। नात शरीफ इरशाद अमद कादरी व कफील अहमद नें पढ़ी। मुख्य अतिथि  जामिया शम्सुल उलूम मऊ के मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि इश्क-ए-नबी ईमान की रूह है. जिस दिल में नबी की मोहब्बत ना हो वह दिल मोमिन का दिल हो ही नहीं सकता है। इस्लाम में तमाम समस्याओं का हल कुरआन, हदीस, इज्माये उम्मत व कयास के जरिए संभव हैं. इल्में दीन खुद भी हासिल करें और अपने बच्चों को सिखाएं. ताकि आपको कोई गुमराह ना कर सकें।
मौलाना मोहम्मद असलम ने कहा कि नबियों, वलियों के दर से सभी को फैज मिलता है। अल्लाह  नेक बंदों के जरिए हम पर रहमत नाजिल फरमाता है। मौलाना मोहम्मद शादाब ने कहा कि हजरत सैयद सालार मसूद गाजी रहमतुल्लाह अलैह ने अपनी सारी जिंदगी रजायें इलाही में  गुजार दी, इसलिए वह आज हमारे दिलों में जिंदा हैं. कयामत तक उनका फैज जारी रहेगा। कार्यक्रम के अंत में सलातो सलाम पढ़ा गया, दुआ मांगी गयी, शीरीनी तकसीम की गयी।

इस मौके पर वहीदुज्जमा, आफताब आलम, रियाजुलहक, मोहम्मद सिद्दीक, सेराज आलम, नाजे भाई, समीउल्लाह, रजीउल्लाह, सैफ, तनवीर, मेहताब, मुनव्वर, अफसर आदि मौजूद रहें.