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तब्दीली को कभी आंख बंद करके कुबूल नहीं करना चाहिए : अनवर जलालपुरी

( 15 नवंबर 2014 को  गोरखपुर न्यूज लाइन ने मशहूर शायर अनवर जलालपुरी का मुख्तसर साक्षात्कार साया किया था. अनवर जलालपुरी स्टार चेरिटबल ट्रस्ट गोरखपुर द्वारा आयोजित मुशायरे में शिरकत करने आये थे. उनकी याद में इस साक्षात्कार को दिया जा रहा है ) 
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अपनी आवाज़ के जादू व शायरी से मुशायरे की निज़ामत को अलग अंदाज से बयान करना श्रोताओं को दिलकश आवाज़ से बांधे रखना, उबने पर जोश वाली शायरी से जोश भर देना यह कमाल है अनवर जलालपुरी के अंदाजे बयां का। अनवर जलालपुरी के नाम से सभी वाकिफ है। 15 नवंबर  को स्टार चेरिटबल ट्रस्ट गोरखपुर के तत्वावधान में होने वाले मुशायरे में शिरकत करने आये अनवर जलालपुरी ने खास बताचीत में बताया कि मैं एक मुदर्रिस (शिक्षक) हूं और लेखन और शायरी का शौक मेरे तालीमी दौर से जुड़ा रहा है. नरेन्द्र देव इण्टर कालेज जलालपुर से इण्टर तक तालीम मुकम्मल की और यहीं से लेकचरर के ओहदे से रिटायर्ड होने के बाद अदबी खिदमत में जुट गया.

रिटायर्ड होने के बाद मुझे उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड का चेयरमैन नियुक्ति किया गया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान जम्हूरी मुल्क है और जम्हूरी मुल्क में तब्दीली होती रहती है लेकिन तब्दीली को कभी आंख बंद करके कुबूल नहीं करना चाहिए.

अपनी अदबी सफर की चर्चा करते उन्होंने बताया कि मेरी 16 किताबें साया हो चुकी हैं जिसमें रोशनाई का सफीर, अपनी धरती अपने लोग, गजलों में खारे पानियों का सिलसिला, खूशबु की रिश्तेदारी, नातिया शायरी में हर्फे अबज़द राहरों से रहनुमा तक, खुल्फा-ए-राशदीन, कुरआन पाक के 30वें पारे का तजुर्मा, श्रीमद् भगवद गीता का उर्दू शायरी में तर्जुमा, गीताजंली में उर्दू शायरी और उमर खैयाम की रूबाइयत।

उन्होंने बताया कि मेरे निज़ामत का आगाज 1968 से शुरू माना जाना चाहिए चूकि 1965 में मैं शिब्ली कालेज की मैग्जीन का एडिटर था। वहा से पढ़ाई पूरी कर 1966 में आगे की तालीम हासिल करने अलीगढ़ चला गया वहां से मैने अंग्रेजी में एमए किया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि तकरीरी महारत तालीम के ज़माने से मिली वहीं महारत निजामत में तब्दील हो गयी हालांकि उमर कुरैशी साहब और मालिक ज़ादा मंजूर साहब से बहुत कुछ सीखा।

About सैयद फरहान अहमद

सिटी रिपोर्टर , गोरखपुर

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