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गोरखपुर लोकसभा : पिछले 6 चुनावों से हो रही कांग्रेस की जमानत जब्त

गोरखपुर संसदीय उपचुनाव

सैयद फरहान अहमद

गोरखपुर, 16 फ़रवरी। कांग्रेस पार्टी ने गोरखपुर संसदीय उपचुनाव से  डा. सुरहिता करीम को उम्मीदवार बनाया है। डा. सुरहिता करीम के लिए पार्टी ने बहुत टफ टास्क दिया है क्योकि इस सीट पर चुनाव जितना तो दूर कांग्रेस पिछले छह चुनाव से जमानत भी जब्त होने से नहीं बचा पा रही है.

गोरखपुर संसदीय सीट पर कांग्रेस का रिकार्ड फिफ्टी-फिफ्टी का रहा है। कांग्रेस यहां से 6 बार चुनाव जीत चुकी है लेकिन पिछले 6 लोकसभा चुनाव से कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है.  यहां से वर्ष 1996 (11वीं लोकसभा) में हरिकेश बहादुर ने चुनाव लड़ा और मात्र 14549 (2.60 प्रतिशत) वोट हासिल कर जमानत जब्त करा बैठे। वर्ष 1998 (12वीं लोकसभा) में हरिकेश बहादुर को 22621 (3.59 प्रतिशत) वोट मिला और उनकी जमानत जब्त हो गई।

वर्ष 1999 (13वीं लोकसभा) में वर्तमान जिलाध्यक्ष डा. सैयद जमाल चुनाव लड़े। उन्हें 20026 (3.08 प्रतिशत) वोट मिला। उनकी भी जमानत जब्त हो गई। वर्ष 2004 (14वीं लोकसभा) में शरदेन्दु पांडेय ने चुनाव लड़ा, उन्हें 33477 वोट मिला और जमानत जब्त हो गई। वर्ष 2009 (15वीं लोकसभा) में लालचंद निषाद चुनाव लड़े और उन्हें 30262 वोट मिला। उनकी भी जमानत जब्त हो गई।

वर्ष 2014 (16वीं लोकसभा) में पार्टी ने अष्टभुजा प्रसाद त्रिपाठी को चुनाव में उतारा। उन्हें 45693 (4.39 प्रतिशत) वोट हासिल हुआ। उन्हें मिले वोट उनकी जमानत जब्त करवाने से नहीं बचा सके।

डॉ सुरहिता करीम

डॉ सुरहिता करीम

देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार डा. सुरहिता करीम जीत हासिल कर पायेंगी। क्या डा. सुरहिता पार्टी की जमानत जब्त होने से बचा पायेंगी। जबकि उनके सामने भाजपा व सपा से बेहद कड़ी टक्कर मिलने की संभावना है।

-अतीत के आईने में गोरखपुर संसदीय सीट

अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों और एक उपचुनाव में भाजपा ने 07 बार, कांग्रेस ने 06 बार, निर्दलीय ने 03 बार, हिंदू महासभा ने 01 बार और भारतीय लोकदल ने एक बार जीत दर्ज की है। सपा और बसपा इस सीट पर एक बार भी नहीं जींती।
1951-52 में गोरखपुर दक्षिण से सिंहासन सिंह कांग्रेस के सांसद चुने गए। यही सीट बाद में गोरखपुर लोकसभा सीट बनी। 1957 में गोरखपुर लोकसभा सीट से दो सांसद चुने गए। सिंहासन सिंह दूसरी बार सांसद बनें और दूसरी सीट कांग्रेस के महादेव प्रसाद ने जीती। 1962 के लोकसभा चुनाव में गोरखनाथ मंदिर ने चुनाव में दस्तक दी। गोरक्षापीठ के महंत दिग्विजय नाथ हिंदू महासभा के टिकट पर मैदान में उतरे। उन्होंने कांग्रेस के सिंहासन सिंह को कड़ी टक्कर दी लेकिन 3,260 वोटों से हार गए। सिंहासन सिंह लगातार तीसरी बार सांसद बने। 1967 में दिग्विजय नाथ निर्दलीय चुनाव लड़ें और कांग्रेस से जीत गए। 1969 में दिग्विजय नाथ का निधन हो गया जिसके बाद 1970 में उपचुनाव हुआ। दिग्विजय नाथ के उत्तराधिकारी और गोरक्षपीठ के महंत अवैद्यनाथ ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और सांसद बने।

1971 में फिर से कांग्रेस ने इस सीट पर वापसी की। कांग्रेस के नरसिंह नरायण पांडेय चुनाव जीते। वहीं निर्दलीय अवैद्यनाथ चुनाव हार गए। 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में भारतीय लोकदल के हरिकेश बहादुर चुनाव जीते। कांग्रेस के नरसिंह नरायण पांडेय चुनाव हार गए, वहीं अवैद्यनाथ लड़े ही नहीं। 1980 के चुनाव से पहले हरिकेश बहादुर कांग्रेस में चले गए। कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की और हरिकेश बहादुर कांग्रेस के टिकट पर दूसरी बार सांसद बने। 1984 के लोकसभा चुनाव से पहले हरिकेश लोकदल में चले गए। लेकिन इस बार पार्टी बदलने के बावजूद वे चुनाव नहीं जीत सके। कांग्रेस ने मदन पांडेय को चुनाव लड़ाया और मदन जीतकर सांसद बने।

1989 के चुनाव में राम मंदिर आंदोलन के दौरान गोरखनाथ मंदिर के मंहत अवैद्यनाथ फिर से चुनावी मैदान में उतर गए और हिंदू महसभा के टिकट पर अवैद्यनाथ दूसरी बार सांसद बने। 1991 की रामलहर में अवैद्यनाथ भाजपा में शामिल होकर चुनाव लड़े और फिर सांसद बने। 1996 में अवैद्यनाथ फिर भाजपा से लगातार तीसरी बार सांसद बने। 1998 में योगी आदित्यनाथ पहली बार सांसद बने। तब योगी सबसे कम उम्र के सासंद थे। 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार पांच बार योगी गोरखपुर से भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए। मार्च 2017 में यूपी के सीएम चुने जाने के बाद उन्होंने सांसद पद से त्याग पत्र दे दिया।

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