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राष्ट्रीय सेक्युलर मंच ने धार दंगे की रिपोर्ट जारी की

भोपाल, 28 अक्टूबर। राष्ट्रीय सेक्यूलर मंच के चार सदस्यी टीम द्वारा धार जिले के दंगा प्रभावित क्षेत्र पीपल्या का 26 अक्टूबर  को भ्रमण किया गया। टीम ने पीपल्या व गंधवानी के दंगा पीड़ितों और प्रत्यक्षदर्शियों से बात की और प्रभावित घटना स्थलों का मुआयना किया गया। टीम ने आज अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए पीड़ितों को सहायता व सुरक्षा देने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कारवाई करने की मांग की।

टीम में एल.एस. हरदेनिया, साजिद कुरैशी, अनिल धीमान एवं तौकीर निज़ामी शामिल थे।

जांच टीम ने कहा कि घटना के बाद से वहां  भय का माहौल है और प्रशासन द्वारा इसे दूर करने का कोई प्रयास नही किया गया और ना ही इस दौरान हुए नुकसान का आकलन किया गया है।

जांच टीम की रिपोर्ट 

पीपल्या में पीड़ितों द्वारा बताया गया कि यहाँ उपद्रवियों द्वारा लगभग 25 मकानों और 5 दुकानों में आगजनी व लूटपाट की गई, लोगों के साथ मारपीट और महिलाओं के साथ बदसलूकी भी की गई। घटना स्थल दृष्य देख कर ऐसा लग रहा था कि जैसे वहां किसी आक्रमणकारी सेना ने हमला किया हो। यहाँ घरों में टी.वी.,फ्रिज,गैस चूल्हा, अलमारी,निकट भविष्य में होने वाली शादियों के लिए रखे गये जेवरात,कपड़े, बर्तन, अनाज, आदि को या तो जला दिया गया या लूट लिया गया। अनेकों वाहन जैसे मोटर साइकिल, जीप, ट्रेक्टर, लोडिंग आटो,ट्रक आदि को भी आग के हवाले कर दिया गया। उपद्रवियों द्वारा कई घरों में रखे धार्मिक ग्रंथ को भी जलाया गया है। गावं की मस्जिद में भी आगजनी की गई और यहाँ रखे गये धार्मिक ग्रंथों, सीपारे को जला दिया गया है और पंखे,माइक,लाइट को तोड़ा गया है,मीनार पर चढ़ कर अजान देने के उपयोग में आने वाले लाउडस्पीकर तक को भी निशाना बनाया गया है। मोहर्रम के त्यौहार पर मुस्लिम धर्मावलंबियों के ताजियों के साथ तोड़ फोड़ की गई है और उन्हें जलाया गया है।

पीड़ितों ने टीम को बताया कि 12 अक्टूबर को शाम 7.30 बजे जब भीड़ द्वारा झगड़े का प्रयास किया जा रहा था तो तात्कालीन एस.डी.एम. घटनास्थल पर मौजुद थे लेकिन आगजनी की घटनाओं की स्थिति होने के पहले वह घटना स्थल छोड़ कर खाना खाने चले गये, अगर वे स्थिति को देखते हुए वहां रुके रहते और पुलिस बल को बुला लिया जाता तो घटना रुक सकती थी।

गावं वालों द्वारा बताया गया कि वहां डॉक्टर राधेश्याम पाटीदार ने अपने मकान पर स्थायी रुप से साइरन लगाया हुआ है जिसकी आवाज आसपास के दूसरे गावं तक भी जाती है। साइरन का इस्तेमाल लम्बे समय से भीड़ को इक्टठा करने और उकसाने के लिए किया जाता है। अगर एक बार साइरन बजाते हैं तो इसका मतलब है कि साधारण रुप से एकत्रित होना है। दो बार साइरन बजाने का मतलब किसी गंभीर गतिविधिके लिए एकत्रित होना है। अगर साइरन तीन बार बजे तो इसका मतलब है कि तैयारी के साथ इक्टठा होना है।

पीड़ितों ने बताया कि जिन लोगों के साथ हिंसा और आगजनी की घटनाऐं हुई हैं,पुलिस द्वारा उनमें से ही 13 लोगों पर कई धाराऐं दर्ज कर दी गई हैं जबकि आगजनी और लूटपाट करने वालों में अनेकों की अभी तक गिरफ्तारी नही हुई है।

टीम ने वहां जा कर महसूस किया कि घटना के बाद से वहां  भय का माहौल है और प्रशासन द्वारा इसे दूर करने का कोई प्रयास नही किया गया और ना ही इस दौरान हुए नुकसान का आकलन किया गया है। क्षतिग्रस्त मकान और मस्जिद उसी अवस्था में हैं। किसी भी पीड़ित को अभी तक कोई मुआवजा नही दिया गया है। प्रषासन द्वारा अभी तक मस्जिद की पवित्रता को कायम करने का भी कोई प्रयास नही किया गया है।

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गंधवानी के पीड़ितों ने टीम को बताया कि यहाँ एक विवादित स्थल है जिसका पूर्व में दोनों वर्गो के दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण किया गया था। विवाद बढ़ने पर विगत् वर्ष स्थानीय प्रशासन द्वारा वहां पुलिस चैकी की स्थापना की गई थी। स्थानीय प्रशासन द्वारा गणेशचर्तुर्थी, दुर्गा पूजा एवं मोहर्रम के अवसर पर एस.डी.एम. और एस.डी.ओ.पी के नेतृत्व में शांति समिति की बैठक का आयोजन किया गया था जिसमें तय किया गया था कि उक्त विवादित स्थल पर किसी धार्मिक गतिविधियों का आयोजन नही किया जायेगा। लेकिन पुलिस पर दबाव डाल कर वहां गणेश प्रतिमा एवं दुर्गा प्रतिमा की स्थापना कर दी गई। दुर्गा प्रतिमा विर्सजन के बाद मोहर्रम का जुलूस उपरोक्त स्थान से निकल रहा था तो दोनों पक्षों में तनाव हो गया और बाद में यह पथराव और आगजनी में तबदील हो गया। इस दौरान मुस्लिम वर्ग के लगभग 14 दुकानों में आगजनी और लूटपाट की गई। गंधवानी कस्बा लगातार तीन दिनों तक असमाजिक तत्वों के हवाले रहा। घटना के बाद अब वहां मुस्लिम समुदाय के बहिष्कार के मामले शुरु हो गये और इस दौरान लगभग 35 मुस्लिम दुकानदारों से जो अपनी दुकान हिन्दुओं के भवनों में किराये से चला रहे थे, खाली करा लिया गया है।

 पीपल्या में जहाँ आगजनी हुई है वही मुस्लिम परिवारों के बीच एक मंदिर है जिसे कोई नुकसान नही पहुंचा है और यह अपनी पवित्रता के साथ सुरक्षित है।

जांच टीम की मांग 

  • पीड़ित परिवारों को यथेष्ठ राहत दी जाये, उनके क्षतिग्रस्त मकानों का पुनर्निर्माण कराया जाये और जिन लोगों की दुकानें जलायी/ लूटी गई हैं उन्हें आर्थिक सहायता दी जाये।
  • पीपल्या मस्जिद की तुरंत मरम्मत कर उसे पूर्व की स्थिति में लाया जाये।
  • सभी प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के तौर पर कम से कम तीन माह के राशन की व्यवस्था की जाये।
  • पीड़ितों द्वारा बताया गया है कि उपद्रवियों पर सिर्फ आगजनी की धारा लगायी गई है। हमारी मांग है कि उन पर लूटपाट की धारा भी लगायी जाये और लूट की संपति को बरामद किया जाये।
  • चोटग्रस्त लोगों को इलाज के लिए सहायता उपलब्ध करायी जाये।
  • जिन पीड़ित परिवारों में शादी पहले से तय थी, उनके एकत्रित किये गये कपड़े,गहनें,जेबरात आदि या तो जला दिये गये हैं या लूट लिए गये हैं इसलिए इन परिवारों की लड़कियों के शादी हेतु विशेष आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जाये।
  • साम्प्रदायिक हिंसा से प्रभावित परिवारों के बच्चों की मनोदशा को सुधारने हेतु उनकी काउंसलिंग की व्यवस्था की जाये।
  • धार संवेदनशील जिला हैं जहाँ साम्प्रदायिक घटनाऐं बढ़ती जा रही है इस स्थिति को देखते हुए वहां जिम्मेदार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की जाये।
  • पीड़ितों द्वारा बताया गया है कि घटनाक्रम पूर्वनियोजित था इसलिए इसकी प्रषासनिक जांच करायी जाये जिससे चिन्हित किया जा सके कि इसके पीछे कौन से संगठन और व्यक्ति हैं।
  • पीड़ित व्यक्तियों द्वारा इस घटना में शामिल ऐसे लोगों के नाम बताये गये हैं जो पहले भी इस तरह की घटनाओं में शामिल रहे हैं, उन्हें चिन्हित किया जाये और उन पर रासुका लगाया जाय।
  • डॉक्टर राधेश्याम पाटीदार के मकान पर लगा सायरन तुरंत हटाया जाए।