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‘ बाद-ए-मगरिब ‘ के लिए अशफाक व फिरदौसिया को मिला बिहार उर्दू अकादमी का पुरस्कार

गोरखपुर, 22 जनवरी। बिहार उर्दू अकादमी ने वर्ष 2016 के लिए जिन पुस्तकों पर पुरस्कार देने की घोषणा की है उनमें बड़े काजीपुर के अशफाक अहमद उमर व रुदलपुर की फिरदौसिया खातून की पुस्तक ‘बाद-ए-मगरिब’ शामिल है। इस पुस्तक को तीसरा पुरस्कार मिला है। पुरस्कार के तौर पर दस हजार रुपया व प्रशस्ति पत्र मिलेगा। पुरस्कार की घोषणा पिछले मंगलवार को की गई है।

अशफाक अहमद उमर की यह दूसरी पुस्तक है। यह पुस्तक ‘शबनम गोरखपुरी के मंजूम तर्जुमा’ पर आधारित है। इसमें पश्चिमी कवियों शेले, किट्स, कोलरीज आदि के कलाम काे मंजूम तर्जुमा कर के उर्दू  मे शामिल किया गया है। इस पुस्तक को लिखने में अशफाक का सहयोग शबनम गोरखपुरी की बेटी फिरदौसिया खातून ने दिया है।

Ashfak

अशफाक अहमद उमर

अशफाक की पहले भी कई पुस्तकें पुरस्कृत हो चुकी है। जिनमें ‘कुलियत-ए-शबनम गोरखपुरी’, ‘ज़ज़्बात-ए-मायल’ प्रमुख है। अशफाक के पिता शरीफुल हक सीडीओ आफिस में कार्यरत है।  अशफाक ने डीडीयू गोरखपुर  से परास्नातक व जेएनयू से पीएचडी किया। इस समय अशफाक ‘ड्रामा अनारकली’, ‘फिल्म मुगल-ए-आजम’ और ‘शारेहीन-ए-इकबाल’ के साथ शरह निगारी के उसूल और फन पर काम कर रहे हैं। बहुत जल्द इनकी अन्य पुस्तकें भी मंजर-ए-आम पर अायेंगी।
युवा साहित्यकारों की इस कामयाबी पर गोरखपुर विश्वविद्यालय के डा. रजिउर्रहमान, जेएनयू के प्रो. ख्वाजा एकराम और प्रो. शाहिद हुसैन ने बधाई दी है। अशफाक ने अपनी कामयाबी  अपने माता-पिता, गुरू और दोस्तों को समर्पित की है।

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