जनपद

नबी-ए-पाक पूरी दुनिया के लिए रहमत व रहनुमा – मुफ्ती अख्तर

महफिल-ए-सीरतुन्नबी’ दर्स का पहला दिन
गोरखपुर, 21 नवम्बर। नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमां पर 12 दिवसीय ‘महफिल-ए-सीरतुन्नबी’ दर्स का आगाज मंगलवार को बाद नमाज जोहर शुरु हुआ।
दर्स में मुफ्ती अख्तर हुसैन (मुफ्ती-ए-गेरखपुर) ने  मोहसिन-ए-इंसानियत आखिरी नबी-ए-पाक हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहौ अलैहि वसल्लम की जिंदगी व सीरत पर रोशनी डालते हुए कहा कि जब-जब दुनिया में बुराइयां बढ़ती है तब-तब खुदा इंसानों की रहनुमाई के लिए नबी व रसूल भेजता है।
नबी-ए-पाक ने ऐसे जमाने में जन्म लियाजब अरब के हालात बेहद खराब थे। बच्चियों को जिंदा दफन कर दिया जाता था। विधवाओं से बुरा सुलूक होता था। छोटी-छोटी बात पर तलवारें खींच जाती, खून की नदियां बह जाती थीं। अरब कबीलों में बटां था। इंसानियत शर्मसार हो रही थी। ऐसे समय में इंसानों की रहनुमाई के लिए इस्लामी तारीख 12 रबीउल अव्वल शरीफ को अरब के मक्का शहर में नबी-ए-पाक का जन्म हुआ। पिता का नाम हजरत अब्दुल्लाह रजियल्लाहु अन्हु व मां का नाम हजरत आमीना रजियल्लाहु अन्हा था। दादा हजरत अब्दुल मुत्तलिब रजियल्लाहु अन्हु थे। बचपन में पिता का सांया उठ गया। आपके दादा ने परवरिश की। आपने हमेशा अपने किरदार, गुफ्तार से इंसान को शिक्षा दी की सभी इंसान समान है एक खुदा के बंदे हैं। नबी-ए-पाक पूरी दुनिया के लिए रहमत व रहनुमा बनकर तशरीफ लाए।
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मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि नबी-ए-पाक ने जब  सच्ची तालीमात आम करनी शुरु कि तो उस दौर के मक्का में रहने वालों को काफी बुरा लगा। आपको तरह-तरह की तकलीफें दी गयी। जिसका आपने हंस कर सामना किया। आपको मक्का से हिजरत करने पर मजबूर किया गया। आपने मदीना शरीफ में ठहराव पसंद किया। इतनी परेशानियों के बाद आपने मिशन को नहीं छोड़ा और खुदा के पैगाम को पूरी दुनिया में पहुंचाया। आपने मजलूमों, गुलामों, औरतों, बेसहारा, यतीमों को उनका हक दिलाया। आज भी आपकी तालीमात पर अमल करके दीन व दुनिया की कामयाबी पायी जा सकती है। आपने हर मजहब के मानने वालों के साथ रहमदिली का सुलूक किया।
इस मौके पर दरगाह सदर इकरार अहमद, कारी महबूब आलम, शाह आलम, शहादत हुसैन, रमजान, कुतबुद्दीन, सैयद कुमैल, अब्दुल अजीज, सैफ अली, मो. अजीम, कैश रजा, मो. इब्राहीम, मो. अशरफ, तारिक रजा, ओबैदुल्लाह, मो. अशरफ वारसी, रिजवान सहित तमीम लोग मौजूद रहे।

 

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