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जिक्र-ए-नबी’ से गुलजार हुई ‘महफिल-ए-मेराजुन्नबी’

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गोरखपुर, 24 अप्रैल। सोमवार को ‘शब-ए- मेराजुन्नबी’ की खुशिया मनायी गयी। शहर की मस्जिदों में शब-ए-मेराज शरीफ की महफिल सजायीं गयी। फर्ज नमाजों के साथ नफील नमाजों का ऐहतमाम किया गया। सलातुल तस्बीह की नमाज अदा की गयी। कुरआन की तिलावत  मस्जिदों व घरों में हुई । अगले दिन के नफ्ली रोजे के लिए सेहरी भी खायीं गयीं। कई जगहों पर अजीमुश्शान जलसा हुआ। पूरी रात इबादतें इलाही और जिक्र-ए-नबी  से गुलजार रही।

मेराज शरीफ के वाकिया को उलेमा ने विस्तृत तरीके से बयां किया। उलेमा ने कहा कि यह वहीं रात हैं जब नबी-ए-पाक दीदारे खुदावंदी से सरफराज हुए। जलसों में नारा-ए- तक्बीर और नारा-ए-रिसालत की सदा गूंजती रही। नबी-ए-पाक पर सलातो सलाम भी झूम कर पढ़ा गया। शायरों ने नबी की शान में बेहतरीन कलाम पेश किए।

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👉पांडेयहाता बाजार में ‘बज्मे आले मुस्तफा कमेटी’ के तत्वावधान में आयोजित ‘जश्ने मेराजुन्नबी’ जलसे में इस्लामिक धर्मगुरु मुफ्ती निजामुद्दीन नूरी ने कहा कि 27 रजब की रात नबी-ए-पाक को सातों आसमानों की सैर कराई गई। जन्नत और दोजख दिखाई गई। मस्जिदें अक्सा में नबी-ए-पाक ने पैगम्बरों व फरिश्तों की इमामत की। इस मुबारक रात में अहकामे खास नबी-ए-पाक पर नाजिल हुए और आप दीदारे खुदावंदी से सरफराज हुए। इसी रात नबी-ए-पाक को पांच वक्त की नमाजों का तोहफा मिला। नमाज मोमिन की मेराज है। मुसलमान अगर तरक्की चाहते हैं तो नमाज को कायम करें।  हमें चाहिए कि अल्लाह और रसूल की तालीमात पर मुकम्मल बेदारी के साथ अमल करें। मुसलमान सामाजिक कुरीतियों से दूर रहें।  बुराईयों के कारण एक मुसलमान पर ही नहीं बल्कि पूरी कौम पर खराब असर पड़ता है।

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इस्लामिक विद्वान मौलाना हाशिम कानपुरी ने कहा कि मुसलमान कुरान व हदीस की शिक्षा के मुताबिक जीवन गुजारें। तालीम पर मुसलमान तवज्जोह दे। तालीम के बगैर कोई भी कौम व इंसान तरक्की नहीं कर सकती है।  मौलाना ने कहा कि  बेटियों को बरकत वाला समझना चाहिए। अल्लाह बेटियों की किस्मत से धन सम्मान देता है। बेटियों की पैदाइश पर मातम करने की बजाय खुशी जाहिर करने की जरूरत है।

मौलाना कमरुद्दीन ने कहा कि इस दौर में इत्तेहाद व इत्तेफाक की काफी जरुरत हैं। एक बने नेक बनें। दुनिया में इंसान के लिए सबसे बड़ी नेमत जहां उसका दीन व ईमान है वहीं इंसान को मां की अहमियत को भी समझना चाहिए।

मशहूर शायर राही बस्तवी  ने नात पढ़ी

“दीन का चराग जल उठा।

कुफ्र पर जवाल आ गया।

आसमां से जब जमीन पर।

आमनां का लाल आ गया।

रात जाने मुख्तसर हुई।

या नबी तभी सहर हुई।

जब अजान देने के लिए।

आपका बेलाल आ गया।”

इसके बाद पढ़ा

“पूछेगें सभी हश्र में सरकार कहां हैं?

सरकार पुकारेंगे गुनाहगार कहां हैं।

परवाना-ए-बख्शिश लिए ढ़ूढेंगें फरिश्ते।

औलादे पयम्बर के वफादार कहां हैं।”

उन्होंने गीत पेश किया-

“महके-महके नबी का दयार महके

उनकी गलियों के गर्दों गुबार महके।

आका कहां हैं नहीं पूछते थे , खुशबू से आशिक उन्हें ढ़ूढ़ते थें। ऐसे महबूबे परवरदिगार महके।

जलसे का आगाज तिलावते कुरआन से किया गया। जलसे की अध्यक्षता हाजी जावेद अली निजामी ने व संचालन अकरम जलालपुरी ने किया। इस मौके पर महमूद अहमद उर्फ जुम्मन, कारी हिदायतुल्लाह, मौलाना मकसूद आलम, रिजवान अहमद, विजय पाठक, छाजू राम केडिया, संजीव उर्फ बब्बू जैन, अशफाक अहमद, सेराज अहमद, अली अहमद, नवेद आलम, रईस अनवर, मौलाना अली अहमद शाद बस्तवी, अलकमा शमीम, जमील अहमद, इंतेखाब अख्तर रिंकू, फिरोज अहमद, वसीम अहमद, शादाब अहमद, बब्लू, गुड्डू शुक्ला, राजेश, जुबैर अहमद, इल्ताफ हुसैन, नसीम सिद्दीकी, इस्माईल, रफी अहमद, मुतुर्जा हुसैन, मुहम्मद हफीज, मरगूबुल हसन, खुर्शीद अहमद, जमील अहमद, एहतेशाम, वसीम अहमद, नूरुद्दीन, नौशाद अहमद, शौकत अली इत्यादि रहे।

👉तहरीक दावत-ए-इस्लामी हिन्द की जानिब से मोहल्ला इस्माईलपुर काजी जी की मस्जिद के पास ‘जश्ने मेराजुन्नबी’ का जलसा हुआ। हाथों में इस्लामी झंडा व  सरों पर हरा अमामा पहने लोग आकर्षण का केंद्र रहे। मुख्य अतिथि इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती अजहार अशरफी अजहरी ने कहा कि को सुन्नत पर अमल करते हुए एकजुट होकर रहना चाहिए। मुसलमानों को एक दूसरे से लड़ना नहीं चाहिए। आपस में किसी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए।

अध्यक्षता करते हुए मुफ्ती अख्तर हुसैन  व वसीउल्लाह अत्तारी ने मेराज शरीफ के वाकिया पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि इंसान को चाहिए की नबी की सुन्नतों को अमली तौर पर जिंदगी में अपनायें। मुसलमानों को दहशतगर्दी, चुगली, अमानत में ख्यानत, जुल्म और ज्यादती से बचना चाहिए।

नात शरीफ आदिल अत्तारी ने पेश की

“अर्श पे ताजा छेड़छाड़ फर्श पे तुर्फा धूमधाम ।

कान जिधर लगाईये तेरी ही दास्तान हैं।

इक तेरे रुख की रौशनी चैन हैं दो जहान की ।

इंस का उंस उसी से हैं जान की वो ही जान हैं।

वो जो न थे तो कुछ न था वो जो न हों तो कुछ न हो।

जान हैं वह जहान की, जान है तो जहान है।”

संचालन अम्मार अत्तारी ने किया। इस दौरान  मोहम्मद आजम अत्तारी, मोहम्मद रमजान अत्तारी, नदीम कादरी, शम्से आलम, हमीदुल्लाह, हबीबुल्लाह, नासिर, शहाबुद्दीन सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

👉तिवारीपुर स्थित मस्जिद खादिम हुसैन में आयोजित जलसे को संबोधित करते हुए मौलाना अफजल बरकाती ने कहा कि अल्लाह और रसूल के जिक्र की यह महफिलें सभी महफिलों से बेहतर है। इसकी बरकत से अल्लाह अपने बन्दों की मगफिरत फरमा देता है। उन्होंने लोगों से नमाज की पाबन्दी के साथ ही सुन्नते रसूल के मुताबिक जिन्दगी गुजारने और नेकी व सच्चाई के रास्ते पर चलने की ताकीद की।

इस मौके पर ‘आला हजरत’ की नात पेश की गयी

“वो सरवरे किश्वरे रिसालत जो अर्श पर जलवा गर हुए थे।

नये निराले तरब के सामां अरब के मेहमान के लिए थे।

वहां फलक पर यहां जमीं में रची थी शादी मची थीं धूमे।

उधर से अनवार हंसते आते इधर से नफहात उठ रहे थे।

वही है अव्वल वही है आखिर वही है बातिन वही है जाहिर।

उसी के जलवे उसी से मिलने उसी से उसकी तरफ गए थे।

सनाए सरकार है वजीफा, कबूले सरकार है तमन्ना।

न शायरी की हवस न परवा-रवी थीं, क्या कैसे काफीये थे।”

जलसा समाप्ति पर सलातुल तस्बीह की नमाज अदा की गयी। सलातो सलाम पेश कर  खुसूसी दुआ मांगी गई। इस मौके पर मोहम्मद राजिक हुसैन, मोहम्मद वामिक हुसैन, मोहम्मद फराज आदि लोग मौजूद रहे।

चिंगी शहीद तुर्कमानपुर  स्थिति मदरसा रजा-ए-मुस्तफा में बच्चों के बीच मेराज शरीफ का वाकिया हाफिज मोहम्मद कलाम ने बयान किया। इस मौके पर मौलाना गुलाम दस्तगीर, मोहम्मद इसराईल, मोहम्मद जावेद, मोहम्मद फरहान सहित मदरसे के तमाम बच्चे मौजूद रहे।⁠⁠⁠⁠