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लोकतंत्र व अभिव्यक्ति की आज़ादी के पक्ष में लखनऊ में धरना-प्रदर्शन

लखनऊ , 5 मार्च ।  शिक्षा संस्थानों पर भगवा हमले के खिलाफ और लोकतंत्र व अभिव्यक्ति की आज़ादी के पक्ष में खासतौर से डीयू के रामजस कालेज में एबीवीपी द्वारा छात्रो, अध्यापको आदि किये गए हमले के विरोध में आज  डा आंबेडकर प्रतिमास्थल , हज़रतगंज चौराहा , लखनऊ में धरना व विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया।

इसका आयोजन जन संस्कृति मंच, आइसा और एपवा ने मिलकर किया था। यह आयोजन मराठी दलित चिन्तक प्रो. कृष्णा किरवले की हत्या के विरोध में भी था . प्रो कृष्णा 3 मार्च 2017 को पश्चिमी महाराष्ट्र के कोल्हापुर शहर में स्थित अपने आवास में शुक्रवार को मृत पाए गए। राजेंद्र नगर स्थित उनके आवास से मिले उनके शव पर चाकू से कई बार मारे जाने के निशान हैं. उनकी उम्र ६२ वर्ष की थी. वे कोल्हापुर के शिवाजी विश्वविद्यालय के मराठी विभाग के प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. प्रो किरवाले ने साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान किया है। उन्होंने बाबूराव बागुल की जीवनी के साथ साथ अन्य महत्वपूर्ण किताबें भी लिखी हैं. उनका सबसे मत्वपूर्ण काम दलित एवं ग्रामीण साहित्य का शब्दकोष माना जाता है।
इस अवसर पर हुई सभा को वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना , कवि व आलोचक चंद्रेश्वर , कथाकार सुभाष चन्द्र कुशवाहा , प्रलेस की उषा राय , जसम लखनऊ के संयोजक श्याम अन्कुरम , अलग दुनिया के के के वत्स , राही मासूम राजा अकेडमी के रामकिशोर , कलाकार आदियोग , एपवा की मीना राय , आइसा की पूजा शुक्ल, अनुराग व नितिन राज, नागरिक परिषद् के के शुक्ला आदि ने संबोधित किया. सभा का सञ्चालन राजीव गुप्ता ने किया. वक्ताओं का कहना था हमारे विश्वविद्यालय, शिक्षण व शोध संस्थान, अकादमियां आदि विचारों की स्वतंत्रता, वाद-विवाद और संवाद के केन्द्र रहे हैं। आज इनकी गुणवत्ता खत्म की जा रही है। बहस करने, असहमति व सवाल उठाने वालों को ‘देशद्रोही’ और देश तोड़ने वाला कहा जा रहा है। हद तो यह है कि शहीद की बेटी को उसके विचारों के लिए उसकी तुलना आतंकवादी से की जा रही है तथा उसे गैंगरेप की धमकी मिल रही है। और यह सब राज्य के संरक्षण और सहायता से हो रहा है ।  ‘भक्तों’ के गिरोह को खुली छूट मिली है। संविधान और लोकतंत्र पर हमला किया जा रहा है।  ऐसे में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी के पक्ष में एकजुट और सक्रिय होना वक्त की जरूरत है। जो सच है, उसे जोरदार तरीके से कहा जाना चाहिए।

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