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विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में दीन दयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण

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राज्यपाल राम नाइक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 फीट ऊँची प्रतिमा का अनावरण किया

गोरखपुर 24 सितम्बर। राज्यपाल राम नाइक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज पंडित दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय में प्रशासनिक भवन के सम्मुख उनकी प्रतिमा का  अनावरण किया.

एक वर्ष पहले 25 सितम्बर २०१६ को मूर्ति स्थापना की आधारशिला कुलाधिपति राम नाइक ने ही रखी थी. वर्ष 1997 में गोरखपुर विश्वविद्यालय का नामकरण पंडित दीनदयाल की स्मृति में किया गया था.  लगभग दो दशक बाद विवि में पंडित दीनदयाल की कांस्य प्रतिमा विवि के प्रशासनिक भवन के प्रांगण में स्थापित हो रही है। इसे विशेष रूप से तैयार किये गए 11 मी. लम्बे, साढ़े छह मी. चौड़े और लगभग 3 मी. ऊँचे प्लेटफार्म पर स्थापित किया गया है. 12 फीट ऊँचाई और 1100 किग्रा वजन वाली इस मूर्ति को मूर्तिकार उत्तम पाचारने ने तैयार किया है।

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प्रतिमा बनाने में 24 लाख की लागत आई है.

प्रतिमा अनावरण के बाद दीक्षा भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय में पंडित दीन दयाल उपाध्याय शोध पीठ की स्थापना की गयी है। पंडित दीन दयाल के व्यक्तित्व एंव कृतित्व पर 15 खण्डों का विस्तृत वांगमय प्रकाशित किया गया है जिसका मूल्य लगभग 3500 रू0 है। इसे आसानी से खरीद सकते हैं। उन्होंने अपील किया कि वे केवल इसे खरीदे नही बल्कि पढ़ें भी ताकि उनके विचारों से अवगत हो सकें।

उन्होंने मूर्तिकार उत्तम पाचारने तथा उनके पुत्र सुबोध पाचारने को सम्मानित भी किया. इस अवसर पर उन्होंने सूचना एंव जनसम्पर्क विभाग लखनऊ द्वारा प्रकाशित अंत्योदय स्मारिका, प्रोफेसर प्रकाश मणि त्रिपाठी द्वारा लिखित प्राचीन भारतीय चिन्तन धारा एंव प्रोफेसर हर्ष सिन्हा तथा प्रोफेसर विनोद कुमार सिंह द्वारा लिखित सैन्य मनोविज्ञान पुस्तकों का विमोचन किया।

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समारोह के मुख्य अतिथि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पंडित दीन दयाल जी छात्र जीवन से अत्यंत मेधावी थे। प्रत्येक कक्षा में प्रथम उत्तीर्ण हुए तथा उन्हें स्कालरशिप मिली। यद्यपि उनका छात्र जीवन अभावों में बीता फिर भी उन्होंने सरकारी नौकरी का मोह नही किया और अंतिम व्यक्ति की सेवा का ब्रत लिया। उनका जीवन सभी छात्र छात्राओं के लिए प्रेरणा स्रोत का केन्द्र है।

उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिभा को पहचान कर उन्हें बड़े दायित्व दिये गये जिसका उन्होंने ईमानदारी से निर्वहन किया। उनहोंने अपने जीवन में श्रम, अनुशासन, मितव्ययिता, उद्यमिता एंव सहकारिता के पंचशील सिद्धान्त को अपनाया और पूरे जीवन उसका पालन किया।

पांचजन्य के समूह सम्पादक जगदीश उपासने ने कहा कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जन्मशती वर्ष में एकात्म मानववाद के 50 साल पूरे हुए हैं. उनका एकात्मक मानववाद का सिद्धान्त व्यक्ति, परिवार, समाज, देश, विश्व पर्यावरण को जोड़ता है। वे एक आदर्श राजनैतिक व्यक्ति, आदर्श पत्रकार, अर्थवेत्ता थे। उनकी नीतियों के अनुसार योजनाएं बनाकर सरकारें गरीब व्यक्ति का उत्थान कर सकती है।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर वी.के. सिंह ने सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम संयोजक प्रोफेसर श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रोफेसर हर्ष सिन्हा ने समारोह का संचालन किया।

इस अवसर पर नगर विधायक राधामोहन दास अग्रवाल,  कुलपति प्रो राजेन्द्र प्रसाद,  प्रो रजनीकान्त पाण्डेय, प्रो अरविन्द दीक्षित, प्रो शैलेष कुमार शुक्ला, प्रो योगेन्द्र सिंह, प्रोफेसर श्रीनिवास सिंह, प्रमुख सचिव सूचना अवनीश अवस्थी, मण्डलायुक्त अनिल कुमार, जिलाधिकारी राजीव रौतेला, पूर्व कुलपति प्रो यू.पी. सिंह, प्रो रामअचल सिंह आदि उपस्थित थे.

 

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