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बी गैप व नेपाल बांध पर बचाव कार्य में गड़बड़ी के बावजूद एई और जेई पर कार्रवाई नहीं

महराजगंज, 13 जुलाई. नेपाल की पहाडियों से निकलने वाली नारायणी (गंडक) नदी पर बाढ सुरक्षा के लिहाज से बनाये गये अन्तर्राष्ट्रीय तटबंध बी गैप व नेपाल बांध पर वर्ष २०१६ में हुये बाढ बचाव कार्यों में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया है।बंधों पर नायलान क्रेट और बोरी की आपूर्ति में स्टोर का चार्ज लेकर कुछ अवर अभियन्ताओं ने गबन का लम्बा गेम खेला है।शासन स्तर से शुरु हुई जांच में पहले ही पूर्व ऐक्सीएन, एससी और चीफ गंडक पर गांज तो गिर चुकि है लेकिन अपनी राजनीति पकड के बदौलत जेई और एई अब भी उसी स्थान पर जमे हुये हैं.

बी गैप और नेपाल बांध पर बीते सालों में परकोपाईन लाचिंग की परियोजना थी जिसमे करीब 20 लाख बोरियां और करीब 1 लाख नायलान क्रेट की बेस बना कर परकोपाईन लांच किया जाना था। लेकिन बगैर बोरी और नायलान क्रेट के ही जैसे तैसे आधा अधुरा परकोपाईन लांच कर दिया। नेपाली ग्रामीणो ने इस पर आपत्ति जताई और मामला नेपाल सरकार तक पहुंचा और सरकार के हस्ताक्षेप के बाद सरकार की तन्द्रा टूटी और मामले की जांच शुरु हुई।

नारायणी नदी (फाइल फोटो)

नारायणी नदी (फाइल फोटो)

शुरुआती जांच मे ही गबन की स्थिति साफ होने पर विभाग ने एक्सीएन से लगायत चीफ इंजीनियर तक कार्यवाही की गांज तो गिर गयी लेकिन गबन के केंद्र में रहे एई और जेई अब भी अपने पद पर बने हुये है।

सूत्र बताते है कि 119.71 लाख के गबन की पटकथा लिखने वाले तीन चर्चित जेई सपा सरकार में अपनी उंची रसूख और राजनीतिक पहुंच की बदौलत अतिरिक्त स्टोर का चार्ज लेकर कम करते रहे. जिन दो स्टोरों से बोरी और नायलान क्रेट की निकासी हुई थी उन दोनों का चार्ज उन्ही चर्चित अवर अभियंताओं के पास था जिसमें से हाल के दिनो में एक जेई का स्थानांतरण गैर जनपद हो गया है जबकि एक अब भी स्टोर का चार्ज संभाल रहे है।

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पिछले दस वर्ष से विभाग मे जेई रहने के बाद यही पर प्रमोशन लेकर एई बने अभियंता हमेशा चर्चा मे रहे है. इन पर भी नायलान क्रेट व बोरी के मामले में जांच चल रही है। एक चर्चित जेई जो पिछले नौ सालो से सिचाई खंड दो में तैनात रहते हुये  वर्षों से नेपाल बाध के ठोकर संख्या तीन चार व पांच पर तीन-पांच करते आ रहे।इन अभियंताओं पर आरोपों के बाद भी विभागीय अफसरों की मेहरबानी का राज नहीं खुल पा रहा है।
इस सबंध में एक्सीएन धर्मेन्द्र कुमार का कहना है कि स्थानांतरण ऊपर से होता है. यदि  अगर अभियंता लम्बे समय से एक ही स्थान पर जमे हुये है तो यह नियम विरुद्ध है।

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