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प्रेम पर बंदिश का प्रतिकार करता नाटक ‘ मुरलिया बाज रही चहुँओर ‘

अलख कला समूह ने 12 दिवसीय नाट्य प्रशिक्षण शिविर के समापन पर किया नाटक का मंचन

गोरखपुर, 13 जून। अलख कला समूह ने आज शाम प्रेमचंद पार्क में नाटक ‘ मुरलिया बाज रही चहुँओर ‘ का मंचन किया। इस नाटक में प्रेम पर समाज के ठेकेदारों की बंदिश का प्रतिकार दिखाया गया है।

IMG_20170613_175253यह नाटक 12 दिवसीय नाट्य प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर मंचित किया गया। अलख कला समूह ने जन नाटककार राजाराम चौधरी के निर्देशन और संयोजन में 2 जून से 13 जून तक इस नाट्य प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया था।IMG_20170613_171814

जन नाटककार राजाराम चौधरी द्वारा लिखित और निर्देशित इस  नाटक का कथानक राधा -कृष्ण की प्रेम कथा से लेकर रोमियो जूलियट, लैला मजनू का जिक्र करते हुए वर्तमान परिवेश में एंटी रोमियो स्कवायड पर तीखे कटाक्ष करता है और स्त्री-पुरुष की नैसर्गिक आज़ादी का समर्थन करता है। नाटक कहता है कि चोरी, लूट, हत्या , बलात्कार को रोकने के लिए सत्त्ता कोई ठोस प्रयास नहीं करती लेकिन स्त्री-पुरुष की आज़ादी और प्रेम पर हजार बंदिशे लगाती है।

नाटक में जूलियट की भूमिका में अनन्या, रोमियो की भूमिका में उत्सव पाल ने जीवंत अभिनय किया। आशुतोष पाल, सुमिरनजीत मौर्य, सूरज गोंड, सुष्मिता मौर्य, निखिल पाल, नीरज गोंड, दीपाली गोंड, कुसुम, गंगाशरण शुक्ल व बैजनाथ ने अपनी अपनी भूमिकाओं से न्याय किया। नाटक की समाप्ति के बाद नाट्य प्रशिक्षण शिविर के सभी प्रतिभागियों को वरिष्ठ कथाकार मदन मोहन ने प्रमाण पत्र दिया। कार्यक्रम का संचालन अलख कला समूह के संयुक्त सचिव बेचन सिंह पटेल ने किया।

नाटक के शुरू होने के पहले प्रदीप कुमार और राजाराम चौधरी ने दो जनगीत प्रस्तुत किये।

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