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हमारे विश्वविद्यालयों का विश्व के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की सूची में न होना दुर्भाग्यपूर्ण : राज्यपाल

अशफाक अहमद
गोरखपुर, 26 मार्च। पिछले साठ वर्षों में गोरखपुर विश्वविद्यालय में एकेडेमिक, प्रशासनिक, विधिक, व्यवसायिक, सैन्य, खेल एवं राजनीतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय नेतृत्व को उत्पन्न किया है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह एवं अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति इस विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रह चुके हैं। उन प्रतिष्ठित भूतपूर्व छात्रों ने विश्वविद्यालय की छवि को देश के अंदर तथा बाहर दोनों ही फलकों पर गौरवान्वित किया है।

यह बातें दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 35 वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि वैज्ञानिक पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय भारत सरकार के डॉक्टर शैलेष नायक ने कहीं।

उन्होंने कहा कि 1956 में स्थापित इस विश्वविद्यालय की एक अलग पहचान रही हैं, क्योंकि यह स्नातक, परास्नातक एवं पीएचडी स्तर के विविध पाठ्यक्रमों में शिक्षा प्रदान की जाती हैं। जिनमें पारंपरिक विषयों के साथ-साथ आधुनिक विषय जैसे कंप्यूटर साइंस, जैव प्रौद्योगिकी, औद्योगिक रसायन विज्ञान, औद्योगिक सूक्ष्म विज्ञान प्रबंध अादि भी सम्मिलित हैं इस
विश्वविश्वविद्यालय में अनेक प्रतिष्ठित शोधार्थीगण अध्यापकों के रूप में विद्यमान हैं, जो मानविकी, समाज विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, भेषज विज्ञान आदि विविध क्षेत्रों में सक्रियता पूर्वक शोधकार्य में लगे रहते हैं तथा जिन्होंने अभिवर्धन में महती भूमिका का निर्वाह किया है।

अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति व राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि यह दुर्भाग्य का विषय है कि हमारे विश्वविद्यालय विश्व के सर्वश्रेष्ठ परिसरों की सूची में स्थान नहीं बना पा रहे हैं किंतु श्रेष्ठता और उत्कृष्टता के प्रति हमारा आग्रह और समर्पण इस स्थिति को बदल सकता हैं। हमें ऐसा करना ही चाहिए । लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में एक बात अवश्य ध्यान में रखनी होगी कि हम इस होड़ में अपने दायित्व न भूले जो हमारे संस्थापकों ने परिकल्पित किया है। आज हम ऐसे समय में रह रहे हैं जहां ज्यादातर व्यक्ति आत्म केंद्रित होते जा रहे हैं कोई भी कार्य करने से पहले वह एक ही प्रश्न पर विचार करते हैं कि इस से मुझे क्या लाभ होगा ? यदि उन्हें कोई ठोस उत्तर नहीं मिलता तो वे उस काम से बचने की कोशिश करने लगते हैं । जिन लोगों ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया होगा। अगर वह ऐसा सोचते तो क्या हम आप यहां होते? सड़क मार्गों पर दोनों तरफ छायादार पेड़ लगाने वाले तो यह कार्य चिलचिलाती धूप में खड़े होकर ही करते हैं अगर वह अपने लाभ की सोचते तो क्या होता? हमारा जीवन, हमारी शिक्षा, हमारा कार्य सब कुछ इस पैमाने पर नहीं आंका जाएगा। हमने कितना कुछ दिया है । मूल्यांकन इस बात से होगा कि हमने लोगों को, समाज को, देश को कितना कुछ दिया है । वैसे जैसे डॉक्टर शैलेष नायक ने दिया हैं। ज़रूरत सिर्फ इस बात की है कि हमारे शिक्षक, हमारे विद्यार्थी, हमारे कर्मचारी – हम सभी अपने इसी दायित्व का आभास करें और स्वयं को समाज और राष्ट्र की शिक्षा के लिए समर्पित कर दें ।
गोविवि के कुलपति डॉक्टर पृथ्वीश नाग ने कहा कि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह अत्यंत विशिष्ट और ऐतिहासिक महत्त्व रखता है इस वर्ष विश्व विद्यालय अपनी स्थापना की हीरक जयंती मना रहा है भारतीय परंपरा में 60 वर्ष पूरा होने को है और यह माना जाता है कि यहां से व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सार्थक की योगदान का समय शुरू होता है। यह बात व्यक्तियों के साथ-साथ संस्थाओं और संगठनों पर भी लागू होती है। इसलिए हमारे लिए भी शाष्टिपूर्ति का या हीरक जयंती का समय सार्थक योगदान करने का समय है । हमने बीसवीं शताब्दी में अपनी यात्रा प्रारंभ की थी अब हम 21वीं सदी में हैं और अब हमें किसी की चुनौतियों और जरूरतों के मुताबिक अपना सार्थक योगदान करना है।

स्वर्ण पदक पाने वाले छात्र -छात्राएँ

विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक स्मृति स्वर्ण पदक कुमारी भावना पुरोहित स्नातक कला, अभिषेक कुमार गुप्ता स्नातक कला , सविता निषाद स्नातक हिंदी विषय, स्वेच्छा सिंह स्नातक विज्ञान परीक्षा, अभिनव गुप्ता बीसीए परीक्षा , कृष्णकांत शुक्ला स्नातक वार्षिक परीक्षा, मोहम्मद नासिर हुसैन स्नातकोत्तर उर्दू परीक्षा, जागृति सिंह बीबीए, शिवानी सिंह स्नातक गृह विज्ञान, सुरेंद्र प्रजापति अ स्नातकोत्तर दृश्य कला परीक्षा, विजयलक्ष्मी स्नातकोतर मंच कला परीक्षा, रुपाली श्रीवास्तव स्नातकोत्तर मनोविज्ञान, सुषमा सिंह स्नातकोत्तर संस्कृत परीक्षा, मंजूषा सिंह स्नात्कोत्तर भूगोल परीक्षा , रेणुका किस्कू स्नात्कोत्तर इतिहास, एकतामणि त्रिपाठी स्नातकोतर समाजशास्त्र, धर्मेंद्र एमए प्राचीन इतिहास,निष्ठा पांडेय एमए अंग्रेजी, कुमारी कमला दर्शनशास्त्र परीक्षा , दीप शिखा गुप्ता स्नातकोतर राजनीति शास्त्र , चंचल चौहान एमए हिन्दी, पूजा सोनकर स्नात्कोत्तर सतत शिक्षा में प्रचार प्रसार कार्य परीक्षा, मेनका तिवारी एमए शिक्षा शास्त्र, शिवानी सिंगर स्नातकोत्तर रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन परीक्षा, रजत तिवारी एमएससी कमेस्ट्री, मृदुत्पल निलेर्मि गुप्त स्नातकोत्तर गणित मीनू गुप्ता एम में एमएससी गणित, प्रिया तिवारी स्नातकोतर प्राणी विज्ञान, सुमैया खाना स्नात्कोत्तर वनस्पति विज्ञान , ज्योति शुक्ला स्नात्कोत्तर भर्ती की परीक्षा , गरिमा पांडेय, सत्येन्द्र गुप्ता, बन्दिता नाथ, निष्ठा मनोहर, कृष्ण कुमार विश्वकर्मा, सविता रानी, सुनिधि गुप्ता, पूर्णिमा, ऋचा, सुरभि पांडेय, शरद चन्द्र त्रिपाठी, ललिता कुमारी आदि को स्वर्ण पदक से नवाजा।

वर्ष 2015 विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक व स्मृति पाने वालों की सूची प्रियंका सिंह स्नातक विधि, प्रखर गोयल बीबीए, सूर्यकांत श्रीवास्तव, सोनिया कुमारी परीक्षा बीएड, अश्वनी कुमार बीपीएड श्रीकांत चौधरी एमएड ।

इस मौके पर  पीएचडी उपाधि भी प्रदान की गयी ।

इस मौके पर मौजूद सिद्घार्थनगर के वीसी प्रो. रजनीकांत, एमएमएमयूटी के वीसी प्रो. ओंकार सिंह, प्रो. अजय गुप्ता, प्रो. सुनीता मुर्मू, डा. शफीक अहमद, प्रो. रजीउर्रहमान, प्रो. चितरंजन मिश्र, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, प्रो.विनिता पाठक, प्रो. छायारानी, प्रो. शिखा सिंह, प्रो. निशा, प्रो. विजय चहल सहित तमाम लोग मौजूद रहे।⁠⁠⁠⁠

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