विचार

सिर्फ डिग्रियां बांटने वाली टीचिंग मशीन बन गयी हैं यूनिवर्सिटी : प्रो.अनिल शुक्ल

‘ भारत में शिक्षक-शिक्षा के मुद्दे ‘ पर शिक्षा शास्त्र विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग में आयोजित ‘ भारत में शिक्षक-शिक्षा के मुद्दे ‘ विषयक आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन 24 फरवरी को मुख्य अतिथि महात्मा ज्योतिबा फुले रोहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के कुलपति प्रो.अनिल शुक्ला ने कहा कि आज विश्वविद्यालय टीचिंग मशीन बन गयी है। यहां सिर्फ डिग्रियां बांटी जा रही हैं।

उन्होंने कहा की शिक्षा पर सरकार का कब्जा होने के बाद रेडीमेड टीचर तैयार होने लगे हैं। टीचर टूल के रूप में कार्य कर रहा है। उसे सिर्फ सेलेबस पूरा करने की जल्दी रहती है।  ज्ञान रेडीमेड नहीं हो सकता। नॉलेज को टेस्ट किए बिना आप अच्छे टीचर नहीं बन सकते।

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प्रो शुक्ल ने कहा कि टीचर वही बने जिनमें वो गुण हों, जिनमें पढ़ाने की ललक हो। सिर्फ डिग्री लेकर टीचर बनने की सोच छोडऩी होगी। हमें ज्ञान नहीं प्रज्ञावान बनने की जरूरत है। सिर्फ किताब पढक़र हम प्रज्ञावान नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में कम्पटीशन सिखाया जाता है जबकि छात्रों को कोआपरेशन सिखाना चाहिए। छात्र कोआपरेशन सीखेगा तो लोगों के साथ मिलकर कार्य करेगा और कम्पटीशन सीखेगा तो सहयोग नहीं बल्कि दूसरों को नीचा दिखाएगा। बच्चों की रूचि को समझने की जरूरत है। बच्चे जो कहते हैं उसे स्वीकार करने की कोशिश करें।

प्रोफेसर अनिल शुक्ल ने कहा कि टीचर बनते नहीं पैदा होते हैं। बी.एड, एम.एड करने वाला टीचर नहीं होता, जो बच्चों को समझ ले वही टीचर है। उन्होंने कहा कि जो भी महान शिक्षक हुए हैं उन्होंने बीएड, एमएड की डिग्री नहीं ली थी। स्वामी विवेकानंद के पास कोई डिग्री नहीं थी इसके बावजूद उन्होंने पूरी दुनियां में ज्ञान का अलख जगाया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर रामअचल सिंह ने गुरू की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शिक्षक सिर्फ ज्ञान देता है लेकिन गुरू ज्ञान के साथ ही संस्कार और देशभक्ति की भावना पैदा करता है। रामकृष्ण परमहंस के बिना विवेकानंद ऐसा नहीं बन पाते। कहा कि गुरू जैसा चाहे छात्र को बना सकता है। आप बच्चों में शिक्षा के साथ संस्कार डाल सकते हैं। प्रो. राम अचल सिंह ने कहा कि शिक्षक को अत्याचार, अनाचार, दुराचार, भ्रष्टाचार और कदाचार का सदैव विरोध करना चाहिए।

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इस मौके पर शिक्षा शास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रोफ़ेसर शैलजा सिंह, प्रो.शोभा गौड़, प्रो.सुमित्रा सिंह और प्रो. सरिता पाण्डेय प्रो. एन.पी.भोक्ता, डा.उदय सिंह, प्रो. विनोद सिंह, डॉ धर्मब्रत तिवारी ,प्रोफेसर गोपीनाथ सिंह डॉ  के डी तिवारी  व छात्र मौजूद रहे।

पढ़ाने के साथ पढ़ना भी जरूरी: प्रो. प्रतिभा खन्ना

संगोष्ठी के दूसरे दिन गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग  की  पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर प्रतिभा खन्ना ने कहा कि क्वालिटी शिक्षा के लिए शिक्षकों को पढ़ाने के साथ पढ़ते भी रहना चाहिए। बेहतर शिक्षा के लिए सिर्फ आप कार्य कर सकते हैं और यह आपका अधिकार भी है। यह कार्य सरकार या कोई अन्य तंत्र नहीं कर सकता। आप खुद में वो क्षमता पैदा करें और बेहतर समाज निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

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उन्होंने कहा कि कोई शिक्षक ही आपको कुछ ऐसा ज्ञान दिया होगा जिसके वजह से आप उसे याद करते होंगे। मुख्य अतिथि ने कहा कि आप ऐसे छात्र बनाएं जो ज्ञान को सिर्फ सीखें नहीं बल्कि ज्ञान का उपयोग कर नवाचार की क्षमता उत्पन्न कर सकें। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं विभागाध्यक्ष प्रो. शैलजा सिंह ने कहा कि छात्रों का चुनाव भी महत्वपूर्ण है। हम अपनी सीटें भरने में लगे रहते हैं। व्यवसायीकरण से गुणवत्ता पर कम और छात्रों की संख्या पर अधिक ध्यान देते हैं जो ठीक नहीं है।

कार्यक्रम के अंत में प्रो. सुमित्रा सिंह ने सभी अतिथियों का आभार ज्ञापन किया। इस मौके पर प्रो. एन.पी.भोक्ता, डा.उदय सिंह, प्रो. विनोद सिंह,डा. लोकेश त्रिपाठी, प्रो. राजेश सिंह, सहित अन्य गुरूजन एवं छात्र मौजूद रहे।

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