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योगी सरकार सांप्रदायिक और सामंती-दीपंकर भट्टाचार्य

योगी सरकार के खिलाफ लखनऊ में भाकपा माले का महाधरना

लखनऊ, 15 जून। योगी आदित्यनाथ का उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनना अप्रत्याशित व दुर्भाग्यपूर्ण है। जिस व्यक्ति के खिलाफ दर्जनों आपराधिक मुकदमे दर्ज हों और जिसे जेल के सलाखों के पीछे होना चाहिए, उसे भाजपा ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठा दिया। देश और प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि इन मुकदमों में योगी के ऊपर क्या कार्रवाई होगी। ये मुकदमे उनके खिलाफ चलें या न चलें, इनकी फाइलों पर योगी खुद तय करते हैं। यह हास्यास्पद है।
यह बात भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने आज यहां लक्ष्मण मेला मैदान में पार्टी द्वारा आयोजित महा धरने को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश पर नोटबंदी थोपी और योगी सरकार ने शुरुआत मीटबंदी से की। मीट व्यवसाय से जुड़े लाखों लोगों का रोजगार छीन गया। आरएसएस के गुंडे खुलेआम गुंडागर्दी कर रहे हैं। सहारनपुर में दलितों पर सामंती जुल्म ढाये गये। लखनऊ में विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को आपराधिक मुकदमे लगाकर जेल में डाल दिया गया।

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माले महासचिव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने इंतजार नहीं किया और योगी सरकार के खिलाफ वह सड़कों पर उतरने लगी है। सहारनपुर के दलितों ने दिल्ली के जंतर-मंतर तक जाकर धरना दिया। आइसा व लखनऊ विवि के छात्र लोकतंत्र का झंडा बुलंद कर रहे हैं। पूरे देश के किसान सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। मंदसौर में किसानों की हत्या की गई। आज हम इन्हीं प्रश्नों पर यहां धरना दे रहे हैं। हम सभी को इन संघर्षशील लोगों के साथ खड़े होने की जरुरत है। योगी की सरकार जितनी सांप्रदायिक है, उतनी ही सामंती है।
भट्टाचार्य ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार जीएसटी लागू कर रही है और एक देश एक कर नीति की बात कर रही है। यदि एक कर नीति गरीबों पर थोपी जा रही है, तो किसानों के लिए एक कर्ज नीति क्यों नहीं हो सकती। यदि उत्तर प्रदेश में किसान कर्जमाफी हो सकती है, तो यह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान समेत देश भर के किसानों के लिए क्यों नहीं हो सकती।

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माले नेता ने कहा कि अडानी के ऊपर 72 हजार करोड़ रु0 का कर्ज है। विजय माल्या नौ हजार करोड़ का कर्ज न चुकाकर लंदन में आराम फरमा रहा है। लेकिन कर्जदार किसान के लिए सिर्फ फांसी का फंदा बचा है। किसान इस बात को लेकर लड़ रहे हैं कि बैंकों के साथ-साथ महाजनी कर्जे भी माफ होने चाहिए और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू होनी चाहिए। यह न्यायोचित लड़ाई है।
उन्होंने कहा कि मोदी ने चुनाव से पहले तमाम वादे किये, पर जीतने के के बाद उन्हें लागू नहीं किया। अपने हक की मांग करने वाले किसानों, नौजवानों को मोदी राज में देशद्रोही करार दिया जा रहा है। किसानों के आंदोलन पर गोली चलायी गई। छात्रों-नौजवानों के आंदोलन का दमन किया गया। भाजपा-आरएसएस को लग रहा है कि अभी नहीं तो कभी नहीं। इसलिए वे सब कुछ आरएसएस के रास्ते चलाना चाहते हैं। वे गांघी को भी हड़पना चाहते हैं। देश के तमाम महापुरुषों की छवि को, इतिहास को विकृत करना चाहते हैं। लेकिन संघ-भाजपा को समझ लेना होगा कि देश के साथ मनमानी करने का उन्हें कोई लाइसेंस नहीं मिला है। यह कुछ समय का ठेका जैसा है और ठेके पर नौकरी की तरह ही समाप्त कर दी जायेगी।

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माले नेता ने कहा कि बसपा अपनी धार खो चुकी है। सहारनपुर के दलितों को अपनी लड़ाई आज खुद लड़नी पड़ रही है। आरएसएस-भाजपा समाज को बांटने का काम कर रही है, लेकिन हमें जोड़ने का काम करना है।  महासचिव ने कहा कि चुनावों में पारदर्शिता होनी चाहिए और यह लड़ाई भी वामपंथ को लड़नी होगी।
धरने को माले राज्य सचिव सुधाकर यादव, केंद्रीय समिति सदस्य कृष्णा अधिकारी, किसान महासभा के प्रदेश सचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा, ऐपवा उपाध्यक्ष ताहिरा हसन, आइसा राज्य सचिव सुनील मौर्य, खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के प्रदेश अध्यक्ष श्रीराम चौधरी, पार्टी राज्य कमेटी की सदस्य जीरा भारती और अर्जुनलाल ने संबोधित किया। अध्यक्षता पोलित ब्यूरो सदस्य रामजी राय और संचालन राज्य स्थायी समिति सदस्य राजेश साहनी ने किया।

इस मौके पर राष्ट्रपति को संबोधित छह सूत्री मांग पत्र  मौके पर आये मजिस्ट्रेट को सौंपा गया। मांग पत्र में  सहारनपुर के शब्बीरपुर मामले में चंद्रशेखर समेत गिरफ्तार सभी दलितों को रिहा करने , सामंती हमलावरों को जेल भेजने,घटना की न्यायिक जांच कराने और प्रशासन व पुलिस के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी को काला झंडा दिखाने वाले जिला जेल में बंद छात्र-छात्राओं को बिना शर्त अविलंब रिहा करने , उन पर लगे मुकदमे और लखनऊ विश्वविद्यालय से निलंबन की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से वापस लेने , धरना-प्रदर्शन करने के अधिकार पर अघोषित रोक हटाने सहित मंदसौर में  किसानों पर पुलिस फायरिंग,  मीटबंदी, ख़राब कानून-व्यवस्था, महिलाओं पर हिंसा-बलात्कार आदि पर मांग राखी गई है.

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