साहित्य - संस्कृति

सूरीनाम के प्रख्यात सरनामी भोजपुरी एवं पाॅप गायक राज मोहन गायेंगे ‘ लोकरंग ‘ में

लोकरंग 2015 का दृश्य
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ऐतिहासिक होगा लोकरंग का 10वां आयोजन 
11-12 अप्रैल को गांव-जोगिया जनूबी पट्टी में जुटेंगे देश -विदेश के लोक कलाकार
बिरजिया (आदिम) आदिवासी समुदाय का नृत्य भी होगा प्रमुख आकर्षण
कुशीनगर , 11 फरवरी। कुशीनगर जनपद एवं फाजिलनगर कस्बे के पास स्थित गांव-जोगिया जनूबी पट्टी में आयोजित होने वाला एवं लोक संस्कृतियों को सम्मानजनक मंच प्रदान करने वाला आयोजन ‘लोकरंग’ इस वर्ष 10 वर्ष पूरा कर रहा है। लोकरंग सांस्कृतिक समिति ने इस वर्ष लोकरंग के आयोजन को भव्य बनाने की तैयारी ज़ोर-शोर से शुरू कर दी है।  11-12 अप्रैल को आयोजित हो रहे
10वें लोकरंग में पहली बार पूर्वांचल की धरती से सूरीनाम भेजे जाने वाले गिरमिटिया मजदूरों के वंशज भी इस आयोजन में भाग ले रहे हैं ।
लोकरंग में बाकुम कला का प्रदर्शन (फ़ाइल फोटो)
लोकरंग में बाकुम कला का प्रदर्शन (फ़ाइल फोटो)
प्रख्यात सरनामी (हिन्दुस्तानी मूल) भोजपुरी गायक राज मोहन जी अपने साथी सोरद्ज (सूरज) सेवलाल और संदीप बडलोई के साथ लोकरंग में हिस्सा लेने आ रहे हैं। यह दल अपने खर्चे पर आ रहा है। राज मोहन नीदरलैंड और सूरीनाम के जाने-पहचाने सरनामी भोजपुरी और पाॅप गायक हैं। इनके कई एलबल आ चुके हैं। इन्होंने फ्रांस, गुयाना, दक्षिण अफ्रिका, मारीसस, भारत सहित कई यूरोपीय देशों में अपनी-‘बैठकगाना’ से प्रभावित किया है। राज मोहन जी भारतीय मूल के हैं।
लोकरंग में बाउल गायन (फ़ाइल फोटो )
लोकरंग में बाउल गायन (फ़ाइल फोटो )
1873 से 1916 के मध्य ब्रिटिश सरकार द्वारा, अपने उपनिवेशों में गन्ने, कहवा और कपास की खेती के लिए पश्चिमी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के 35000 के लगभग युवा मजदूरों को कलकत्ता से पानी के 64 जहाजों पर लादकर पांच साल के अनुबंध पर डच उपनिवेश, सूरीनाम ले जाया गया था। तब सूरीनाम, नीदरलैंड के अधीन था। सूरीनाम गये मजदूरों में से केवल तिहाई मजदूर ही अनुबंध खत्म होन के बाद देश लौट पाये। शेष वहीं बस गये। लोकरंग में शामिल होने आ रहे राजमोहन जी और उसके साथी उन्हीं मजदूरों के वंशज हैं।
करमा नृत्य (फ़ाइल फोटो)
करमा नृत्य (फ़ाइल फोटो)
इसके अलावा पहली बार  बिरजिया (आदिम) आदिवासी समुदाय, लातेहार, झारखंड की टीम भी आ रही है । विदित हो कि इस आदिवासी समुदाय की जनसंख्या मात्र 6000 से 7000 ही बची है। बिरजिया समुदाय, आदिम आदिवासी समूहों में से एक है और हमारी जनविरोधी नीतियों के कारण अपनी संस्कृति और स्मिता की हिफाजत में संघर्षरत है। वंदना टेटे के नेतृत्व में यह समुदाय बिरजिया, करम, सरगुल और महादेव नृत्य प्रस्तुत करेगा।
लोकरंग में कबीर गायन
कबीर गायन
इनके अलावा गाजीपुर का पारंपरिक भोजपुरी धोबिया नृत्य,  जीवनलाल चैधरी के नेतृत्व में दूसरी बार लोकरंग में पधार रही है जो विदेशों में अनेक प्रस्तुतियां दी हैं और जल्द मारिशस तथा अमेरिका जाने वाली है। चंदनलाल कालबेलिया लोकनृत्य समूह, जयपुर, राजस्थान ने देश के अलावा दक्षिण अफ्रिका, कोरिया, मलेशिया सहित लगभग तीन दर्जन से अधिक, विदेशों में कार्यक्रम प्रस्तुत किए हैं। यह टीम इस बार के लोकरंग का मुख्य आकर्षण होगी।
jogiya ka rang
इनके अलावा चंदन तिवारी, बलिया का पुरबिया तान, अवधी लोक समूह, फैजाबाद का फरुवाही तथा हिरावल पटना के जनगीत सुनने को मिलेंगे। परिवर्तन समूह, ग्वालियर द्वारा ‘बाबूजी’ नौटंगी नाटक प्रस्तुत किया जायेगा जिसको नौटंकी शैली में रूपांतरण एवं निर्देशन जाने-माने रंगकर्मी, फिल्म एवं संगीत निर्देशक, ज़फर संजरी ने किया है। दूसरा नाटक ‘बहुरा गोड़न’ रंगनायक, बेगुसराय द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा।
 इस बार के विचार गोष्ठी में प्रो.मैनेजर पांडेय (प्रमुख आलोचक, दिल्ली), प्रो. चौथी राम यादव (प्रमुख आलोचक, वाराणसी), उर्मिलेश (प्रमुख मीडिया कर्मी, दिल्ली), प्रो. दिनेश कुशवाह (हिन्दी विभागाध्यक्ष, रीवा विश्वविद्यालय, रीवा), तैयब हुसैन (लोकसंस्कृति मर्मज्ञ, पटना), ए.के.पंकज ( साहित्यकार एवं आदिवासी कला, संस्कृति के जानकार, रांची), जय प्रकाश कर्दम (दलित विचारक, दिल्ली), शंभु गुप्त ( प्रमुख आलोचक, वर्धा), सृंजय (सुप्रसिद्ध कहानीकार, आसनसोल), रामजी यादव (साहित्यकार/संपादक) सहित सैकड़ों साहित्यकार एवं लोक संस्कृतिकर्मी भाग लेंगे।
 लोकरंग का यह आयोजन हिन्दी के महान घुम्मकड़ साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन और दलित चेतना के गुमनाम कवि हीरा डोम को समर्पित होगा।

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