जनपद

⁠⁠⁠चाइनीज तस्बीह रोजेदारों की पसंद बनी

माह-ए-रमज़ान में तस्बीह की बढ़ रही मांग

सैयद फरहान अहमद

गोरखपुर, 15 जून। चीन की बनी वस्तुएं हर घर में जगह बना रही हैं. देवी -देवताओं की तस्वीर से लेकर अब चीन की बनी तस्बीह (अल्लाह का नाम जपने की माला) भी बाजार में आ गई है जो रोजेदारों को खूब पसंद आ रही है.

उलेमाओं द्वारा दुआओं के लिए एक संख्या बताई गई है जिससे दुआ करने में आसानी होती है. मसलन 33-33 दो बार (सुब्हानअल्लाह व अलहम्दुलिल्लाह) और फिर 34 बार (अल्लाहु अकबर) यानी कुल 100 बार तस्बीह के माध्यम से अल्लाह को याद करना चाहिए. इसलिए 100 दानों की एक तस्बीह आमतौर पर होती है. वैसे 33 दानों की तस्बीह भी आती है. इस बार मार्केट में क्रिस्टल, लकड़ी, शीशे, प्लास्टिक के अलावा रेडियम दानों की तस्बीह आई हुई हैं। जिसे लोग बेहद पसंद कर रहे हैं। वहीं चाइनीज की तस्बीह लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. लोगों का मानना है कि तस्बीह से इबादत करने में बेहद आसानी हो रही है.

नखास स्थित तस्बीह विक्रेता अख्तर आलम ने बताया कि इस वक्त मार्केट में चाइनीज तस्बीह आई हुई हैं जो अधिक लोकप्रिय हो चुकी हैं।

बता दें कि अल्लाह की इबादत करने के लिए तस्बीह का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा जो लोग एतिकाफ़ में बैठते हैं वह भी तस्बीह का इस्तेमाल करते हैं। तस्बीह का इस्तेमाल साल भर किया जाता है मगर रमज़ान में इसका महत्त्व बढ़ जाता है। रमजान में ज्यादातर हाथों में आपको तस्बीह नजर आयेगी। बहुत सारे लोग ईसाले सवाब के लिए मस्जिदों में भी तस्बीह रखवाते हैं।

अख्तर आलम ने बताया कि माह-ए-रमजान  में केवल उनकी दुकान से 1200 से ज्यादा तस्बीह बिक जाती हैं। यह तस्बीह दिल्ली व मुंबई से मंगाते हैं। तस्बीह 5, 10, 15, 25, 50, 150 रुपया रेंज तक की मिल जाती हैं। उन्होंने बताया कि विदेशों से जो तस्बीह आती हैं उसमें जैतुन, गुलाब, संदल आदि की बनी हुई होती हैं जिसमें एक प्रकार की विशेष खुशबू होती हैं। यह तस्बीह विदेश में रह रहे परिवार के लोग अपने परिवारजनों के लिए खास तौर पर भेजते हैं। इलेक्ट्रानिक तस्बीह भी बाहर से आती हैं।

यहां से गोरखपुर मंडल के अन्य जिलों में भी तस्बीह सप्लाई होती हैं।

तस्बीह के प्रकार व मूल्य

क्रिस्टल – 75- 150 रुपया

लकड़ी 10- 25 रुपया

शीशा 5-50 रुपया

प्लास्टिक 5-20 रुपया

रेडियम 10-50 रुपया

चाइनीज 10-50 रुपया

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