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साम्प्रदायिक, जातीय हिंसा के खिलाफ लड़ने वाले योद्धा थे रोहित वेमुला- आइसा

इलाहाबाद, 17 जनवरी। हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के शोध छात्र रोहित वेमुला की दूसरी बरसी पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू लॉन में आइसा ने “रोहित स्मृति सभा” का आयोजन कर वेमुला की संघर्षकारी आंदोलन को जीवित रखने का आह्वान किया।

आइसा के राष्ट्रीय सचिव सुनील मौर्या ने कहा कि रोहित वेमुला आरएसएस, भाजपा के खिलाफ उभरते हुए युवा आंबेडकर थे जिसको आरएसएस, भाजपा ने षड्यंत्रपूर्वक आत्महत्या करने पर मजबूर किया जिसे हम सांस्थानिक हत्या कहते हैं।

शक्ति रजवार ने कहा कि हम जानते हैं कि आज रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या के दो वर्ष हो गए। अब तक रोहित के घर वालों को न्याय नहीं मिला। 28 साल के पीएचडी छात्र रोहित पिछले कई दिनों से खुले आसमान के नीचे सो रहे थे, क्योंकि हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने उन्हें और उनके चार साथियों को हॉस्टल से निकाल दिया था. उनका प्रवेश विश्वविद्यालय के हर सार्वजनिक स्थल पर प्रतिबंधित कर दिया गया था.
महज ये संयोग नहीं है कि रोहित वेमुला के साथ निकाले गए चार दोस्त भी दलित थे। बल्कि ये साजिश है सत्ता का कि दलितों, अल्पसंख्यकों को हाशिये पर ढकेल दिया जाए। भीमा कोरेगांव में शौर्य दिवस मनाने के लिए जा रहे रहे लोगों पर ईंट-पत्थर से हमला किया गया। ऊना में दलित नौजवानों को बेरहमी से पीटा गया, सहारनपुर के शब्बीरपुर में दलितों के घरों को जला दिया गया और उलटे भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आज़ाद रावण को ही गिरफ्तार कर लिया गया। जिनकी जमानत के तुरंत बाद योगी सरकार ने रासुका लगाकर जेल में ठूस दिया। पिछले कुछ सालों में दलितों, अल्पसंख्यकों पर हमले बढे है ये अनायास नहीं है बल्कि एक सोची समझी चाल है।
सभा का संचालन करते हुए आइसा ईकाई अध्यक्ष शैलेश पासवान ने कहा कि वर्तमान मोदी सरकार डर की राजनीति कर रही है। आवाज़ उठा रहे नौजवानों पर तरह-तरह के आरोप लगाकर उनकी आवाज़ को दबा रही, निर्ममता से आंदोलनों का दमन कर रही है। अपने खिलाफ उठती हर आवाज़ को देश विरोधी बताकर खुद अपने आप को बरी कर लेना चाहती है। सरकार की चिंता ये है कि अपने हक़ अधिकार के लिए एकजुट हो रहे दलितों- शोषितों-अल्पसंख्यकों की एकता न बन पाए जबकि लगातार वो एकजुट होकर अपने हक़-हुक़ूक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं। रोहित को याद करते हुए हमें भी रोहित को न्याय दिलाने, फिर दोबारा रोहित जैसे साथी को भेदभाव का शिकार न होना पड़े इसके लिए हमें प्रतिबद्धता के साथ एकजुट होकर न्याय, बराबरी, समानता के लिए भगत सिंह, अंबेडकर, रोहित वेमुला की लड़ाई को आगे बढाना है। सभा में आइसा उपाध्यक्ष सुभाष कुशवाहा, मानविका, यश सिंह, रणविजय भीम, चारुलेखा, हिमांशु, आदिल, विवेक, सत्यकेश, विष्णु प्रभाकर आदि मौजूद रहे।

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