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त्रिशक्ति महासम्मेलन में ओबीसी जातियों की एकता का शंखनाद, पिछड़ों के लिए 52 फीसदी आरक्षण की मांग

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भाजपा-आरएसएस के खिलाए दिखाए तीखे तेवर, गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में ताकत दिखाने का आह्वान
गोरखपुर, 7 जनवरी। गोकुल अतिथि भवन में 5 जनवरी को आयोजित यादव-निषाद-सैंथवार-पटेल-राजभर सहित सभी ओबीसी जाति के त्रिशक्ति महासम्मेलन में ओबीसी एकता का शंखनाद करते हुए ओबीसी जातियों के लिए संविधान में संशोधन कर 52 फीसदी आरक्षण देने की मांग की गई। महासम्मेलन में भाजपा-आरएसएस पर ओबीसी एकता को बांटने का षडयंत्र करने और पिछड़ों का हक छीनने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया। महासम्मेलन में कई नेताओं ने गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा के खिलाफ संयुक्त उम्मीदवार उतारने की बात कही और कहा कि इस चुनाव में ओबीसी एकता का प्रदर्शन होगा। महासम्मेलन में अंधविश्वास, पाखंड के खिलाफ भी तीखे तेवर दिखाए गए।

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करीब पांच घंटे चले इस सम्मेलन में यादव, निषाद, सैंथवार, पटेल, राजभर, गुप्ता, कुर्मी सहित कई जाति संगठनों के नेता शामिल हुए। अध्यक्षता निषाद पार्टी के राष्टीय अध्यक्ष डा. संजय कुमार निषाद ने की। सपा के जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव भी महासम्मेलन में शामिल हुए।
त्रिशक्ति महासम्मेलन के प्रारम्भ में अयोजक एवं ओबीसी आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कालीशंकर ओबीसी ने 16 सूत्री मांग पत्र पढ़ा जिससे सर्वसम्मति से पास किया गया। इस मांग पत्र में ओबीसी समाज को प्रत्येक क्षेत्र में संख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व देने, संविधान में संशोधन कर सरकारी नौकरियों में 52 फीसदी आरक्षण देने, निजी नौकरियों व न्यायपालिका में आरक्षण के माध्यम से उचित प्रतिनिधित्व देने तथा मंडल कमीशन की सभी सिफारिशों को पूरी तौर पर लागू करने, वर्ष 2011 में कराए गए जातिगत गणना को सार्वजनिक करने, निषाद व अन्य अति पिछडत्री जातियों को अनुसूचित जाति/ जनजाति में शामिल करने, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, कमिश्नर, एसपी, डीआईजी आदि सभी प्रमुख पदों पर चक्रानुक्रम में आरक्षण लागू करने, ओबीसी समाज के लिए लोकसभा व विधानसभा की सीटें आरक्षित करने, ओबीसी आरक्षण में क्रीमीलेयर हटाने तथा महिला आरक्षण में ओबीसी महिलाओं को 52 फीसदी आरक्षण देने की मांग की गई है।

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महासम्मेलन में इन मांगों के लिए सड़क से लेकर संसद तक लोकतान्त्रिक व क्रान्तिकारी ढ़ग से आंदोलन चलाने की बात कही गई। श्री कालीशंकर ने कहा कि सभी राजनैतिक दल हमारी मांगों का समर्थन करें और उसे अपने एजेंडे में डालें। जो दल सत्ता में है वे हमारी मांगों को पूरा करें अन्यथा ओबीसी समाज उन्हें वोट नहीं देगा।
निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ संजय कुमार निषाद ने कहा कि ओबीसी की हर जाति का गौरवशाली इतिहास है। हमने आजादी की लड़ाई में खून बहाया जिसके कारण अंग्रेजों ने क्रिमिनल जाति बता कर हमें उजाड़ा, सताया। आजादी के बाद भी यह षडयंत्र चला। उन्होंने विभिन्न आयोगों की सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डाले जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि आरएसएस-भाजपा ने उत्तर प्रदेश में पिछड़ों और दलितों के बीच दुश्मनी डाली और झूठ के बल पर इसे प्रचारित किया। उन्होंने कहा कि पिछ़ड़ों का अल्पसंख्यकों से कोई झगड़ा नहीं है। हमारा हक अल्पसंख्यक नहीं 15 फीसदी अगड़े मार रहे हैं। उन्होंने मूल निवासी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दुश्मन से दुश्मन की तरह बर्ताव करना चाहिए। उन्होंने गोरखपुर लोकसभा उप चुनाव में ओबीसी लोगों को अपनी ताकत का एहसास कराने को कहा और ओबीसी समाज या उससे समर्थित दलों के किसी संयुक्त प्रत्याशी को जिताने का आह्वान किया।

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सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए डॉ दुर्गा प्रसाद यादव ने कहा कि अंग्रेजों के समय हमारा समाज शासक समाज (अंग्रेज), शोषक समाज (उच्च जाति) शोषित समाज (शुद्र) में बंटा था। हम तीनों के गुलाम थे। आज हम संवैधानिक रूप से आजाद हो गए पर  गुलामी की जिंदगी जी रहे हैं. इस गुलामी को खाद पानी हम ही दे रहे हैं। यदि धर्म के नाम पर चढ़ावा बंद कर दिया जाए तो हमारे शोषक कमजोर हो जाएंगे और हम मजबूत बनेंगे।
सेवा निवृत्ति अपर मुख्य अधिकारी जय प्रकाश मल्ल ने शिक्षा से वंचित ओबीसी युवाओं की मदद करने के लिए फण्ड जुटाने और संगठन बनाने का सुझाव दिया। किसानों की समस्याओं की तरफ ध्यान दिलाते हुए उन्होंने कहा कि हमारा समाज खेती कार्यों से जुड़ा है। इसलिए हमें कृषि उत्पादों के लाभकारी मूल्य के लिए भी संघर्ष करना चाहिए।

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विशिष्ट अतिथि रामानंद राजभर ने कहा कि हमारा ओबीसी समाज इस हिन्दुस्तान की मूल जाति है। देश की आजादी की लड़ाई में सबसे ज्यादा हमने योगदान किया लेकिन आज हम ही दर-दर भटकने को विवश हैं। उन्होंने सचिवालयों, विश्वविद्यालयों, न्यायालयों, मीडिया में ओबीसी समाज की नगण्य प्रतिनिधित्व पर चिंता व्यक्त की और कहा कि हमारी हालत ऐसी इसलिए हुई क्योंकि हमारे समाज के नेतााओं ने हमारे लिए संघर्ष नहीं किया. वे राजनीतिक दलों के गुलाम बन गए।

शिक्षक डॉ हितेश सिंह ने कहा कि ओबीसी एकता के लिए हमें कुछ समय तक अपनी दलीय और जातीय निष्ठा को अलग रखना होगा। उन्होंने कहा कि इस 16 सूत्रीय एजेंडों को विभिन्न पार्टियों के नेताओं के पास भेजा जाए और उनकी प्रतिक्रिया ली जाए जिससे उन पार्टियों की ओबीसी पक्षधरता के स्टैंड का पता चल सके।
राम आशीष विश्वकर्मा ने कुटीर उद्योगों के नष्ट कर शिल्पी जातियों को कमजोर करने का आरोप लगाया।

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अखिल भारतीय कुर्मी महासभा के प्रान्तीय अध्यक्ष रामअधार चौधरी ने कहा कि ओबीसी समाज ही अपनी शोषकों का पांडाल उठाए हुए है। हम ही उनके रचे धर्म और अंधविश्वास की चक्की को चला रहे हैं। हमें इससे मुक्त होना होगा। डाॅ धर्मराज राजभर ने डा. राम मनोहर लोहिया को उद्धत करते हुए कहा कि बिना संघर्ष के कुछ भी हासिल नहीं होता।
किसान सिंह सैंथवार ने कहा कि ओबीसी जातियों को आपस में भेदभाव समाप्त कर एक दूसरे को सम्मान देनेा पड़ेगा। गोस्वामी महासभा के सुरेश गिरि ने कहा कि ओबीसी समाज की ताकत से गोरखपुर सहित पूर्वांचल की राजनीति को बदल देने की लड़ाई लड़नी होगी। डा. रजनीश पटेल ने कहा कि आज हमारे आरक्षण और संविधान पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने ओबीसी एजेंडे को लागू न करने पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ सांसदों, विधायकों को घेरने का आह्वान किया।
संतकबीरनगर से आए गंगा सिंह सैंथवार ने कहा कि ओबीसी समाज गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में उम्मीदवार खड़ा करे और अपनी ताकत को दिखाते हुए जीत की शुरूआत करे। डा. राजेश यादव ने कहा कि हमें धर्म, पाखंड और अंधविश्वास के खिलाफ लड़ना होगा क्योंकि इसके जरिए हमें अंधेरे में रखा जाता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय, आरक्षण और जनसंख्या के हिसाब से भागीदारी हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है और इसे कोई नहीं छीन पाएगा। बस्ती से आए फलाहारी बाबा ने कहा कि जैसे छोटी छोटी नदियां मिलकर समुद्र बना देती हैं उसी तरह समस्त ओबीसी जातियों को एकजूट होकर समुद्र बन जाना चाहिए।

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सपा जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव ने ओबीसी समाज को ऊना, पूना, गुजरात के दलित आंदोलनों से सीख लेने की बात कही और अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने का आह्वान किया।
महासम्मेलन को मुख्य रूप से विरेन्द्र राजभर, प्रो0 रामकुबेर, चन्द्रशेखर यादव, ई0 प्रवीण कुमार निषाद, योगेन्द्र यादव, देवमणि निषाद, राघवेन्द्र यादव, इन्द्रजीत, प्रहलाद यादव, कृष्णभान सिंह, रजनीश पटेल, रामअवतार विश्वकर्मा, फलहारी बाबा, डाॅ0 ओमप्रकाश प्रजापति, रामेश चन्द्र निषाद, ई0 आर0 ए0 चैहान, सुरेश विद्यार्थी, रामनिवास, उमाशंकर यादव, अजय सिंह सैंथवार, महेन्द्र चैरसिया, डा0 एस0 एस0 पटेल, दयाशंकर राजभर, राजेन्द्र यादव, केदार नाथ निषाद, विवेक सिंह, सुजीत सिंह ने सम्मबोधित किया।

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