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गोरखपुर स्लाटर हाउस मामले में नगर आयुक्त 18 मई को हाईकोर्ट तलब

गोरखपुर, 16 मई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर शहर में न्यायलय के आदेश के बावजूद स्लाटर हॉउस नही स्थापित किये जाने के सम्बन्ध में दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए गोरखपुर नगर आयुक्त को 18 मई को अदालत में तालाब किया है।

आज सुनवाई में रिट याचिका संख्या 15665/2017 दिलशाद अहमद व 81 अन्य बनाम राज्य तथा नगर निगम आदि में याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता एजे अख्तर ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि 16 साल तक गोरखपुर शहर में न्यायालय के आदेश पर भी स्लाटर हाउस का निर्माण नहीं कराया गया। मुख्य न्यायमूर्ति ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की दलील पर गोरखपुर नगर आयुक्त को 18 मई को तलब किया और नगर निगम के अधिवक्ता से पूछा कि नगर निगम ने किस आदेश से मीट कारोबार को रोका तथा स्लाटर हाउस का निर्माण क्यों नहीं हुआ।
गोरखपुर सहित प्रदेश में बड़ा जानवर ( भैंस)  काटने व उसका मीट बेचने पर पूरी तरह पाबंदी लगी हुई हैं। शहर में बूचड़खाने बंद हैं। सभी कार्यवाही  बड़ा जानवर (भैंस) काटने वालों पर हुई हैं। सरकार के फरमान के बाद बड़े जानवर के मीट कारोबारियों के हालत खराब हो चुके हैं। मीट कारोबारियों की मानें तो उन्हें हर दिन लाखों का नुकसान हो रहा है। मीट कारोबारियों का कहना हैं कि पुश्तैनी धंधे पर रोक लगा कर प्रदेश सरकार हम लोगों के साथ नाइंसाफी कर रही हैं। स्लाटर हाउस न बनाकर नगर निगम अपने दायित्व के प्रति संवेदन हीनता दिखा रहा है।

मीट कारोबारियों का कहना हैं कि सन् 2001 में जब स्लाटर हाउस बंद किया गया, तब हम लोगों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उस समय हाई कोर्ट ने 3 सप्ताह के अंदर स्लाटर हाउस बनवाने के लिए नगर निगम को आदेश दिया था। नगर निगम ने वैकल्पिक व्यवस्था शहर से 27 किलोमीटर दूर भटहट बाजार में अस्थाई स्लाटर हाउस के रूप में दिया।

जिसके बाद उस समय के डीएम ने नगर आयुक्त के साथ बातचीत की लेकिन उसका कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका। निगम ने अपना अड़ियल रवैया अपनाते हुए कहा कि जब तक भटहट नहीं जाओगे तब तक तुम लोगों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।

वहीं उस समय के एसएसपी ने कहा कि आप लोग अपने दुकान में काटकर और साफ सफाई के साथ अपना धंधा कर सकते हैं। जब तक इस समस्या का हल न हो जाए। उसके बाद सन् 2002  से आज तक  लोगों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया गया, अब प्रदेश में नई सरकार ने बूचड़खानों पर रोक लगा दिया हैं। अगर सरकार को कार्यवाही करनी थीं तो वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। स्लाटर हाउस खोल कर वैध लाइसेंस उपलब्ध करवाना चाहिए।
बड़े का मीट बेचने वाले होटलों का ही कारोबार मंदा पड़ा है। इन्हीं सब परेशानियों के मद्देनजर  बड़े के मीट कारोबारियों ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल कर स्लाटर हाउस खोलने की मांग की हैं।