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समाजसेवी पीके लाहिड़ी नहीं रहे

गोरखपुर, 4 अप्रैल। समाजसेवी पीके लाहिड़ी (प्रोतुल कुमार लाहिड़ी) का आज निधन हो गया। हेरिटेज होटल ‘ होटल विवेक ’ के संस्थापक एवं मैनेजिंग डायरेक्टर श्री लाहिड़ी गोरखपुर में पर्यावरण, शिक्षा, पर्यटन, पुरातत्व, सामाजिक-सांस्कृतिक सम्बन्धी अनेक संगठनों से जुड़े थे।

74 वर्षीय श्री लाहिड़ी वह गुर्दे की बीमारी से पीड़ित थे। आज सुबह दस बजे उनकी तबियत अचानक बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

उनके बेटे अचिन्त्य लाहिड़ी ने बताया कि अंतिम संस्कार पांच अप्रैल को दोपहर 12 बजे राप्ती नदी के तट राजघाट पर किया जाएगा।

गोरखपुर शहर के मशहूर चिकित्सक रहे केएन लाहिड़ी के पुत्र पीके लाहिड़ी ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से विज्ञान से स्नातक करने के बाद अपना कैरियर 1966 में दवा कम्पनी के होलसेलर के रूप में शुरू किया था। बाद में उन्होंने हेरिटेज होटल ‘ विवेक ’ की स्थापना की। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन और टेड टैक्स एडवाइजर के रूप में कार्य किया। उनके पहल पर 1997 में गोरखपुर महोत्सव का आयोजन हुआ।

श्री लाहिड़ी की बौद्ध स्थलों की खोज और उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने में विशेष रूचि थी। उन्होंने गोरखपुर और आस-पास के कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थानों के बारे में जानकारी एकत्र की और आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया को रिपोर्ट भेजी।

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उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय के जूलोजी विभाग के प्रोफेसर एएन नारायण के साथ किताब ‘ सिविलाइजेशन एट सरयूपार इन बुद्धिस्ट पर्सपेक्टिव ‘ लिखी थी जो वर्ष 2014 में प्रकाशित हुई।  इंडियन नेशनल टस्ट फार आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इनटैक) से जुड़ कर उन्होंने गोरखपुर और आस-पास के जिलों के ऐतिहासिक इमारतों व स्थानों के संरक्षण के लिए आवाज उठाई। वह इनटैक के गोरखपुर चैप्टर के सहसंयोजक थे।

जब नगर निगम ने ऐतिहासिक बसंतपुर सराय को ध्वस्त कर वहां मल्टस्टोरी बिल्डिंग बनाने का निर्णय लिया तो उन्होंने इसका विरोध किया। उनके प्रयास से इनटैक के विशेषज्ञों की टीम गोरखपुर आई और बसंतपुर सराय को दिल्ली हाट की तरह संरक्षित व विकसित करने की योजना तैयार की। यह अलग बात है कि इस योजना के लिए प्रदेश सरकार और नगर निगग या जीडीए धन लगाने को तैयार नहीं हुआ।

उन्होंने ह्वी पार्क, मोती जेल, नगर निगम की होम्स कलनन लाइब्रेरी, संतकबीरनगर में कई प्राचीन इमारतों, स्थानों के संरक्षण व विकास की योजनाएं तैयार करायीं। उन्होंने पुरानी पुस्तकों, पांडुलिपियों, वस्त्रों को संरक्षित करने के बारे में जानकारी देने के लिए इनटैक की वर्कशाप का आयोजन कराया जिसमें 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

वह लम्बे समय तक बंगाली एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे और उनके अध्यक्ष रहते हुए वर्ष 2007-2007 में गोरखपुर में दुर्गा पूजा के 100वें वर्ष का भव्य आयोजन हुआ। उन्होंने गोरखपुर पर्यावरण मंच से जुड़ कर कचरा निस्तारण और साडिल वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया। कचरा बीनने वाले बच्चों के लिए एक स्कूल शुरू किया। जिला अपराध निरोधक समिति का उपाध्यक्ष बनने पर उन्होंने मंडलीय कारागार में बंदियों के छोटे बच्चों के लिए प्ले वे शुरू कराया। मंडलीय कारागार में बंद कैदियों से मिलने आने वाली महिलाओं के लिए छाया कुंज और टायलेट बनवाया। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बंदियों को वोट देने की व्यवस्था करने की मांग उठाई।

श्री लाहिड़ी पूर्वांचल बनाओं आंदोलन से भी जुड़े रहे। वह साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रियता से भाग लेते थे।

उनके निधन पर महानगर पर्यावंरण मंच, गोरखपुर इन्वायरमेंटल ग्रुप, गोरखपुर फिल्म सोसाइटी, प्रेमचन्द साहित्य संस्थान, इप्टा, सनरोज आदि संस्थानों ने गहरा शोक प्रकट किया है।