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रामगढ़ ताल और आस-पास के क्षेत्र में फेंके जा रहे हैं पालिथीन, खाद्य पदार्थों के पैकेट

ताल में खुलेआम विचरण कर रहे हैं मवेशी

महानगर पर्यावरण मंच और गोरखपुर एनवायरन्मेन्टल एक्शन ग्रुप के सदस्यों ने रामगढ ताल क्षेत्र का भ्रमण किया, ताल क्षेत्र में गंदगी पर जताया रोष 

गोरखपुर , 13 अगस्त। आज महानगर पर्यावरण मंच और गोरखपुर एनवायरन्मेन्टल एक्शन ग्रुप के सदस्यों ने रामगढ ताल क्षेत्र का भ्रमण किया और ताल और आस पास के क्षेत्र में पालिथीन, खाद्य पदार्थों के फेंके जाने पर रोष जताया।

सदस्यों ने भ्रमण के दौरान देखा कि ताल के किनारे खुले क्षेत्र में बड़ी मात्रा में खाली पानी के बोतल, पालीथिन की थैलियां, विभिन्न खाद्य पद्राथों के खाली प्लास्टिक पैकेट बिखरे पड़े हैं। ताल के किनारे खुले क्षेत्र में कूड़ा कुछ अधिक मात्रा में देखा गया। जिन स्थानों पर बैरिकेटिग की गयी है वहाॅ इसकी मात्रा कम दिखी यही नहीं इस ताल पर सैर सपाटा करने आने वाले युवकों द्वारा बोटिंग प्वाइन्ट पर भुट्टे एवं अन्य खाद्य पदार्थो के रैपर को ताल में सीधे फेंका जा रहा है। मवेशी ताल के भीतर विचरण करते हुए पाये गये।

सदस्यों ने कहा कि  यह एक अन्यन्त दुखद पहलू है कि काफी प्रयास के बाद जलकुम्भी आदि को ताल से हटा कर इसे साफ सुथरा बनाने में विभागों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। लेकिन यह क्रम बना रहा तो ताल की जैव विविधता और पारस्थितिक संतुलन में गहर प्रभाव होगा जिससे झील की प्राकृतिक सुन्दरता और इसकी गहराई में कमी आई है जो निरन्तर जारी रहने से और अधिक प्राभावित होगी।
वर्ष 2010 में रामगढ़ ताल को राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना में लिया गया था और करीब 200 करोड़ की लागत से ताल को साफ करने व सीवेज पम्पिंग स्टेशनद आदि बनाने का कार्य हुआ लेकिन इस योजना में भी रामगढ़ ताल और उसके वेटलैंड की अनदेखी हुई। आवश्यकता इस बात की है कि नागरिक इसके प्रति स्वयं जागरूक हो जिससे यह महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा बची रहे और किसी भी प्रकार अतिक्रमण न होने पाये। रामगढ़ ताल संरक्षण परियोजना, गोरखपुर महानगर वासियों के अथक प्रयास के बाद स्वीकृत हुई थी और महानगर के पर्यावरण व स्वस्थ्य के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

रामगढ़ ताल क्षेत्र में भ्रमण करने वालों पीके लाहिड़ी, प्रो एसएस वर्मा, डा0 मुमताज़ खान, जितेन्द्र द्विवेदी प्रमुख थे।

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