समाचार स्वास्थ्य

तीन वर्ष में गोरखपुर का एम्स बनाने का लक्ष्य

गोरखपुर में एम्स के लिए केंद्र और यूपी सरकार ने एमओयू साइन किया
लखनऊ , 14 जुलाई। गोरखपुर का एम्स तीन वर्ष में पूरी तरह से बनकर तैयार हो जायेगा हालांकि इसकी स्थायी ओपीडी शुरू हो जाएगी. एम्स के लिए गोरखपुर के गन्ना शोध संस्थान की महादेव झारखंडी स्थित 45.326 हेक्टेयर यानी 112.2 एकड़ भूमि 90 वर्ष की लीज पर केंद्र सरकार को दे दी गई है. एम्स बनने में 1750 करोड़ रुपये की लागत आएगी.

13 जुलाई को लखनऊ के शास्त्री भवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में केंद्र और राज्य सर्कार के बिच एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया. केंद्र सर्कार की ओर से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पीएमएसवाई डिविजन के संयुक्त सचिव सुनील शर्मा और उत्तर प्रदेश की ओर से चिकित्सा शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ अनीता भटनागर जैन ने हस्ताक्षर किया.

डॉ अनीता भटनागर जैन ने बताया कि एम्स तक बिजली पहुंचाने के उद्देश्य से स्वतंत्र फीडर की स्थापना के लिए मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट में नई मांग के जरिये 36 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं. केंद्र सरकार एम्स एक्ट के तहत निर्माण कराएगी और संचालन करेगी। इसके अलावा एम्स में शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक पदों के सृजन और भर्ती की कार्यवाही केंद्र सरकार करेगी। मेडिकल व नर्सिंग पाठ्यक्रमों का संचालन भी केंद्र सरकार ही करेगी। एम्स में प्रारंभिक गतिविधियों के लिए केंद्र सरकार ने एचएससीसीआइ को कार्यदायी संस्था नामित किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जुलाई 2016 को गोरखपुर में एम्स का शिलान्यास किया था.

 इस मौके पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन, चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ.केके गुप्ता, केजीएमयू के कुलपति डॉ.एमएलबी भट्ट, पीजीआइ निदेशक डॉ.राकेश कपूर, आरएमएल इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ.दीपक मालवीया सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे.

एम्स में होगा 750 बेड का अस्पताल
गोरखपुर के एम्स में 750 बेड होंगे। इसमें एक एकेडमिक ब्लॉक होगा और मरीजों के परिजनों के लिए रैन बसेरा भी बनेगा.  एक ऑडीटोरियम व गेस्ट हाउस का निर्माण होगा। 172 आवासों के साथ 120 छात्रों व 240 छात्राओं सहित कुल 360 विद्यार्थियों के लिए यूजी हॉस्टल, 599 विद्यार्थियों के लिए पीजी हॉस्टल व 432 नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल बनेगा. ओपीडी में तीन संकाय होंगे, जिनमें सर्जिकल व अन्य विशिष्टता, मेडिसिन व अन्य विशिष्टता तथा स्त्री एवं प्रसूति रोग सहित कुल 29 विभाग प्रस्तावित हैं.
सितंबर 2018 तक बन जाएगी ओपीडी
एमओयू के अनुसार गोरखपुर एम्स की स्थायी ओपीडी का निर्माण सितंबर 2018 तक पूरा होगा जबकि चिकित्सालय का निर्माण मार्च 2019 तक हो जाएगा. चिकित्सालय में दिसंबर 2019 तक 300 बेड, मार्च 2020 तक 500 बेड और 750 बेड जून 2020 तक उपलब्ध हो जाएंगे. ट्रामा सेंटर का काम मार्च 2020 तक पूरा हो जाएगा.

Leave a Comment