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बाढ में घिरे सैकडों गांव, राहत बचाव में ढीले पडे प्रशासन के हाथ

 राशन पानी का प्रबंध न होने से भूख से बिलबिलाये लोग
पुनीत मिश्र/रवि प्रताप सिंह

महराजगंज, 17 अगस्त. नेपाल की पहाडियों पर हो रही लगातार बारिश के चलते उफनाई नदी नालों से जिले में बाढ का कहर लोगों की जिन्दगियों पर भारी पड रहा है।जिले के लगभग प्रमुख मार्गों पर आवागमन ठप है। गांव के गांव पानी में घिरे है, लोग बंधो और ऊंचे स्थानों पर शरण हुये है। जलनिकासी की समस्या से जुझते शहर और नगर की स्थिति भी नरकीय हो गई है।मदद  के नाम पर शासन प्रशासन के हाथ अभी भी बाढ पीढितों से काफी दूर है।

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एक दशक बाद जनपद में बाढ ने इतने व्यापक पैमाने पर बाढ़ आई है. इसके पूर्व 2007 में डोमराजर्दी बांध टूटने पर दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।इसके बाद यू तो जिला हर साल बाढ से प्रभावित तो हुआ लेकिन तबाही का यह मंजर दशकों की यादों का ताजा कर रहा है।नारायणी, रोहिन, चंदन,झरही, बघेला, महाव, घोंघी व छोटी गंडक आदि नदियों के जलस्तर में इस बार जिस तरह का उतार चढाव बना हुआ है उसे लेकर लोग खासे हैरान परेशान है।

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बाढ की मार से सबसे ज्यादा निचलौल ब्लाक प्रभावित है यहां दो दर्जन से अधिक गांव मैरुण्ड होने के कगार पर खडे है।सीमावर्ती गांव गेडहवां, कनमिसवां, औरहवां, कलनहीं खुर्द, चंदा, गुलभार, बलुआ टोला, बोदना, मैरी, गडौरा, बकुलडीहा, किशुनपुर, भरवलिया, लक्ष्मीपुर खुर्द, चटियां, नउआबारी, माधवनगर तुर्कहिया, करदह, लालपुर, शितलापुर, रामनगर आदि गांव बाढ से घिरे है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिये सांसद पंकज चौधरी की पहल पर ब्लाक प्रमुख द्वारा चार नाव की व्यवस्था कराई गयी है जिसकी मदद से बुधवार को सैकडों लोगों को गांव से बाहर सुरक्षित स्थानों पर लाया गया।

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फरेन्दा क्षेत्र के मुजहना, जलालगढ़, भैसहिया, रामनगर, छितौ‌निया, त्रिमुहानी, भगवानपुर, पंड़ितपुुर, हरैया, बरातगाढ़ा, रखौना, रामप्रीत टोला,छितौनिया, सदर ब्लाक के चेहरी, महलगंज, रसुलपुर आदि गांव बाढ की चपेट में है।जहां राहत बचाव कार्य को लेकर प्रशासन की समुचित व्यवस्था अबभी मुहैया नही कराई जा सकी है।

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