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हाईकोर्ट ने गोरखपुर में स्लाटर हाउस के बारे में नगर आयुक्त से कहा-आपके पास सवालोें का जवाब नहीं

स्लाटर हाउस के लिए भूमि चयनित करने के लिए बनी कमेटी के सदस्य 11 जुलाई को हाईकोर्ट में तलब

गोरखपुर, 7 जुलाई। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गोरखपुर में स्लाटर हाउस के बारे में गोरखपुर के नगर आयुक्त  द्वारा दाखिल जवाब पर नारजगी जतायी। हाईकोर्ट ने कहा कि नगर आयुक्त के पास स्लाटर हाउस के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं है। अदालत ने नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश सिंह द्वारा अस्थायी स्लाटर हाउस के निर्माण के सम्बन्ध में बनायी गई कमेटी के सभी सदस्यों को 11 जुलाई को सुबह दस बजे उपस्थित होने का आदेश दिया है।

इस कमेटी में डीएम व एसएसपी शामिल हैं।

गोरखपुर में स्लाटर हाउस के निर्माण के सम्बन्ध में दिलाशाद अहमद व 12 अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है जिस पर मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी भोसले और न्यायाधीश एमके गुप्ता की कोर्ट सुनवाई कर रही है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए स्थायी स्लाटर हाउस के निर्माण होने तक अस्थायी स्लाटर हाउस शुरू करने को कहा था। अदालत ने यह भी कहा था कि स्लाटर हाउस के लिए याचियों द्वारा सुझााए गए भूमि का निरीक्षण कर इसके बारे में रिपोर्ट दें।

पिछली तारीख पर गोरखपुर के नगर आयुक्त अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे। इस पर अदालत ने उन्हें 7 जुलाई को तलब किया था। अदालत ने कहा कि अवैध स्लाटर हाउस का बंद होना उचित है लेकिन वैध स्लाटर हाउस के लिए जगह की व्यवस्था क्यों नहीं है ? आखिर स्लाटर हाउस खोलने में क्या दिक्कत है ?

आज गोरखपुर के नगर आयुक्त कोर्ट में हाजिर हुए और उन्होंने बताया कि अस्थायी स्लाटर हाउस की लिए उपयुक्त भूमि का चयन करने के लिए एक कमेटी बनायी गई है। कोर्ट उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुई और कहा कि वह किसी भी सवाल का समुचित जवाब नहीं दे पा रहे हैं। कोर्ट ने स्लाटर हाउस के लिए भूमि चयनित करने वाली कमेटी के सदस्यों को 11 जुलाई को सुबह दस बजे कोर्ट में तलब किया है।

गोरखपुर में 17 वर्षों से नहीं है स्लाटर हॉउस

मीट कारोबारी रिजवानउल्लाह कुरैशी उर्फ संजय ने बताया कि गोरखपुर में बड़ा जानवर ( भैंस)  काटने व उसका मीट बेचने पर पूरी तरह पाबंदी लगी हुई हैं। शहर में बूचड़खाने बंद हैं। मीट कारोबारियों को हर दिन लाखों का नुकसान हो रहा है। भूखमरी की स्थिति आ चुकी हैं। मीट कारोबारियों का कहना हैं कि पुश्तैनी धंधे पर रोक लगा कर प्रदेश सरकार हम लोगों के साथ नाइंसाफी कर रही हैं। स्लाटर हाउस न बनाकर नगर निगम अपने दायित्व के प्रति संवेदन हीनता दिखा रहा है।

मीट कारोबारियों का कहना हैं कि सन् 2001 में जब स्लाटर हाउस बंद किया गया, तब हम लोगों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, उस समय हाई कोर्ट ने 3 सप्ताह के अंदर स्लाटर हाउस बनवाने के लिए नगर निगम को आदेश दिया था। नगर निगम ने वैकल्पिक व्यवस्था शहर से 27 किलोमीटर दूर भटहट बाजार में अस्थाई स्लाटर हाउस के रूप में दिया। शहर से इतने दूरी पर स्लाटर हॉउस बनाये जाने पर मिट कारोबारियों ने विरोध किया.

इसके बाद तत्कालीन डीएम ने नगर आयुक्त के साथ बातचीत की लेकिन उसका कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका। नगर निगम ने अपना अड़ियल रवैया बरक़रार रखा और मीट कारोबारी जब तक भटहट नहीं जायेंगे उनके लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।
लेकिन मीट कारोबारियों को अपने दुकान में भैंस काटने और साफ-सफाई के साथ कारोबार करने की इजाजत दे दी गई. वर्ष 2002  से आज तक  लोगों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया गया.

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