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धर्म स्थलों पर लाउडस्पीकर अनुमति : इंतेजामियां कमेटी चुस्त, प्रशासन सुस्त

गोरखपुर, 11 जनवरी. धार्मिक स्थलों पर वर्षों से चल रहे लाउडस्पीकर को लेकर जहां इंतेजामियां कमेटी व समाज के अन्य लोग जागरुक नजर आ रहे हैं वहीं प्रशासनिक अमला खामोश है यानी इंतजामियां कमेटी चुस्त प्रशासनिक अमला सुस्त है।

लाउडस्पीकर अनुमति प्रोफार्मा कहां मिलेगा, कहां जमा होगा, प्रोफार्मा के साथ क्या-क्या कागजात लगेंगे आदि ऐसे सवालात लोगों के सामने आ रहे हैं जिनका जवाब लोगों को नहीं पता है। प्रचार-प्रसार की कमी से लोग डीएम आफिस व सबंधित थानों के चक्कर लगा रहे हैं।

[box type=”shadow” ] अनुमति के सम्बंध में आधी-अधूरी जानकारी की वजह से धर्मस्थलों की कमेटियों को दिक्कतें हो रही है। अनुमति के लिए वक्त भी कम दिया गया है। लोकल स्तर पर प्रशासन द्वारा प्रोफार्मा हासिल करने व जमा करने सबंधी कोई गाइडलाइन नहीं दी गई। समाचार पत्रों में भी पूरी जानकारी नहीं दी गई। थाना व जिला प्रशासन से जानकारी हासिल करनी चाही तो कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। तब जाकर इस क्षेत्र के पार्षद प्रतिनिधि के जरिए प्रोफार्मा हासिल कर उसको भरकर आधार कार्ड की कापी लगाकर उन्हें ही जमा करने के लिए दिया। वह बुधवार को एसडीएम प्रशासन के यहां प्रोफार्मा जमा करने गए।

मौलाना जहांगीर अजीजी इमाम मस्जिद सुभानिया तकिया कवलदह [/box]

जनपद में मौजूद अधिकतर धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर सालों से प्रयोग किए जा रहे हैं। इन लाउडस्पीकर के लिए पहले अनुमति लेने की कोई व्यवस्था व्यवस्थित रूप से संचालित नहीं थी जिस वजह से लाउडस्पीकर का प्रयोग लोग अपनी सहूलियत के हिसाब से कर रहे थे। जब ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद धार्मिक स्थलों पर बिना इजाजत चल रहे लाउड स्पीकर को लेकर सरकार गंभीर हुई है तो धार्मिक स्थलों के इंतेजामियां  ने भी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की अनुमति लेने के लिए तत्परता दिखाई।

[box type=”shadow” ]हम हुकूमत के फैसले की कद्र करते हैं। अनुमति संबंधी जानकारी के अभाव में लोगों को दिक्कतें उठानी पड़ रही है। मैंने स्वयं सोशल मीडिया से प्रोफार्मा डाउनलोड कर अपने क्षेत्र की एक दर्जन मस्जिदों में ले जाकर बांटा है ताकि कमेटी के लोग समय से प्रोफार्मा भर कर दुश्वारी से बचें। हमारी प्रशासन से मांग हैं कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर अनुमति के लिए कोई अलग से काउंटर खोला जाएं जहां प्रोफार्मा मिल सके और जमा हो सके साथ ही अनुमति लेने की तारीख बढ़ाई जाए। गांव, देहात में मौजूद धर्म स्थलों के लिए भी अलग से सहूलियत मुहैया करवाया जाए।

शमशाद अली अंसारी उर्फ अली भाई हुमायूंपुर उत्तरी [/box]

धार्मिक स्थलों के इंतेजामियां की जागरूकता का आलम यह है कि लोग सबंधित थानों व जिला प्रशासन से अनुमति लेने के लिए चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं की गयी है। धार्मिक स्थलों के जिम्मेदारान व समाज के अन्य लोगों ने बाकायदा सोशल मीडिया पर जारी सर्कुलर व अनुमति प्रोफार्मा (प्रारूप) को डाउनलोड कर प्रिंट आउट निकलवा कर भरना भी शुरू कर दिया हैं लेकिन उन्हें यह नहीं पता की यह अनुमति  प्रोफार्मा जमा कहां होंगे।

[box type=”shadow” ] मस्जिद बहादुर शाह जफ़र मस्जिद में लगे हार्न के लिए अनुमति लेनी थीं। सोशल मीडिया से प्रोफार्मा डाउनलोड कर भरा। जमा करने के लिए कई लोगों से पूछा तो कोई सही जानकारी नहीं मिली। बुधवार को तिवापीपुर थाने से फोन आया की प्रोफार्मा तीन प्रतियों में थाने पर जमा कर दें। थाना पर जब गया तो कई और लोग भी प्रोफार्मा जमा करने आए थे। मैंने तीन प्रति जमा की। दो थाने में जमा हो गई एक रिसीवींग के तौर पर मिल गई। प्रोफार्मा के साथ आधार कार्ड की प्रति जमा की। सही जानकारी के अभाव में लोगों को काफी दिक्कत आ रही है। जिला प्रशासन को इस ओर खास तवज्जो देनी की जरुरत हैं।यह धर्म से जुड़ा मामला है। सभी धर्म वालों को सहूलियत सर्वोपरि रखी जाए और अनुमति की तिथि और बढ़ाई जाए।

मुख्तार अहमद बहादुर शाह जफ़र कालोनी बहरामपुर 

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शासन द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से निर्देश है कि जिन धर्म स्थलों के पास अनुमति नहीं है, उनके प्रबंधकों को 15 जनवरी से पहले अनुमति प्राप्त करने के लिए आवेदन का प्रोफार्मा उपलब्ध कराए जाए। प्रमुख सचिव ने जारी पत्र में निर्देश दिया है कि जो आवेदन आएं, उनका पांच कार्य दिवस में निस्तारण भी किया जाए। यदि इस बीच किसी ने अनुमति नहीं हासिल की है, तो उनके लाउडस्पीकर 20 जनवरी तक हर हाल में उतरवा लिए जाएं। ज्यादातर लोगों के पास यह प्रोफार्मा  सोशल मीडिया के द्वारा पहुंच रहा है। कई जागरुक लोग इन प्रोफार्मा की फोटों कापी कराकर स्वयं ही धार्मिक स्थलों पर ले जाकर वितरित कर रहे हैं। यह लोगों की अच्छी पहल है इसमें प्रशासन की मदद दरकार है। इतने कम वक्त में यह सारा कार्य कैसे होगा यह विचारणीय प्रश्न है।

[box type=”shadow” ]मुसलमान जितना अपने मजहब के लिए वफादार है उतना ही अपने मुल्क के लिए भी वफादार है। मुसलमान मुल्क की भलाई को अपनी भलाई और मुल्क के नुकसान को अपना नुकसान ख्याल करता है। ध्वनि प्रदूषण से अगर फिजा खराब होती है तो उस फिजा को दुरूस्त करने की जिम्मेदारी हम सबकी है। शासन का कदम दुरूस्त है लेकिन सही जानकारी के अभाव में सभी धर्म स्थलों के इंतेजामियां बेचैन है। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि इस सबंध में कोई ठोस व्यवस्था करे ताकि सभी धार्मिक स्थल बिना किसी भेदभाव व आसानी के साथ लाउडस्पीकर की अनुमति प्राप्त कर लें। प्रोफार्मा देने व जमा करने के लिए अलग काउंटर बन जाए तो बेहतर है साथ ही अनुमति लेने का वक्त भी बढ़ाया जाए। इस बाबत प्रचार-प्रसार की भी जरूरत है ताकि लोगों तक सही जानकारी पहुंच सके। गांव-देहात के लोगों की सुविधा का भी ख्याल रखा जाए।

-मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी मुफ्ती-ए-गोरखपुर

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प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजकर जानकारी मांगी है कि उनके जिले में कितने लाउड स्पीकर बिना इजाजत चल रहे हैैं। बुधवार 10 जनवरी तक यह रिपोर्ट तैयार करनी थी। इस पत्र में अनुमति लेने के लिए धार्मिक स्थलों को मौका दिए जाने का प्राविधान भी है। बाकायदा इसके लिए प्रोफार्मा बना हुआ है। प्रमुख सचिव गृह ने निर्देश दिया था कि ऐसे धर्म स्थल या सार्वजनिक स्थल जहां नियमित लाउडस्पीकर बजाए जाते हों, उनका चिह्नीकरण राजस्व व पुलिस अधिकारियों की टीम बनाकर निर्धारित तिथि तक कर लिया जाए।