समाचार साहित्य - संस्कृति

कवि, पत्रकार अरुण गोरखपुरी नहीं रहे

एक सप्ताह से बीमार थे,  निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन

गोरखपुर, 12 जुलाई। वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि हरीन्द्र द्विवेदी उर्फ अरुण गोरखपुरी का बुधवार की दोपहर निधन हो गया. वह 65 वर्ष के थे.

अरुण गोरखपुरी ने उन्होंने गोरखपुर से प्रकाशित होने वाले कई समाचार पत्रों में कार्य किया. सबसे अधिक समय तक उन्होंने दैनिक जागरण में कार्य किया. इस वक्त वह यहाँ से प्रकाशित होने वाले न्यूज फॉक्स में कार्य कर रहे थे.

वह भोजपुरी और हिंदी में कविता लिखते थे.अरुण गोरखपुरी उनका कवि नाम था. उन्हें भोजपुरी जीवन, संस्कृति में पेज हुए थे. वह लोगों से भोजपुरी में ही बात करते.

उन्होंने 27 जून को फेसबुक वाल पर यह कविता पोस्ट की थी –

तुममें भोर, भोर में तुमको, देख सकूं तो अच्छा है
जीवन को जीवन मे यारा, देख सकूं तो अच्छा है
रिमझिम रिमझिम, बरसाती बूंदों का सुर सरगम
आंखों से मौसम का नर्तन, देख सकूं तो अच्छा है

11जून को उन्होंने अपना पूरण भोजपुरी गीत पोस्ट किया था

कइसे के सोना
सवंरिहैं धरतिया
कइसे के
होई रे उजास
नह भर जिनिगी
गदोरी भर सपना
चला चलीं
चनन अकास

भाई न
बहिनि जानै
माई न
रहनि जाने
जानै नाहीं
लछिमी क बास
नह भर जिनिगी
गदोरी भर सपना
चला चलीं
चनन अकास

जनपद के  खजनी तहसील के बढ़यापार गांव के मध्यमवर्गीय परिवार में एक  जुलाई 1952 को जन्मे हरीन्द्र द्विवेदी लगभग एक सप्ताह से बीमार चल रहे थे. उन्होंने परिवारीजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। बुधवार की सुबह उन्होंने खुद कार्यालय के एक साथी  के फोन कर अपनी पीड़ा बया किया. इसके बाद उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां इलाज के दौरान दोपहर में निधन हो गया. उनके निधन की खबर सुनकर पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र से जुड़े प्रबुद्धजनों में शोक की लहर दौड़ पड़ी. जो जहां सुना अवाक रह गया और लोगों सहज ही विश्वास नहीं हो रहा था कि यह जिंदादिल शख्स हम सभी के बीच नहीं रहा.

स्व हरीन्द्र  द्विवेदी को अंतिम संस्कार गुरुवार की सुबह कुआनो नदी के देवराघाट पर किया जाएगा जो उनके पैतृक गांव बढ़यापर से महज तीन किमी के दूरी पर स्थित है.
उनके निधन पर न्यूज फॉक्स कार्यालय में स्व हरीन्द्र द्विवेदी की याद में शोकसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान संपादक रामेन्द्र सिन्हा ने कहा कि अरुण गोरखपुरी पेशे के प्रति समर्पित पत्रकार थे। उनके निधन से पत्रकारिता जगत की अपूणीय क्षति हुई है। उनकी रचनाएं हम सभी को प्रेरणा देने वाली है। एमडी ध्रुव कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उनका न होना हम सभी को पूरी जिंदगी खलेगा। संस्थान को उनका दिया योगदान अमूल्य है।  श्रद्धांजलि देने वालों में अशोक मिश्र, सदाशिव त्रिपाठी, अशोक चौधरी, विश्वदीपक त्रिपाठी, अरविंद श्रीवास्तव, मोहन राव,नीरज ओझा, अविनाश श्रीवास्तव, नरेन्द्र राय, सत्येन्द्र सार्थक, शफी अंसारी , बागीश श्रीवास्तव, ओंकार सिंह, अनिल पाण्डेय, संजय तिवारी, अखिलेश श्रीवास्तव, गंगादयाल दुबे, देशदीपक पाठक, मनोज पाण्डेय, विजय कुमार, भोला पाण्डेय, अमरनाथ कौशिक, शिल्पी सिंह, वैभव श्रीवास्तव, उमेश चंद श्रीवास्तव, अंकित श्रीवास्तव, ओपी चतुर्वेदी, विजयदीप, अजय शर्मा, तनवीर अहमद, ज्योति सिंह,धर्मेन्द्र तिवारी, सुग्रीव कुमार गौतम, राजेश मौजूद रहे।

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