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महराजगंज में एनटीसी की जमीन पर एम्स बनाने का सुझाव देकर पंकज चौधरी ने नया विवाद खड़ा किया

गोरखपुर, 29 अप्रैला। महराजगंज के सांसद पंकज चौधरी ने गोरखपुर में जमीन न मिलने पर महराजगंज में एनटीसी की जमीन पर एम्स बनाने की मांग कर एक नया विवाद छेड़ दिया है।
आज लोकसभा में इस संवध में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दिए गए लिखित जवाब पर बोलते हुए पंकल चौधरी ने कहा कि गोरखपुर में एम्स का बनना सबसे उपयुक्त है क्योंकि पूर्वांचल के साथ-साथ नेपाल और बिहार के मरीज भी यहां आसानी से आ सकेंगे लेकिन यदि गोरखपुर में भूमि मिलने में दिक्कत होती है तो महराजगंज में एनटीसी की 634 एकड़ भूमि खाली पड़ी है जिसमें एम्स का निर्माण कराया जाए।
श्री चौधरी ने यह मांग कर एम्स के मुद्दे पर नया विवाद खड़ा कर दिया है। गोरखपुर में एम्स के लिए केन्द्रीय टीम ने खुटहन की भूमि पंसद की थी। इस भूमि को फोर लेन से जोड़े जाने की शर्ता केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यूपी सरकार के समक्ष रखी जिस पर वह तैयार हो गई। इसी बीच यह बात सामने आई कि पूूर्व जमींदार परिवार द्वारा खुटहन की जमीन को अपना बताते हुए कोर्ट में दावा किया गया है। जिला स्तर पर उनके दावे को खारिज करने के बाद वह हाईकोर्ट चले गए जहां इस पर फैसला आना है। जिला प्रशासन को विश्वास है कि हाईकोर्ट का फैसला वन विभाग के पक्ष में ही आएगा। फैसला आते ही खुटहन की भूमि पर फोर लेन से जोड़ने का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसी बीच खुटहन की भूमि पर दावा करने वालों ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भी एक पत्र भेज कर गुजारिश कर दी है कि विवादित भूमि पर एम्स का निर्माण न कराया जाए।
कुछ लोग एम्स को धुरियापार में स्थापित करने की मांग उठा रहे हैं हालांकि वहां भूमि कम होने तथा वहां पर एम्स बनाने से धुरियापार चीनी मिल के चलने की संभावना को पूरी तरह समाप्त हो जाने का तर्क देते हुए गोरखपुर हेल्थ फोरम जैसे संगठन सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच महराजगंज के भाजपा सांसद द्वारा महराजगंज में एम्स की स्थापना की मांग को उठा कर एक नया विवाद खड़ा कर दिया गया है। उनके द्वारा यह मांग किए जाने से यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर खुटहन की भूमि पर एम्स बनाने पर एतराज क्यों है ? यदि भूमि के स्वामित्व को लेकर सवाल उठा है और यह मामला हाईकोर्ट में है तो फैसले के आने तक इंतजार करने के बजाय नई-नई जगहें क्यों सुझाई जा रही हैं ? एम्स के जल्द शिलान्यास की खबरों के बीच यह महराजगंज का प्रस्ताव क्या किसी नई राजनीति का संकेत है ?

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