साहित्य - संस्कृति

गीतों, नाटकों, फिल्मों और तर्कशील विचार-विमर्श से फासिस्ट गिरोह बौखला गए हैं -जसम

उदयपुर में प्रतिरोध का सिनेमा फिल्मोत्सव रद्द करवाने की कोशिशों

व नास्तिक सम्मेलन, मथुरा पर फासिस्ट हमले के खिलाफ जसम का बयान

नई दिल्ली ,  15 अक्टूबर। उदयपुर में ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ फिल्मोत्सव के आयोजन स्थल की स्वीकृति को आरएसएस और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दबाव पर रद्द किए जाने तथा वृंदावन, मथुरा में एक निजी परिसर में आयोजित नास्तिक सम्मेलन पर धर्मांध संगठनों द्वारा हमले की जन संस्कृति मंच ने कठोर शब्दों में निंदा करते हुए इस तरह के फासिस्ट हमलों का पूरे देश में हर स्तर पर प्रतिरोध करने की अपील की है।

जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय सचिव सुधीर सुमन दावरा जारी बयान में कहा गया है कि  इसके पहले इंदौर में इप्टा के सम्मेलन पर इसी तरह का हमला हो चुका है. इन सारी घटनाओं में प्रशासन की संलिप्तता बेहद खतरनाक है. ये सारे हमले इसका संकेत दे रहे हैं कि गीतों, नाटकों, फिल्मों और तर्कशील विचार-विमर्श से फासिस्ट गिरोह बौखलाए हुए हैं।
जसम ने कहा कि राजस्थान की भाजपा सरकार की पुलिस ने फिल्मोत्सव के आयोजकों की शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया. ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ फिल्मोत्सव हमेशा किसी सामाजिक मुद्दे पर केंद्रित होता रहा है. इस बार यह प्रतिभाशाली दलित किशोरी डेल्टा मेघवाल, जिनकी बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई और रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या के मामले में न्याय के सवाल पर केंद्रित है. फिल्मोत्सव में कैराना में सांप्रदायिक उन्माद फैलाने की साजिश का पर्दाफाश करने वाली फिल्म‘कैराना सुर्खियों के बाद’ का प्रदर्शन होना था. दलित उत्पीड़न और सांप्रदायिक उन्माद के लिए जिम्मेवार सांप्रदायिक-वर्णवादी संगठनों ने इसी कारण इस आयोजन को रद्द कराने की कोशिश की और एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के डीन और कुलपति ने 16 घंटा पहले आयोजन स्थल की स्वीकृति रद्द कर दी. जो विरोध की हर वाजिब आवाज को कुचल रहे है, जो भारतीय समाज और संस्कृति के साझे मूल्यों को तहस-नहस कर रहे हैं, उनके द्वारा फिल्मोत्सव में समाज को तोड़ने वाली फिल्म दिखाने का आरोप लगाना अपने आप में भारी विडंबना है।
जन संस्कृति मंच ने फिल्मोत्सव के उदयपुर के आयोजकों और दर्शकों के साहस की सराहना की है कि आयोजन को रद्द कराने की कोशिश को धता बताते हुए उन्होंने दूसरे स्थल पर निश्चित समयानुसार फिल्मोत्सव का आरंभ कर दिया,जिसके उद्घाटन सत्र में डेल्टा मेघवाल के पिता महेंद्र राम और ऊना आंदोलन के नेता जयेश सोलंकी ने भी अपने विचार रखे और ‘कैराना सुर्खियों के बाद’ फिल्म का प्रदर्शन भी हुआ. यह आयोजन अगले दो दिन जारी रहेगा.
दूसरी ओर 14 अक्टूबर को ही वृंदावन, मथुरा में होने वाले नास्तिक सम्मेलन के ऊपर हमले करने वाली धर्मांध भीड़ पर अंकुश न लगाने के लिए जन संस्कृति मंच ने उत्तर प्रदेश के सपा सरकार की तीखी आलोचना की है।

 जसम ने कहा है कि इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए विभिन्न समुदायों के  लेखक,पत्रकार, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता मथुरा पहुंचे थे. गुजरात, कर्नाटक, पंजाब, महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंचे थे, जिन पर भगवाधारी धर्मांधों ने हमला बोल दिया. एक वरिष्ठ महिला पत्रकार की इन गुंडों ने बर्बरतापूर्वक पिटाई की. नगर प्रशासन और सपा सरकार की पुलिस इन उन्मादी धर्मांधों के पक्ष में खड़ी रही. कुछ तिलकधारी अफसर, लेखकों और कलाकारों को गिरफ्तार करने की धमकी देते रहे और नास्तिकों के साथ अभद्र भाषा में पेश आते रहे. वहां भाजपा की पोस्टर वाली जीपें भी देखी गईं. हमलावर नास्तिकों को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे. हमलावरों ने आयोजन स्थल पर तोड़फोड़ की. अतिथिगृहों और धर्मशालाओं में सम्मेलन को प्रतिभागियों को न रुकने देने और पहले से आरक्षित कमरे बंद करने के दबाव बनाए गए.
आयोजकों को प्रशासन ने शहर में अशांति की आशंका बताकर इस सम्मेलन को रद्द करने के लिए विवश किया. इस सम्मेलन में भारी संख्या में नौजवान भी शामिल होने पहुंचे थे,जो जाहिर है धर्म और आस्था के नाम पर कायम हिंसा, उत्पीड़न, उन्माद से मुक्ति चाहते हैं. जिस देश में शहीद-ए-आजम भगतसिंह ने ‘मैं नास्तिक क्यों हूं’ जैसे लेख के जरिए अपने नास्तिक होने की घोषणा की, जहां दर्शन की ज्यादातर परंपराएं नास्तिकता से जुड़ी हुई हैं, उस देश में नास्तिकों के सम्मेलन पर हमला न केवल लोकतंत्र, बल्कि इस देश की तर्कशील बौद्धिक परंपरा पर भी हमला है. ऐसे ही धर्मांधों ने डॉ. दाभोलकर, कॉ. गोविंद पनसारे और प्रो. कलबुर्गी जैसी शख्सियतों की हत्या की है. आरएसएस-भाजपा की प्रयोगशाला में ऐसे ही हिंसक बर्बर धर्मांध हमलावर तैयार किए जा रहे हैं. इनका व्यापक स्तर पर प्रतिरोध जरूरी है.

तमाम बाधाओं और हमलों के बावजूद जो लोग नास्तिक सम्मेलन स्थल पर पहुँच चुके थे, उन्होंने सम्मेलन शुरू कर दिया और वह जारी है। आज पुलिस ने टोकाटोकी की तो लोगों ने गिरफ्तार करने की चुनौती दी। इस साहस के लिए हम सम्मेलन के प्रतिभागियों को सलाम करते हैं।

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