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किसानों के विरोध के बीच मानबेला में 50 आवंटियों को जीडीए ने भूखंड पर कब्जा दिलाया

भारी पुलिस बल ने किसानों और कांग्रेस नेता राणा राहुल सिंह को पूरे दिन रोके रखा
किसान सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजे पर अड़े, कहा-निर्माण कराने पर स्थिति बिगड़ेगी
19 को भी जारी रह सकती है आवंटियों को कब्जा दिलाने की कार्यवाही
गोरखपुर, 18 जनवरी। किसानों के विरोध के बावजूद भारी पुलिस बल के बल पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने आज राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना के 50 आवंटियों को उनके भूखण्ड पर कब्जा दिलाया। सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा दिए बिना आवंटियों को कब्जा दिलाने की कार्यवाही का विरोध कर रहे करीब 100 किसानों और उनकी अगुवाई कर रहे कांग्रेस नेता राणा राहुल सिंह को पुलिस ने सुबह दस बजे से पांच बजे तक धरना तो देने दिया लेकिन उन्हें कहीं आने-जाने पर रोक लगाते हुए एक तरह से हिरासत में रखा। जीडीए प्रशासन ने 19 जनवरी को भी आवंटियों को कब्जा दिलाने की बात कही है।
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आज सुबह एडीएम नगर प्रभुनाथ, एसपी नार्थ गणेश साहा, जीडीए के सचिव राम सिंह गौतम की अगुवाई में बड़ी संख्या में पुलिस बल और जीडीए के कर्मचारी पोखरभिंडा उर्फ करीमनगर पहुंचे। आवंटियों को पहले से ही सूचना देकर बुलाया गया था। मौके पर 60 आवंटी पहुंच भी गए थे। जीडीए अधिकारी उनके भूखण्ड चिन्हित कर पैमाइश कर खूंटा गाड़ने लगे और आवंटी को कब्जा देने लगे।

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इसी बीच कांग्रेस नेता राणा राहुल सिंह के नेतृत्व में 100 की संख्या में किसान वहां पहुंच गए और कार्यवाही का विरोध करने लगे। इनका कहना था कि जीडीएम सर्किल रेट से काफी कम मुआवजा दे रहा है जो उन्हें मंजूर नहीं है। जब तक मुआवजे पर किसानों से सहमति नहीं बन जाती है तब तक यह कार्यवाही न की जाए। जीडीए अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेश पर आवंटियों को कब्जा दिलाने का हवाला दिया। जब किसानों का विरोध जारी रहा तो पुलिस ने उन्हें जबरन हटाने की कोशिश की। इस पर कांग्रेस नेता राणा राहुल सिंह सहित सभी लोग मौके पर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने उन्हें चारो तरफ से घेर लिया। किसान जब भी आगे बढ़े उन्हें रोक दिया। इसको लेकर कांग्रेस नेता और पुलिस कर्मियों के बीच कई बार नोंक झोंक व धक्का मुक्की भी हुई।

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पुलिस ने मानबेला, करीमनगर की तरफ से आने वाले रास्तों पर भी नाकाबंदी कर रखी थी और ग्रामीणों केा कब्जे की कार्यवाही स्थल तक आने से रोकती रही। इससे किसान एक स्थान पर बड़ी संख्या में एकत्र नहीं हो पाए।
उधर जीडीए अधिकारी आवंटियों को उनके भूखण्ड पर कब्जा दिलाने की कार्यवाही जारी रखे। शाम पांच बजे तक 50 आवंटियों को कब्जा दिला दिया गया। इस मौके पर राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना आवंटी संघर्ष समिति के संरक्षक रमेश कुमार गुप्त, महामंत्री अशोक अस्थाना आदि मौजूद थे। भूखंडों पर कब्जा न मिलने पर समिति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर किया था जिस पर हाईकोर्ट ने जीडीए उपाध्यक्ष को आवंटियों को कब्जा दिलाकर अदालत में तलब किया है। इस मामले की सुनवाई 23 जनवरी को होनी है। इसी कारण जीडीए प्रशासन सक्रिय हुआ है।

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जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने कहा कि पुलिस बल उपलब्ध हुआ तो वह कल भी मौके पर आवंटियों को कब्जा दिलाने आएंगे। उन्होंने जीडीए के मुख्य अभियंता से आवसीय योजना की भूमि को समतल कराने को भी कहा। समिति के पदाधिकारियों ने मांग की कि पुलिस और जीडीए अधिकारी मौके पर कैम्प करें और आवंटियों को अपने भूखण्ड पर निर्माण कार्य कराने में सहायता करें।
किसानों ने धरना स्थल पर सभा की और पुलिस-जीडीए की कार्यवाही का विरोध किया। कांग्रेस नेता राणा राहुल सिंह ने कहा कि प्रशासन पुलिस बल के दम पर किसानों की न्याोचित मांग को दबा रहा है। आज की कार्यवाही से किसानों में काफी रोष है। उन्होंने कहा कि यदि जीडीए ने निर्माण कार्य शुरू किया तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

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धरना दे रहे किसान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी काफी नाराज दिखे। उनका कहना था कि जब वह मुख्यमंत्री नहीं थे तो हम लोगों के बीच आकर सर्किल रेट से मुआवजा नहीं मिलने तक आंदोलन की बात करते थे। आज मुख्यमंत्री हो गए तो सिर्फ 64 रूपए वर्ग फीट की दर से मुआवजा दिलवा रहे हैं जबकि सर्किल रेट 1200 से 1500 रूपए वर्ग मीटर है। किसानों ने रात को रणनीति बनाकर आगे से आंदोलन का तरीका तय करने की बात कही।
नौ वर्ष पहले हुआ था भूमि अधिग्रहण
वर्ष 2009 में जीडीए ने मानबेला, पोखरभिंडा उर्फ करीमनगर, फत्तेपुर सहित एक दर्जन गांवों की करीब 124 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की थी। किसानों ने उस समय भी काफी कम सिर्फ 16 रूपए वर्ग फीट मुआवजा दिए जाने का आरोप लगाते हुए किसान नेता दिवाकर सिंह की अगुवाई में आंदोलन किया था लेकिन पुलिस ने कई बार किसानों पर बुरी तरह लाठीचार्ज कर जमीन अधिग्रहीत कर ली और इसमें से 57 एकड़ पर राप्तीनगर विस्तारित आवासीय योजना की शुरूआत करते हुए 893 भूखंड बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी। जीडीए ने 893 आवंटियों को भूखंड बेच भी दिए और उनकी रजिस्टी की कार्यवाही शुरू कर दी। इसी बीच मुआवजे का विवाद कोर्ट में चला गया और रजिस्टी की कार्यवाही रूक गई। आवंटियों को उनकी भूमि पर कब्जा भी नहीं दिया गया। इस पर वे हाईकोर्ट में चले गए।

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सूबे में नई सरकार बनने के बाद जीडीए ने किसानों से बातचीत की पहल की। किसानों के एक गुट से बातचीत कर जीडीए ने 70 लाख रूपए हेक्टेयर की दर से मुआवजा देने की बात कही। साथ में यह शर्त लगा दी कि पूर्व में दिए गए मुआवजे पर हुए ब्याज को कुल दिए जाने वाले मुआवजे से कम किया जाएगा। इससे वह किसान भी नाराज हो गए जो नए दर पर मुआवजा लेना चाहते थे। अधिकतर किसान सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। बाद में जीडीए ने ब्याज कटौती की शर्त वापस ले ली लेकिन किसान सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजे की मांग पर अडे रहे। इस कारण दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बन पाई।

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