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भाकपा माले का बीजेपी पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर चुनाव प्रभावित करने का आरोप, चुनाव आयोग में शिकायत की

लखनऊ , 18 फरवरी। भाकपा (माले) के राज्य सचिव रामजी राय ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखित शिकायत भेज कर कहा कि बीजेपी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के जरिये उत्तर प्रदेश में चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उसके नेता चुनाव प्रचार के दौरान एक समुदाय को लक्ष्य कर मुद्दे उठा रहे हैं और धार्मिक भड़काऊ भाषण देकर आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं।
माले नेता ने शिकायत में कही गई बातों की जानकारी देते हुए कहा कि बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में ’एंटी रोमियो स्क्वाड’ बनाने की बात कही है। यद्यपि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इसे शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की हिफाज़त के लिए बताते हैं, लेकिन उनके एक राष्ट्रीय को-कन्वेनर सुनील भारला खुलेआम इसे मुस्लिम मर्दों (लड़कों) के लव जेहाद से हिन्दू औरतों (लड़कियों) को बचाने का स्क्वाड बताते हुए मुजफ्फरनगर के दंगे का हवाला देते फिर रहे हैं।
शिकायत में माले राज्य सचिव ने कहा है कि बीजेपी के स्टार प्रचारक सांसद योगी
आदित्यनाथ भी अपने चुनाव प्रचार में लव जेहाद के खतरों को बताते हुए ’एंटी-रोमियो स्क्वाड ’ की यही व्याख्या कर रहे हैं बल्कि और भी आगे जाते हुए योगी ने पश्चिम उत्तर प्रदेश में, जो पहले से ही सांप्रदायिक तनाव से ग्रस्त है, अपनी हाल की चुनाव सभाओं में सांप्रदायिक जहर उगल कर माहौल को और भी ध्रुवीकृत करने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने राम मंदिर, कैराना से पलायन के अफवाह, बूचड़खानों की बंदी आदि मुद्दों को भी हवा दी। इसी तरह, दूसरे चरण के चुनाव प्रचार के अंतिम दिन, शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद में अपने चुनावी संबोधन में उन्होंने झूठ का सहारा लेकर सांप्रदायिक आग भड़काने की साजिश की।
माले नेता ने शिकायत में कहा है कि केंद्र सरकार के मंत्री संजीव बालियान ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान (12 फरवरी 2017 को) बिजनौर में एक मामले को लेकर धरना देने की धमकी देकर अल्पसंख्यकों के खिलाफ माहौल को ध्रुवीकृत करने की कार्रवाई की। शिकायत में आगे कहा गया है कि बीजेपी और उससे जुड़े संगठन के नेताओं ने हाल में मुजफ्फरनगर दंगे की सीडी चलवाने से लेकर दादरी के अखलाक हत्याकांड को गौरवान्वित करने की कोशिश की ताकि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करा कर राजनीतिक लाभ लिया जा सके।
माले राज्य सचिव ने शिकायत में कहा है कि बीजेपी द्वारा अल्पसंख्यकों को निशाने पर लेने और उनके खिलाफ माहौल बनाने की उसकी कोशिश लगातार जारी है। उत्तर प्रदेश के डीजीपी को हटाने की उसकी मांग भी उसकी इसी सुविचारित रणनीति का हिस्सा लगता है। बीजेपी और उसके नेता मौजूदा चुनाव में जिस तरह से धार्मिक आधार पर गोलबंदी करने की रणनीति अपना कर चुनाव प्रचार कर रहे हैं, वह न सिर्फ सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का बल्कि चुनावी आचार संहिता का भी उल्लंघन है।
माले राज्य सचिव ने आयोग से बीजेपी के सांप्रदायिक प्रचार के खिलाफ कार्रवाई
करने की अपील की है, ताकि अमन, सांप्रदायिक सौहार्द और इंसाफ को कोई क्षति न पहुंचे।

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