क्लिनिकल स्टैब्लिसमेंट एक्ट : इलाज महंगा होगा, आम लोगों की मुसीबत बढ़ेगी

डॉ आर एन सिंह

आम आदमी की सेहत और जिंदगी को हिफाजत के लिए क्लिनिकल स्टैब्लिसमेंट रजिस्ट्रेशन एक्ट को अभी हिन्दुस्तान में लागूं करना वाजिब नहीं है।

यह कानून समृद्ध पाश्चात्य देशों के लिए कार्पोरेट सेक्टर के अनुकूल है। भारत में इसे लागू करने आम जनता का जीवन खतरे में पड़ जायेगा। इलाज पांच से दस गुना महंगा  हो जाएगा, इंस्पेक्टर राज कायम हो जाने से भ्रष्टाचार बढ जाएगा, चिकित्सक समूदाय का कार्पोरेट सेक्टर की ओर और विदेशों में पलायन हो जाने के आम नागरिकों को सस्ती चिकित्सा सेवा नहीं मिल पाएगी।

चिकित्सकों , नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ की भयंकर कमी के कारण एक्ट को लागू करने की अभी सोचना जनहित विरोधी कदम साबित होगा। लोगों की सेहत और जिंदगी खतरे में पड़ जायेगी।

आज 85 फीसदी आम जनता एकल चिकित्सकों पर ही निर्भर है। इस एक्ट से कार्पोरेट सेक्टर को फायदा जरूर पहुंचेगा इलाज दस गुना महंगा हो जाएगा। चिकित्सक भारी संख्या में कार्पोरेट सेक्टर की ओर पलायन करेंगे। कम खर्च में चिकित्सा असंभव हो जायेगी। कम खर्च में इलाज सपना हो जायेगा।

जिस देश में अभी पीने का शुद्ध पानी सभी को नहीं मिल पा रहा हो, जहां सात करोड़ लोग खुले में शौच के लिए मजबूर हों,  51 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार हों , वहां अमेरिका और विलायत का कार्पोरेट फ्रेंडली यह कानून लोगों को सांसत में डाल देगा। गरीबों को जीवन बचाना मुश्किल हो जायेगा।

भारतीय प्राइवेट चिकित्सा कारगर होने के बावजूद दुनिया के विकसित देशों से सौ गुना सस्ती है। इसीलिए अपना देश में मेडिकल टूरिज्म बढ़ रहा है। फिर ऐक्ट के जटिल प्राविधानों से इसकी उपयोगिता कम करना उचित नहीं होगा।

( लेखक आईएमए की गोरखपुर यूनिट के अध्यक्ष रह चुके हैं। वह एन्सेफ्लाइटिस उन्मूलन अभियान के चीफ कैंपेनर हैं )

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