राज्य

म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के संहार के खिलाफ प्रदर्शन

-कट्टरपंथी बौद्ध भिक्षु ‘अशीन विराथु’ का पुतला फूंका गया

-आंग सान सू ची से वापस लिया जाए नोबेल पुरस्कार

-भारत में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को देश से न निकालने की अपील
-पैगम्बर मोहम्मद साहब के बारे में टिपण्णी करने वाले पूर्व रा अधिकारी की गिरफ्तारी की मांग
गोरखपुर, 12 सितम्बर। म्यांमार (बर्मा) में रोहिंग्या मुसलमानों के नस्लीय जनसंहार व पूर्व रॉ अधिकारी आरएसएन सिंह द्वारा पैगम्बर मोहम्मद साहब व हजरत आयशा रजि. के बारे में अपमानजनक बातें कहे जाने के विरोध में अखिल भारतीय अल्पसंख्यक महासभा उप्र ने मंगलवार को नगर निगम व टाउनहाल गांधी प्रतिमा के समक्ष सभा की। टाउनहाल गांधी प्रतिमा के नीचे  कट्टरपंथी बौद्ध भिक्षु ‘अशीन विराथु’ का पुतला फूंका गया। इसके बाद भारत के राष्ट्रपति व संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) के महासचिव को संबोधित ज्ञापन एडीएम प्रशासन पंकज श्रीवास्तव को सौंपा गया।
इस दौरान रोहिंग्या मुसलमानों का नस्लीय जनसंहार रोकने,  रोहिंग्या मुसलमानों की जान, माल, इज्जतों-आबरु की हिफाजत व हर तरह की मदद पहुंचाने,  कट्टरपंथी बौद्ध भिक्षु ‘‘अशीन विराथु’’ को आतंकवादी घोषित करने, आंग सान सू ची से नोबेल पुरस्कार वापस लेने, रोहिंग्या मुसलमान शर्णार्थियों को भारत से न निकालने व रॉ के पूर्व अधिकारी आरएसएन सिंह को गिरफ्तार किए जाने, भारतीय मीडिया पर जनभावना को ठेस पहुंचाने वाले डिबेट्स व अन्य कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग की गयी।
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इस मौके पर महासभा के अध्यक्ष जावेद सिमनानी ने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों का कत्लेआम हो रहा हैं। बच्चे, बूढ़े, नौजवान, महिलाओं को मारा व जलाया जा रहा हैं। रोहिंग्या मुसलमानों को जो यातनाएं दी जा रही हैं उसे देख व सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए परन्तु संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) की ओर से अब तक कोई मदद नहीें की गई और न ही म्यांमार (बर्मा) सरकार पर कोई दबाव बनाया गया और न ही अन्तर्राष्ट्रीय फ़ौज भेजकर निहत्थे रोहिंग्या मुसलमानों का क़त्ल-ए-आम रोका गया, यह बहुत अफसोसनाक है।
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 यूएनओ द्वारा अभी तक बर्मा के फ़ौजियों पर कोई कारवाई नहीं की गई। लगातार क़त्ल-ए-आम जारी है इसके पीछे वहां की सरकार, फ़ौज व एक कट्टरपंथी बौद्ध भिक्षु ‘‘अशीन विराथु’’ है। बौद्ध धर्म के विपरीत शिक्षा दे कर वह बौद्ध धर्म को भी बदनाम कर रहा है और कत्ल, लूट, डकैती, रेप आगजनी जैसा गंदा काम भी करवा रहा है । उन्होंने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों का नस्लीय जनसंहार ‘‘अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद’’  है। यह जनसंहार म्यांमार की नोबेल पुरस्कार प्राप्त नेशन स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची की सरपरस्ती में हो रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत के पड़ोसी मुल्क म्यांमार (बर्मा) के रखाइन राज्य में रोहिंग्या मुसलमानों की नस्लीय जनसंहार किया जा रहा है।अफसोस है कि भारत सरकार की ओर से अब तक रोहिंग्या मुसलमानों की कोई मदद नहीं की गई और न ही बर्मा सरकार पर कोई दबाव बनाया गया। रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिए सभी मुल्कों को आगे आना चाहिए।

 इस दौरान मोहम्मद आजम, एहसान जुल्फेकार, फरुख जमाल, अशफाक मेकरानी, आफताब निजामी, इसरार, सैयद शहनवाज, मोहम्मद फैज, कारी शाह आलम, इरफानुल्लाह मुगल,  शौऐब खान एडवोकेट, तबरेज खान, सैयद फरहान अहमद, नदीम कादरी, नौशाद अंसारी, मोहम्मद आजम, डा. शाहिद रानू, फिरोज अख्तर, इबरार अत्तारी, मोईन बशर चिश्ती, लड्डू, जाफर अली जिप्पू, राजिक खान, सगीर अहमद, लड्डन खान, ख्वाजा जियाउद्दीन, मोहम्मद कैश अंसारी, आदिल अमीन आदि मौजूद रहे।

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