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पुलिस कर्मी निडर और निष्पक्ष कार्य करें तो उन पर कोई दबाव नहीं डाल सकता-विवेक दुबे

बिलकिस बानो केस की जांच करने वाले रिटायर आईपीएस अफसर विवेक दुबे का पीपुल्स फोरम ने किया सम्मान

‘ राज्य, लोकतंत्र और मानवाधिकार ’ पर गोष्ठी में वक्ताओं ने बहुसंख्यकवाद के खतरे से चेताया
गोरखपुर, 14 जुलाई। गुजरात के बिलकिस बानो गैंग रेप केस की जांच कर अभियुक्तों को कानून के शिकंजे में लाने वाले आईपीएस अफसर विवेक दुुबे का पीपुल्स फोरम ने गुरूवार को सम्मान किया। नसीराबाद स्थित एक मैरेज हाल में आयोजित इस कार्यक्रम में श्री विवेक दुबे ने अपने 35 वर्ष की पुलिस सेवा के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों को निडर होकर निष्पक्षता से कार्य करना चाहिए। उन्हें राजनीतिक लोगों के संरक्षण की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि उन्हें अपनी ड्यूटी के लिए संविधान ने संरक्षण दिया हुआ है। हम पुलिस वाले अच्छे जगह की तैनाती के लिए सिफारिश करते हैं और अपने उपर दबाव लेते हैं। यदि आप कथित रूप से ’ अच्छे जगह ’ पर तैनाती के लिए सिफारिश नहीं करते व करवाते हैं तो आप पर भी कोई गलत काम के लिए दबाव नहीं बना सकता।

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श्री विवेक दुबे अब रिटायर हो गए हैं। वह गोरखपुर के ही निवासी हैं और उन्हें गोरखपुर विश्वविद्यालय से ही फिजिक्स में 1976 में पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। आन्ध्र प्रदेश कैडर के आईपीएस आफिसर विवेक दुवे 2003-2007 तक सीबीआई में ज्वाइंट डायरेक्टर रहे और इस दौरान उन्होंने कई चर्चित मामलों-मधुमिता शुक्ल मर्डर केस, एनएचआई के इंजीनियर सत्येन्द्र दुबे मर्डर केस, खैरलांजी दलित हत्याकांड और बिलकिस बानो गैंग रेप व सामूहिक हत्या के मामले की जांच की।

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पीपुल्स फोरम ने उनके सम्मान के साथ-साथ इस मौके पर ‘ राज्य, लोकतंत्र और मानवाधिकार ’ के प्रश्न विषय पर संगोष्ठी का भी आयोजन किया था जिसमंे श्री दुबे के अलावा गोरखपुर विशविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर चन्द्रभूषण अंकुर, ला डिपार्टमेंट के प्रो अहमद नसीम और पीयूसीएल के जिला संयोजक फतेहबहादुर सिंह ने अपने विचार प्रकट किए।
श्री विवेक दुबे ने अपने सम्बोधन में बिलकिस बानो केस के अनुभव की विस्तार से चर्चा की और कहा कि उनकी टीम ने बिना किसी दबाव में आए शानदार कार्य किया। इस केस के अभियुक्त और केस को डैमेज करने वाले पुलिस कर्मी व दो डाक्टर आज सजा पाएं हैं तो इसमे बिलकिस बानो व उसके पति की हिम्मत और संघर्ष सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि किसी भी आपराधिक घटना में सबसे पहले पुलिस ही जज की भूमिका में होती है। यदि उसने निष्पक्षता से कार्य किया और कार्यवाही की तो कानून व्यवस्था की कभी समस्या खड़ी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जब मेरा चयन भारतीय पुलिस सेवा में हुआ तो मेरी मां ने कहा कि यह नौकरी मत करो क्योंकि पुलिस डिर्पाटमेंट बहुत गंदा है। मैने उनसे कहा कि मै पुलिस जरूर ज्वाइन करूंगा ताकि देख सकूं कि यह कितना गंदा है। श्री दुबे ने कहा कि आज वह अपने अनुभव से कह सकते हैं कि कोई भी विभाग गंदा नहीं होता, उसे हम और आप गंदा या अच्छा बनाते हैं। पुलिस सेवा में तमाम अफसरों व कर्मियों ने शानदार काम किया है और अब भी कर रहे हैं लेकिन यह भी सही है कि इस डिपार्टमेंट में ’ गंदे लोग ’ भी हैं।

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कार्यक्रम के शुभारम्भ में पीपुल्स फोरम के फाउंडर मेम्बर डा. अजीज अहमद ने मुख्य अतिथि विवेक दुबे का परिचय प्रस्तुत किया और कहा कि उनके शानदार काम पर हम लोगों को फख्र है।
गोष्ठी में बोलते हुए प्रो अहमद नसीम ने कहा कि यदि हमारा लोकतंत्र सबसे कमजोर को प्रोटेक्ट नहीं कर सकता तो उस पर सवालिया निशान लगेगा। यदि समाज के शक्तिशाली लोग अपने को सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं तो इसका अर्थ है कि हमारी स्वतंत्रता व सुरक्षा खतरे में पड़ने वाली है। उन्होंने बहुसंख्यकवाद के बढ़ते खतरे से चेताते हुए कहा कि हमे अपनी स्वतंत्रता किसी के चरणों में अर्पित नहीं करनी चाहिए चाहे हम उसे कितना ही महान क्यों न समझते हो। प्रो चन्द्रभूषण अंकुर ने मानवाधिकार के प्रश्नों पर मीडिया की रूख की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा क्योंकि मीडिया पर कार्पोरेट का वर्चस्व कायम हो गया है। उन्होंने दलितों और अल्पसंख्यकों पर हमले की बढ़ती घटनाओं का जिक्र किया और कहा कि ऐसा नहीं है कि मानवाधिकार के मामले मंे हमारा अतीत बहुत अच्छा है लेकिन हैरत यह है कि हमारा लोकतंत्र तो पौढ़ होता जा रहा है लेकिन नागरिकों के अधिकारों पर हमले की स्थिति और खराब होती जा रही है। पीयूसीलए के जिला संयोजक फतेहबहादुर सिंह ने असहमति का अधिकार लोकतंत्र की आधारशिला है लेकिन आज इसी पर सबसे ज्यादा हमले हो रहे हैं। असहमति को देशद्रोह करार दिया जा रहा है। बहुमत की सरकार मनमानी की सरकार बन गई है।
कार्यक्रम का संचालन पत्रकार एवं एक्टिविस्ट मनोज कुमार सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन आसिम राउफ ने किया।

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