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एएमयू व जामिया का अल्पसंख्यक दर्जा बरकरार रखने की मांग को लेकर डीएम कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन

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मुसलामनों के तालीमी भविष्य को अंधकारमय करने की साजिश : अब्दुल्लाह
गोरखपुर, 1 जून। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी व जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक दर्जा बरकरार रखने की मांग को लेकर इमाम चौक मुतवल्ली एक्शन कमेटी ने 31 मई को जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।
इस मौके पर अब्दुल्लाह ने कहा कि वर्तमान समय की मोदी सरकार सबका साथ सबका विकास करने का वायदा करती है लेकिन अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि उसने अप्रैल 2016 में यूटर्न लेते हुए दोनां संस्थानों का अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा खत्म करने की कोशिश कर रही है जो मुसलमानां के तालीमी मुस्तकबिल को अंधकार में ले जाने की साजिश है।
खैरूल बशर ने कहा कि मदरसतुल उलूम-मुसलमानाने हिंद जो हिन्दुस्तान के मुसलमानां और सर सैयद के ख्वाब की ताबारी है। मुसलमानों के खून पसीने से इस यूनिवर्सिटी की तामीर हुई है। अल्पसंख्यकों के तालीमी मयार को उरूज देने के मकसद से यह वजूद में आया। एएमयू एक्ट 1920 के जरिए इसे पूर्ण रूप से यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त हुआ। भारतीय संसद अधिनियम द्वारा गठित आयोग ने जामिया मिलिया इस्लामियां यूनिवर्सिटी को फरवरी माह 2011 में अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त हुआ। मोदी सरकार अच्छी तरह जानती है कि किसी कौम की तरक्की को रोकना हो तो उसे तालीम से दूर कर दिया जाये तो मुस्लिम समाज पिछड़ जायेगा। केंद्र सरकार बाखूबी यह जानती है इसलिए ऐसा कदम उठाने का प्रयास कर रही है।
मोहम्मद आजम ने कहा कि एक तरफ केंद्र कुरआन के साथ लैपटाप का शिगूफा  छेड़ा गया और दूसरी तरफ एएमयू व जामिया जैसे इदारों का अल्पसंख्यक दर्जा खत्म कर मुसलमानों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बाधा उत्पन्न की जा रही है।
इस मौके पर हाजी फरजंद, हाजी तहव्वर हुसैन, आदिल अमीन, राशिद हुसैन मोहम्मद आमिर, फिरोज अहमद राईन सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।