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कुशीनगर में गरीबी से तंग युवा दम्पत्ति ने बच्चों को जहर खिलाने के बाद खुदकुशी की

बच्चों की जान बची, मेडिकल कालेज में चल रहा है इलाज
प्रशासन ने दम्पत्ति की खुदकुशी के लिए गरीबी नहीं सम्पत्ति विवाद कारण बताया
पिंटू के भाई ने कहा-विवाद नहीं मुफलिसी के कारण दी भाई ने जान
भाकपा माले नेता मेडिकल कालेज में भर्ती बच्चों से मिले, गरीब परिवार को राशन कार्ड, जाब कार्ड, आवास न मिलने पर उठाया सवाल
गोरखपुर, 4 जून। कुशीनगर जिले के जगदीशपुर धर्मदानी गांव में गरीबी के कारण एक युवा दम्पत्ति ने बच्चों को जहर खिलाने के बाद खुद जहर खाकर आत्महत्या कर ली। पति-पत्नी की अस्पताल में मौत हो गई जबकि दोनों बच्चों की जान बच गई।
प्रशासन ने दम्पत्ति की आत्महत्या कारण गरीबी के बजाय भाइयों के बीच सम्पत्ति विवाद बताया है लेकिन आत्महत्या करने वाले पिंटू के भाई ने कहा कि भाइयों के बीच कोई सम्पत्ति विवाद नहीं था। चार भाइयों के पास कोई सम्पत्ति ही नहीं है तो विवाद किस बात का। सभी मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह पेट जिला रहे हैं। छोटे भाई ने मुफलिसी से तंग आकर जान दी।
कुशीनगर जिले के अहिरौली थाना क्षेत्र के बिचवा टोला निवासी पिंटू ने रविवार की शाम अपने दो छोटे बेटों 5 वर्षीय नसीम और 3 वर्षीय अरबाज को जहर खिलाने के बाद पत्नी महिशा खातून उर्फ चंदा के साथ जहर खा लिया। जब चारों की हालत बिगड़ने लगी तो पड़ोसियों को जानकारी हुई। उन्होंने चारों को इलाज के लिए ले गए जहां से उन्हें मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल कालेज में देर रात पिंटू और उसकी पत्नी महिशा की मौत हो गई। दोनों बच्चों की हालत भी खराब थी लेकिन इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ है।
पिंटू के पिता रज्जाक और मां की बहुत पहले मौत हो चुकी है। 26 वर्षीय पिंटू चार भाइयों में सबसे छोटा था। सबसे बड़ा मुस्लिम और उसके बाद वाले भाई मियां मुम्बई में मजदूरी करते हैं जबकि तीसरा भाई इस्लाम गुजरात में मजदूरी करता है। पिंटू गांव रहकर ही मजूदरी करता था। तीनों भाई बाहर रहने के बाद कुछ दिनों के लिए गांव आते रहते थे। पुश्तैनी सम्पत्ति के नाम पर इस परिवार के पास दो मंडा यानि 30 डिस्मिल खेत था। एक दशक पहले बहन की शादी में आधा खेत रेहन पर रख दिया गया जिसे आज तक चारों भाई छुड़ा नहीं पाए।
पिंटू गांव के बाहर आबादी की जमीन पर छोटे से टिनशेड में रहता था। उसकी माली हालत  बहुत खराब थी और किसी तरह बीवी व बच्चों की गुजर बशर कर रहा था। बेहद गरीब होने के बावजूद उन्हें न तो राशन कार्ड और न जाब कार्ड दिया गया था। उसने आवास के लिए बहुत कोशिश की लेकिन वह भी नहीं मिला। मुफलिसी के कारण पिंटू तनाव में रहता था और उसे जिंदगी बेहतर होने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी।
इसी हताशा में उसने रविवार की शाम बच्चों को जहर खिलाने के बाद पत्नी के साथ जहर खा लिया।
सोमवार को पति-पत्नी का अंतिम संस्कार गांव में किया गया। दम्पत्ति की मौत की खबर पर कुशीनगर के एएसपी व अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे।
कुशीनगर के डीएम ने पिंटू की मौत के बारे में कहा कि भाइयों से सम्पत्ति विवाद के कारण उसने आत्महत्या की। राशन कार्ड, जाब कार्ड और आवास जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ न मिल पाने के कारण बताते उन्होंने कहा कि पिंटू मुम्बई में रहता था, इसलिए उसे योजनाओं का लाभ नहीं मिला।
भाकपा माले की राज्य कमेटी के सदस्य एवं गोरखपुर के जिला सचिव राजेश साहनी और इंकलाबी नौजवान सभा के नेता सोनू श्रीवास्तव ने कुशीनगर प्रशासन के दावे को झूठा बताया है। दोनों नेता मंगलवार को मेडिकल कालेज जाकर पिंटू के परिजनों से मिले थे। माले नेताओं ने कहा कि जब पूरे परिवार के पास कोई जमीन जायदाद है ही नही ंतो उनके बीच सम्पत्ति विवाद का सवाल ही नहीं उठता है। प्रशासन गांव के सबसे गरीब पिंटू को कोई भी सरकारी योजना का लाभ देने में विफल साबित हुआ है। श्री साहनी ने कहा कि पिंटू और उसकी पत्नी की खुदकुशी के लिए शासन और प्रशासन जिम्मेदार है। उन्होंने इस परिवार की अभी तक कोई सरकारी मदद न किए जाने पर भी सवाल उठाया। माले नेता बुधवार को पिंटू के गांव का दौरा करने जा रहे हैं।

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