स्वास्थ्य

एम्स पर नूरा कुश्ती न खेले केंद्र और प्रदेश सरकार

गोरखपुर हेल्थ फोरम ने एम्स के मुद्दे पर जन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया
गोरखपुर, 5 अप्रैल। गोरखपुर हेल्थ फोरम ने आज गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में गोरखपुर में एम्स के मुद्दे पर जन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें एक स्वर से एम्स निर्माण के मुद्दे को केन्द्र और प्रदेश सरकार द्वारा एक दूसरे पर टालने की तीखी आलोचना की गई। जन संवाद में मांग की गई कि दोनों सरकारें बहानेबाजी छोड़ें। केन्द्र सरकार स्पष्ट रूप से गोरखपुर मंे एम्स बनाने की घोषणा करते हुए बजट जारी करे तो प्रदेश सरकार खुटहन में चयनित भूमि को एम्स के नाम करते हुए सड़क चैड़ीकरण कार्य तुरन्त शुरू करे।
इस सम्मेलन में भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों और इस मुद्दे पर संघर्ष कर रहे संगठनों को आमंत्रित किया गया था लेकिन इसमें भाजपा और बसपा की ओर से कोई प्रतिनिधि नहीं आया। सपा के जिलाध्यक्ष डा. मोहसिन खान, कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष डा. पीएन भट्ट, भाकपा माले के जिला सचिव राजेश साहनी, आप के जिलाध्यक्ष प्रबल प्रताप शाही, भाकिूय भानू गुट के मंडल अध्यक्ष अरविंद सिंह, जिलाध्यक्ष रामकिशुन सिंह सिंह ने अपने दल की की राय रखी।
सम्मेलन में सबसे पहले गोरखपुर हेल्थ फोरम के संयोजक एवं गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो राधेमोहन मिश्र ने सभी लोगों का स्वागत किया और कहा कि उन्हें खुशी है कि आज एम्स की मांग ने जनआंदोलन का रूप ले लिया है। उन्होंने वर्ष 2008 में सबसे पहले एम्स की मांग उठाने से लेकर अब तक गोरखपुर हेल्थ फोरम के प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश है कि सभी दल और संगठन इस मुद्दे पर एकजुट हो और दोनों सरकारों पर इसका निर्माण जल्द शुरू कराने का दबाव डालें। पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता मनोज कुमार सिंह ने वर्ष 2006 में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत राज्यों में एम्स जैसा संस्थान बनाने से लेकर अब तक हुई प्रयासों और इस बारे में सभी तथ्यों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि देश में सबसे अधिक एम्स जैसे संस्थान की जरूरत कहीं है तो वह गोरखपुर है लेकिन पिछले दस वर्षों से यहां की जनता से छल करने का काम किया गया है। आज एक बार फिर दिल्ली और लखनउ की सरकारें बेवजह का मुद्दा बनाकर एम्स के निर्माण में देरी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में हर वर्ष एक मिलियन लोगों की जान चली जाती है। इसलिए गोरखपुर मंे मेडिकल कालेज को मजबूत करने से लेकर एम्स निर्माण में देरी के कारण स्वास्थ सुविधाओं के अभाव में होने वाली हर मौतों की जिम्मेदार इस दौरान सत्ता में रहीं सरकारों और जनप्रतिनिधियों पर है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि केन्द्र सरकार गोरखपुर में एम्स बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तो वह पत्राचार में ‘ गोरखपुर में एम्स ’ के बजाय ‘पूर्वांचल में एम्स’ का बार-बार क्यों जिक्र कर रही है।
पीयूसीएल के जिलाध्यक्ष फतेहबहादुर सिंह ने कहा कि हमारे पास जो तथ्य हैं उससे स्पष्ट है कि सरकारें एम्स के मुद्दे पर टालू रवैया अपना रही हैं जो बर्दाश्त के बाहर है। आंदोलन को मुख्य राजनीतिक दलों के भरोसे नहीं जनता के बल खड़ा करना होगा। कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष डा. पीएन भट्ट ने एम्स और इंसेफेलाइटिस के लिए कांग्रेस के प्रयासों का जिक्र करते हुए आज एम्स को लेकर केन्द्र और प्रदेश सरकार नूराकुश्ती कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े-बड़े नर्सिंग होम और अस्पताल खोलकर बैठे कुछ राजनेता एम्स के निर्माण में बाधा डाल रहे हैं। भाकियू भानू गुट के जिलाध्यक्ष रामकिशुन सिंह ने केन्द्र और प्रदेश सरकार को पूर्वांचल के लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने से बाज आने की चेतावनी दी और कहा कि अब आंदोलन को निर्णायक बनाना होगा। इसी दल के मंडल अध्यक्ष अरविंद सिंह ने कहा कि उनके दल ने गोरखपुर-बस्ती मंडल में आम लोगों को इस आंदोलन से जोड़ने का काम किया है। अब हम इसके निर्माण में बाधा बन रहे लोगों को करारा जवाब देंगे।
सपा के जिलाध्यक्ष डा. मोहसिन खान ने कहा कि प्रदेश सरकार ने खुटहन में सड़क चैड़ा करने सहित अन्य सभी सुविधाओं के लिए 180 करोड़ के बजट का प्राक्लन बना कर तैयार कर दिया है। केन्द्र सरकार को चाहिए कि वह तत्काल खुटहन में एम्स निर्माण की सहमति दे। उन्होंने कहा कि भूमि के बारे में हर बाधा को प्रदेश सरकार दूर करेगी। उन्होंने भाजपा और केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग जमीन के विवादित होने का सवाल खड़ा कर रहे हैं वह फर्टिलाइजर को क्यों नहीं शुरू करा देते और गोरखपुर विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दे देते। वहां तो कोई भूमि विवाद नहीं है।  भाकपा माले के जिला सचिव राजेश साहनी ने कहा कि सपा को पूर्वांचल की जनता से सच्ची हमदर्दी है तो उसे खुटहन की जमीन को फोर लेने से जोड़ने का कार्य तुरन्त शुरू कर देना चाहिए और केन्द्र सरकार को बहाना बनाने का मौका नहीं देना चाहिए। उन्होंने केन्द्र और प्रदेश सरकार की नीयत पर संदेह जताते हुए आरोप लगाया कि दोनों सरकारों की एम्स बनाने में रूचि नहीं है बल्कि वे इसे विधानसभा चुनाव के लिए मुद्दा बनाना चाहती हैं। आप के जिलाध्यक्ष प्रबल प्रताप शाही सपा और भाजपा पर इस मुद्दे पर ड्रामा करने का आरोप लगाया और कहा कि दोनो बड़े-बड़े दावें कर रहे हैं लेकिन हालत यह है कि मेडिकल कालेज में कर्मचारियों, नर्सों, डाक्टरों को नौकरी से हटाया जा रहा है और उन्हें वेतन तक नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यहां के सांसद और विधायक सच में गंभीर हैं तो बयानबाजी छोड़ इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को घेरने का काम करें। वरिष्ठ पत्रकार अशोक चैधरी ने एम्स का मुद्दा पूर्वांचल के किसानों, मजदूरों, गरीबों का मुद्दा बनाना होगा। उन्होंने सरकारों की स्वास्थ्य नीति पर सवाल खड़े किए और कहा कि हमें स्वास्थ्य व शिक्षा के निजीकरण का भी विरोध करना चाहिए। पत्रकार अनिता सिंह ने इस आंदोलन मंे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का सुझाव दिया। नई उम्मीद संस्था के सर्वेश्र मिश्र ने जनसंवाद में भाजपा के शामिल न होने पर सवाल खड़ करते हुए कहा कि इससे स्पष्ट है कि उनके पास तथ्यों पर बात करने के लिए कुछ नहीं है। ’ हम ’ संस्था के रजनीश श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए चुने हुए जनप्रतिनिधियों को जवाब देना होगा कि फर्टिलाइजर क्यांें बंद है और एम्स के मुद्दे को किसी राजनीति के कारण लटकाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि एम्स निर्माण में देरी होने पर यहां के जनप्रतिनिधियों को जनता के जबर्दस्त आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने आंदोलन को और व्यापक बनाने पर भी बल दिया।
जनसंवाद में कमिश्नर कोर्ट बार के अमलेन्दु ने भी विचार रखे। संचालन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता मारकंडेय मणि ने नई उम्मीद, हम और भाकियू भानू द्वारा गोरखपुर से कटरा तक एम्स के लिए पदयात्रा के अनुभव को साझा किया और कहा कि यह मुद्दा आम लोगों तक पहुंच गया है और इसकी अनदेखी सरकारों और मुख्य राजनीतिक दलों को भारी पड़ेगी। कार्यक्रम में प्रदीप कुमार, मनीष सिन्हा, मनीष, सोनू श्रीवास्तव, एपवा की जिला सचिव मनोरमा चैहान सहित कई लोग उपस्थित थे।