समाचार

सिद्धार्थनगर : सपा-कांग्रेस गठबंधन ने सभी पाँच सीट पर बदल दिया समीकरण

सग़ीर ए खाकसार, वरिष्ठ पत्रकार
सिद्धार्थनगर, 13 फरवरी। ज़िले की पांच विधान सभा सीटों पर 27 फ़रवरी को पांचवें चरण में चुनाव होना है।मत पत्रों की जाँच पड़ताल के बाद ज़िले में कुल 47 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।चुनाव की तारीख नज़दीक आते ही प्रत्याशियों ने जन संपर्क तेज़ कर दिया है।
शोहरत गढ़ विधान सभा सीट से कुल 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें प्रमुख रुप से नगर पालिका सिद्धार्थ नगर के चेयरमैन मोहम्मद जमील सिद्दीकी (बसपा), उग्रसेन सिंह (सपा), अनिल सिंह (कांग्रेस), चौधरी रविंद्र प्रताप (रालोद),अमर सिंह चौधरी (अपना दल) हैं। सपा ,कांग्रेस में गठबंधन के बावजूद दोनों प्रत्याशियों ने नामांकन किया है।

शोहरत गढ़ विधान सभा सीट 1974 से अस्तित्व में आयी थी।अब तक 6 बार कांग्रेस यहाँ से विजयी रही है।भाजपा ने 4 बार झंडे गाड़े हैं।यहाँ 2012 में पहली बार सपा ने खाता खोला था।पिछली बार लाल मुन्नी सिंह यहाँ से विजयी हुई थीं।इस बार उनके पुत्र उग्रसेन सिंह मैदान में हैं। पिछली बार बसपा के मुमताज़ अहमद दूसरे स्थान पर थे। इस बार बसपा ने युवा नेता मोहम्मद जमील सिद्दीकी पर दांव लगाया है। श्री सिद्दीकी की छवि ज़िले में नई सोच वाले युवा नेता की है। उनकी लोकप्रियता सभी वर्गों में है। तीन बार विधायक रहे चौधरी रविंद्र प्रताप के रालोद से और अनिल सिंह के कांग्रेस से मैदान में आने से यहाँ बहुकोणीय संघर्ष हो गया है।

डुमरियागंज विधान सभा से श्रीमती सय्यदा खातून (बसपा),राम कुमार उर्फ चिंकू यादव (सपा),राघवेंद्र प्रताप सिंह (भाजपा) से ताल ठोक रहे हैं। मालिक कमाल युसूफ का आखिरी वक्त में टिकट कट जाने से यहाँ मुकाबला दिलचस्प हो गया है।श्री युसूफ ने अब बसपा का दामन थाम लिया है जिससे सय्यदा खातून को ताकत मिली है।

कपिलवस्तु विधान सभा (सु0) से विजय कुमार (सपा),चंद्र भान (बसपा),श्याम धनी राही( भाजपा) से चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार यहाँ से सपा विजयी हुई थी।बांसी विधान सभा से लाल जी यादव सपा से,जय प्रताप सिंह भाजपा , लाल चंद्र निषाद बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं। जय प्रताप सिंह पिछली बार यहाँ से विजयी हुए थे।

जिले की वीआईपी सीट इटवा विधान सभा सपा और कांग्रेस में हुए गठबंधन के तहत सपा के हिस्से में गयी है। विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय की प्रतिष्ठा यहाँ पर दांव पर है। गठबंधन से उनकी ताकत बढ़ गयी है। हर चुनाव में उनसे मुक़ाबला करने वाले मो मुकीम अब साथ हैं। बसपा ने अरशद खुर्शीद को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं डॉ सतीश चंद्र द्विवेदी भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं।

जिले की पांचों विधान सभा का इतिहास देखें तो 2012 के चुनाव में यहाँ से सपा ने 3  और भाजपा व पीस पार्टी ने 1-1 सीट हासिल की थी। डुमरियागंज से पीस पार्टी के मालिक कमाल युसूफ पीस से विजयी हुए थे। उन्होंने बाद में सपा का दामन थाम लिया था। गठबंधन की सियासत के चलते जिले का चुनावी समीकरण बदला हुआ है।