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बच्चों से पढ़ाई सीख भाजपा विधायक दे रहे बारहवीं की परीक्षा

हरियाणा सरकार की नई शिक्षा नीति ने विधायकों को फिर से पढ़ाई की याद दिला दी है। नई शिक्षा नीति के अनुसार पंचायत व म्युनिसिपल चुनावों में शामिल होने के लिए सरकार ने शिक्षण योग्यता निश्चित की है। इसका परिणाम यह हुआ कि 19 साल पहले पढ़ाई को अलविदा बोल चुके भाजपा विधायक को अपने बच्चों से ट्यूशन ले परीक्षा देना पड़ रहा। भाजपा विधायक कुलवंत राम बाजीगर इन दिनों काफी नर्वस चल रहे हैं इसके पीछे कारण चुनाव नहीं बल्कि उनकी बारहवीं की परीक्षा है।

उनकी बारहवीं की परीक्षा की तैयारी के लिए पढ़ाई में बच्चे उनकी मदद कर रहे हैं। उन्होंने 19 साल पहले 1997 में दसवीं की परीक्षा दी थी। इसके बाद अब हरियाणा ओपन स्कूलिंग से 12वीं कर रहे हैं। सबसे अहम और दिलचस्प बात यह है कि विधायक ने एग्जाम की तैयारी अपने ही बेटे से ट्यूशन लेकर की है। बाजीगर दिनों अपनी बारहवीं की परीक्षा लगभग सभी पेपर दे चुके हैं।  4 पेपर निपट चुके हैं, पांचवां और आखिरी पेपर 21 को है।

पेपर फिजिकल एजूकेशन का है। आसान ही है। इसलिए चिंता मुक्त हुए विधायक फिर से अपनी पुरानी राजनीतिक रूटीन पर लौट आएंगे।उम्र के इस पड़ाव पर आकर बाजीगर के दिल में पढऩे का ख्याल कैसे आया तो उन्होंने कहा कि पढऩे लिखने की कोई उम्र नहीं होती। दरअसल अनपढ़ आदमी की कहीं कोई कद्र नहीं है। राजनीति में तो बिल्कुल नहीं। पहले कभी होती रही होगी। आज तो अनपढ़ को सियासत में कोई भाव नहीं देता। फिर रोज नई-नई योजनाएं। नई-नई बातें। खुद की समझ में आएंगी तभी तो लोगों को बता पाएंगे।

मजे की बात यह है कि बाजीगर के बड़े बेटे साहिब सिंह ने भी इसी साल सीबीएसई की बारहवीं की परीक्षा दी है। छोटे बेटे ने दसवीं के पेपर दिए हैं। विधायक बाजीगर बताते हैं कि सरकार बनते ही विधायकों को लैपटाप दिए गए थे।  मुझे भी मिला था पर चलाना नहीं आता था। सीखना शुरू किया तो कुछ ही दिनों में उंगलियां की बोर्ड की अभ्यस्त हो गईं। फेसबुक चलाना आ गया। इंटरनेट इस्तेमाल करना आ गया। फिर सोचा कि जब इस उम्र में कंप्यूटर चलाना आ सकता है तो आगे की पढ़ाई क्यों नहीं हो सकती। कुलवंत बाजीगर बताते हैं कि इसी प्रेरणा के चलते ओपन स्कूल से प्लस टू के फार्म भर दिए।

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