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हर कोई दीवाना है नेपाल के तौलिहवा के लौंग लता का

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सगीर ए खाकसार

बढ़नी (सिद्धार्थनगर), 25 अक्टूबर। दीवाली मिठाइयों और स्वाद के लिए मशहूर है। इस वक्त तरह-तरह की मिठाइयां बाजार में उपलब्ध हैंलेकिन नेपाल की तराई के में लौंग लता का क्या कहना।लौंग लता मिठाई अपने स्वाद और मिठास के लिए अलग पहचान रखती है। भारतीय सीमा से सटे जनपद तौलिहवा का लौंग लता सीमाई इलाकों के अलावा नेपाल के अन्य हिस्सों में भी अपने अलग स्वाद के लिए जाना जाता है।।

 कपिलवस्तु जनपद के सांसद अभिषेक प्रताप शाह लौंग लता मिठाई के बेहद शौक़ीन लोगों में से हैं। श्री शाह खुद तो दीपावली में अपने परिचितों का स्वागत लौंग लता से करते ही हैं। साथ ही वह दूसरों को भी दीवाली में लौंग लता खिलाने का सुझाव देना नहीं भूलते। इस बार तो इस युवा सांसद ने बाकायदा फ़ेसबुक पर अपील तक कर डाली है कि दीपावली पर्व पर इस बार लौंग लता से मेहमानों का स्वागत करें।यही नहीं श्री शाह ने इस मिठाई को अवध की शान तक कह डाला है।

दरअसल ,लौंग लता समोसे के आकार की मैदे से बनी एक तरह की मिठाई है,जिसमे खोया और ड्राइफ्रूट्स भरा जाता है, ऊपर से लौंग भी जड़ा जाता है। लौंग लता बंगाल क्षेत्र की त्योहारों पर बनने वाली एक तरह की पारम्परिक मिठाई है।पहले मैदे को गूंथ कर उसे रोटी की तरह बेलते हैं।फिर उसमें थोड़ा सा खोया और लौंग डालकर उसे फोल्ड करते हैं। फिर चाशनी में डुबोकर निकाल लेते हैं। स्वाद में यह मिष्ठान बहुत ही भरपूर होता है। इस क्षेत्र में तो इसके दीवाने बहुत हैं।जो शख्स भी ज़िला मुख्याल तौलिहवा जाता है लौंग लता खाने से खुद को रोक नहीं पाता।          सटीक जानकारी तो नहीं है लेकिन कुछ  जानकारों का कहना है कि लौंग लता दरअसल नेपाल में बनारस से यहाँ पहुंचा है। एकाध तो इसे बनारस की ही उत्पत्ति भी मानते हैं। दरअसल नेपाल और बनारस का रिश्ता भी बहुत पुराना है।सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से बनारस हमेशा से ही नेपाल के नजदीक रहा है। यही नहीं शैक्षणिक रूप से नेपाल बनारस से ही जुड़ा रहा है।आवागमन की भी बेहतर सुविधा बनारस और नेपाल के बीच वाया गोरखपुर रही है।इससे भी यह अंदाजा लगाया जाता है कि लौंग लता बनारस से ही नेपाल आयी होगी। बहरहाल जो भी हो लौंग लता भारत -नेपाल रिश्तों में मोहब्बत की भी मिठास घोल रही है।