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एम्स के चिकित्सकों के साथ मानवाधिकार आयोग की टीम इंसेफेलाइटिस प्रभावित जिलों का दौरा करेगी

इंसेफलाईटिस से प्रभावित बच्चा (फाइल फोटो)

छह सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश

सामाजिक कार्यकर्ता राजेश मणि की शिकायत पर आयोग ने लिया निर्णय

गोरखपुर, 29 नवम्बर। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफलाईटिस से बच्चों की मौत को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक बार फिर गंभीरता से लिया है और आयोग की इन्वेस्टिगेटिंग टीम को एम्स के चिकित्सकों के साथ प्रभावित जिलों का दौरा कर छह सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
आयोग ने यह निर्णय सामाजिक कार्यकर्ता राजेश मणि की इस मामले में 3 मई 2013 को की गई शिकायत पर जारी कार्यवाही के आलोक में लिया है। श्री मणि की शिकायत केस संख्या-17123/24/0/2013 के तहत मानवाधिकार आयोग में दर्ज है। आयोग ने इसके पहले भी एक बार एम्स के चिकित्सकों के साथ अपनी टीम भेजी थी जिसने गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज जिले का दौरा कर आयोग को अपनी रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में कई सुझाव भी दिए गए थे।

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सामाजिक कार्यकर्त्ता राजेश मणि

इस वर्ष 20 जुलाई को राजेश मणि ने आयोग को जापानी इंसेफेलाइटिस के बढ़ते मामले से आगत कराया था। इसके बाद आयोग ने खुद लखनऊ आकर मामले की सुनवाई की। सुनवाई के समय राजेश मणि को भी बुलाया गया। उन्होंने 10 अगस्त 2017 को लखनउ जाकर आयोग के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत किया था।
साढ़े तीन माह बाद आयोग ने एक बार फिर अपनी टीम प्रभावित जिलों में भेजने का निर्णय लिया है। आयोग ने कहा कि टीम की रिपोर्ट को पूर्व आयी रिपोर्ट के साथ देखा जाएगा।
श्री मणि ने बताया कि आयोग से उन्हें इस निर्णय के बारे में जानकारी दी गई है। आयोग की टीम अपने दौरे के दौरान यह जानने का प्रयत्न करेगी की आखिर क्या कारण है कि इतने उपाय के बाद भी इस त्रासदी से पूर्वाचंल का क्षेत्र मुक्त नही हो पा रहा है ? उन्होंने कहा कि जब तक सामुदायिक स्वास्थ्यकेन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला अस्पताल के साथ ही इंसेफलाईटिस ट्रीटमेन्ट सेन्टर को प्रभावी बनाने के साथ ही, जल निगम, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण एवं पंचायत विभाग मिलकर सामूहिक प्रयास नही करेंगे तब तक इस समस्या का समाधान कर पाना कठिन है।

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