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राजस्व निरीक्षक, लेखपाल व कोतवाली पुलिस को मस्जिद की चहारदीवारी बनाने से रोका गया

गोरखपुर, 11 अक्टूबर। कोतवाली थाना क्षेत्र के दीवान बाजार मुहल्ले में मस्जिद की चहारदीवारी बनाने को लेकर बुधवार को विवाद हो गया। मस्जिद के कब्जाधारक व मुतवल्ली सैयद तहव्वर हुसैन राजस्व निरीक्षक, लेखपाल व कोतवाली पुलिस को लेकर मस्जिद की चहारदीवारी कराने हेतु मस्जिद स्थल पर पहुंचे थे। इस बीच कुछ लोगों ने आपत्ति जता बखेड़ा खड़ा कर दिया। बखेड़ा करने वालों ने कार्य नहीं होने दिया। थक हार कर कोतवाली पुलिस, राजस्व निरीक्षक व लेखपाल को वापस लौटना पड़ा।

 इस विवादित मामलें में हाईकोर्ट ने मस्जिद के हक में तारीखी फैसला दे दिया है। इसके बावजूद हाईकोर्ट के फैसले पर अभी तक अमल नहीं हो सका है। मुतवल्ली सैयद तहव्वर हुसैन ने विज्ञप्ति जारी कर भाजपा कार्यकर्ताओं को इसके लिए जिम्मेदार बताया और इस कृत्य की निंदा । उन्होंने कहा कि भाजपा न्यायालय के आदेश का अपमान कर रही है। न्याय का गला घोंटा जा रहा है। ऐसी स्थिति में 37 साल न्याय मिलने के बाद भी भाजपा के शासन में न्याय की हत्या कर दी गयी।

सैयद तहव्वर हुसैन ने बताया कि वक्फ नम्बर 137 दीवान बाजार मस्जिद की भूमि सन् 1981 में धारा 145 में जब्त हो गई थी जिसका 37 साल मुकदमा लड़ने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट से लेकर हाईकोर्ट तक मस्जिद के पक्ष में निर्णय होते गये। सन् 2008 में हाईकोर्ट के आदेश से पुलिस की सुपुर्दगी से मुक्त कर मुझे  कब्जा दे दिया गया। जिस पर तमाम कोशिशों, लिखा पढ़ी के बाद मुख्यमंत्री से लेकर तहसील दिवस व समाधान दिवस द्वारा थाना कोतवाली को पत्र दिया था और इसी सबंध में उप्र शासन द्वारा भी समाधान की कार्यवाही करने हेतु थाना कोतवाली को निर्देशित किया गया था। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा भी 28 सितंबर 2017 को वक्फ मंत्रालय को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु पत्र भेजा  गया।
मुतवल्ली सैयद तहव्वर हुसैन ने बताया कि इस मस्जिद को पुरानी मस्जिद दीवान बाजार के नाम से जाना जाता है। जिसका आराजी नं. 201, 202 है। जबकि पुराना आराजी नं. 141, 140 है। सन् 1980 में वक्फ बोर्ड ने इस मस्जिद के तौर पर वक्फ नं. 137 एलाॅट करते हुए इस को मुतवल्ली भी नियुक्त किया।
वतन के बटवांरे के बाद मस्जिद की देखभाल करने वाला कोई नहीं रहा तो ये खंडहर की शक्ल अख्तियार करती चली गयी और दो लोगों ने इस पर कब्जा करने की कोशिश की। लेकिन जब मुसलमानों को इस मस्जिद के बारे में मालूम हआ और मस्जिद की पुनः तामीर करने की कोशिश शुरू हुई। जैसे ही इस की सफाई का काम शुरू हुआ तो कुछ लोगों ने इसे देवी स्थान बनाकर यहां मूर्ति रखने का ऐलान कर दिया। इस को लेकर दोनों पक्षकारो के दरमियान जमकर बहस व विवाद हुआ। इस बात की सूचना कोतवाली और सिटी मजिस्ट्रेट को दी गयी। सिटी मजिस्ट्रेट ने मामले की संजीदगी से लेते हुए मौके पर पुलिस फोर्स तैनात कर दी। जिसकी वजह से इस जगह पर मूर्ति रखने का मंसूबा कामयाब नहीं हो पाया।
वक्फ बोर्ड में रजिस्ट्रेशन के एक साल बाद जीडीए से एक नक्शा मंजूर कराने की कार्यवाही शुरू हुई और 1981 में इसमें कामयाबी भी मिल गयी, लेकिन  जब जगह को साफ सुथरा किया जाने लगा तो विरोधी पक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया. इसके बाद फिरकावाराना झगडे़ को बुनियाद बनाकर पुलिस ने इस जगह को कानूनी प्रावधान 145 के तहत जब्त कर लिया। मस्जिद के पक्षकार ने इसके खिलाफ मुकदमा किया। सन् 1986 में इस का फैसला मस्जिद के पक्षकार के हक में आया। जैसे ही यहां कब्जा लेने की कोशिश की गयी तो विरोधी पक्षकार ने एक बार फिर हंगामा शुरू कर दिया और एक बार फिर पुलिस ने इस जगह कोे अपने कब्जें में ले लिया।

इस दौरान विरोधी पक्षकार ने जिला जज के यहां से स्टे ले लिया। सन् 1987 में पक्षकार मस्जिद ने जब यहां से अपील जीत कर कब्जा लेने की कोशिश की तो पुलिस ने कानून व शंति व्यवस्था बनाये रखने के नाम पर इसे अपने कब्जे में ले लिया। इस दौरान विरोधी पक्षकार हाईकोर्ट चला गया। जहां बरसों तक मुकदमा चलने के बाद हाईकोर्ट से भी मस्जिद पक्षकार के हक में ही फैसला किया।
मुतवल्ली सैयद तहव्वर हुसैन ने बताया कि हाईकोर्ट से केस जीतने के बाद जगह को हैंडओवर करने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट और कोतवाली को अदालती फैसले की कापी दी गयी लेकिन उन्होंने इस बाबत कोई कार्यवायी नहीं की। इसके बाद हम सिटी मजिस्ट्रेट के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए। सैयद तहव्वर हुसैन के मुताबिक अदालत की सख्ती के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने कोतवाली पुलिस को अदालत के फैसले के मुताबिक कार्यवायी करने का निर्देश जारी किया। जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षकारों की मौजूदगी में इसका कब्जा दिलाया। उन्होंने बताया कि इस जगह को रिकार्ड में खंडहर दर्ज कर दिय गया था तो इसका दुरूस्त कराने के लिए एसडीएम के यहां 33/39 के तहत दुरूस्तगी का मुकदमा किया गया। जहां से मस्जिद का इंतेखाब दर्ज करके नं. 202 मस्जिद और नं. 201 मस्जिद सहन का फैसला हुआ।
उन्होंने बताया कि मस्जिद की खतौनी मिल गयी है और सारे दस्तावेज के साथ एसएसपी के यहां मस्जिद तामीर के लिए तहफ्फुज और कानून व शांति व्यवस्था बरकरार रखने की दरख्वास्त की गयी लेकिन दोबारा दरख्वास्त करने के बावजूद इस सिलसिले में प्रशासन की ओर से जब कोई कदम नहीं उठाया गया तो मजबूर होकर जिलाधिकारी, एसएसपी, नगर निगम और सिटी मजिस्ट्रेट को पार्टी बनाकर हाईकोर्ट में एक रिट दाखिल की गयी।

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