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संविधान को बचाने के लिए धर्मनिरपेक्ष दल एक मंच पर आएं-अतुल अंजान

‘अच्छे दिन का वादा हर मोर्चे पर फेल’
‘जम्मू कश्मीर के हालात के लिए भाजपा व पीडीपी जिम्मेदार’
‘मुसलमान व दलितों पर हमलें चुनावी साजिश’
‘सत्ता के लिए भाजपा व बसपा में हो सकता है गठजोड़’
‘साम्पद्रायिक ताकतों के खिलाफ सभी दल हो एक’
सीपीआई राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान से खास बातचीत
सैयद फरहान अहमद
गोरखपुर,24 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दो वर्षीय कार्यकाल में ही मुल्क की सूरतें हाल को धमाका खेज बतातें हुए सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान ने कहा कि आज लड़ाई संविधान बचाने की है। सांप्रदायिक ताकतों द्वारा मुल्क के आईन (संविधान) का गला घोटा जा रहा है। गौरक्षा के नाम पर मुसलमानों के साथ दलितों पर सुनियोजित हमलें इसकी ताजा मिसाल है। इसलिए संविधान को बचाने के लिए धर्मनिरपेक्ष दलों को एक मंच पर आना चाहिए।
गोरखपुर के दौरे पर आए सीपीआई राष्ट्रीय सचिव ने गोरखपुर न्यूज़ लाइन से खास बातचीत में मोदी से लेकर योगी तक को निशाने पर लिया। पीएम के ‘अच्छे दिन आयेंगे ‘  नारे पर तंज कसते हुए कहा कि मोदी  जी ने लालकिले से अपने भाषण में कहा था कि गरीब की थाली महंगी नहीं होने देंगे। लेकिन दूसरे ही दिन 16 अगस्त को इस दावे की पोल खोलते हुए भारत सरकार की प्रोगाम इम्पेलिमेंटेशन कमेटी व कार्मस व फाइनेंस मंत्रालय ने कहा कि पिछले 23 महीनों के दौरान थोक महंगाई दर सबसे बुलंदी पर हैं। हर साल 2 करोड़ नौजवानों को रोजगार देने, 15 लाख रूपये हर परिवार के खाते में आने पर कटाक्ष करते हुए अतुल अंजान ने कहा कि फरवरी माह में आयी भारत सरकार की एक रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग डेढ़ साल के दौरान एक लाख चौसठ हजार नौकरियां मिली हैं। बढ़ती महंगाई पर मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि इस सरकार के दौरान होल सेल प्राइज इंडेक्स बढ़ा, जहां वर्ष 2015 में आलू का दाम छह रूपया था। वह बढ़कर 19 रूपए हो गया है। वहीं चीनी 31 जुलाई 2015 में 22 रूपए प्रति किलो से बढ़कर आज 40 रूपए, चना दाल 31 रूपए से 100 रूपए, अरहर दाल 55 रूपए से 200 रूपए प्रति किलो पहुंच गयी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या बढ़ी कीमतों से किसानों का कोई फायदा हुआ? नहीं, बल्कि बिचैलिए और अडानी, अंबानी जिन्होंने मोदी को पीएम बनाने के लिए 35 हजार करोड़ रूपए खर्च किए। वह महंगाई करके ना केवल अपना खर्च वापस ले रहे है बल्कि हजारों करोड़ अधिक वसूली कर रहे है। इस स्थिति पर हसन कमाल का फिल्म निकाह में गाया हुआ एक गाना याद आ रहा है कि ‘ दिल के अरमां आंसुओं में बह गए’। सबका साथ सबका विकास नारे पर सवाल करते हुए सीपीआई नेता ने कहा कि मुल्क भर में साम्प्रदायिकता और जातिवादी दंगे फैला करके लोगों का ध्यान जनता से किए गए अपने वादों से भटकाना चाहते है।
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जम्मू कश्मीर की ताजा स्थिति पर बेचैनी का इजहार करते हुए उन्होंने इसके लिए भाजपा और पीडीपी सरकार को जिम्मेदार करार दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर हिन्दुस्तान का अभिन्न अंग है लेकिन बाप-बेटों की सरकार को हटाने की बात करने वाले पीएम आज बाप -बेटी के साथ ही मिलकर सरकार चला रहे है।
गौरक्षा के मुद्दों को चुनावी खेल बताते हुए कहा कि यूपी, पंजाब, उत्तराखंड और फिर गुजरात में चुनाव होने वाले है। इसलिए इस मुद्दे का हवा देने का खेल चल रहा है।
गैर भाजपा राज्यों में कानून व्यवस्था को ध्वस्त बताने वाले भाजपाईयों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें पहले अपने गिरेहबान में झांक कर देखना चाहिए। राजस्थान, हरियाणा, गुजरात की स्थितियां किसी से छुपी नहीं हैं। गुजरात माॅडल का बखान करने वाले नरेन्द्र मोदी गढ़ में ही यह माडल फेल हो गया है। नगर पालिका से लेकर पंचायत व ब्लाकों में भाजपा की करारी हार इसकी दलील है। 2017 के यूपी चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की हवा निकलने की भविष्यवाणी करते हुए उन्होंने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि राज्य में बसपा सुप्रीमो मायावती की हालत इंतेहाई खराब हो गयी है।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद यह पहला मौका है जब किसी पार्टी का लीडर आफ अपोजिशन ही पार्टी को छोड़ दिया है। साथ ही यह आशंका जाहिर की भाजपा मायावती को पूर्व की तरह साथ ले सकती है।
उन्होंने उप्र के चुनाव को देश के लिए काफी अहम बताते हुए कहा कि आरएसएस व भाजपा को हराने के लिए लेफ्ट एंड डेमोक्रेटिक फ्रंट को  मिलकर एक मंच के बैनर तले चुनाव लड़ना चाहिए।
अतुल अंजान ने बताया कि यूपी चुनाव के पेशे नजर सीपीआई व सीपीआईएम एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने के साथ धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एक मंच पर करने के लिए प्रदेश की विभिन्न भागों में सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं।
गोरखपुर में एम्स व नये खाद कारखाने की पीएम द्वारा आधारशिला रखे जाने पर तंजिया लहजे में कहा कि एम्स व खाद कारखाना पूर्वांचलवासियों की जरूरत है लेकिन इसको मुकम्मल प्लान के बगैर आधारशिला रखना गौर करने वाला पहलू है। उन्होंने कहा कि गन्ना शोध संस्थान की जगह मापदंड को ताक पर रखकर एम्स बनाया जाना दुरूस्त नहीं है। इससे ना केवल एम्स बल्कि गन्ना शोध संस्थान के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। सदर सांसद योगी आदित्यनाथ को निशाने पर लेते हुए कहा कि योगी जी एम्स को फुटबाल ना बनायें।

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