समाचार

सीनियर रेजिडेंट डॉ. आरती की मौत का मामला : बेहोशी की दवा कर रही हत्या की ओर इशारा

गोरखपुर, 8 दिसम्बर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में शनिवार को हॉस्टल में हुई सीनियर रेजिडेंट डॉ. आरती की मौत के पीछे बेहोशी की दवा को कारण बताया जा रहा है।  बेहोशी (एनेस्थीसिया) की वही दवा उसकी मौत को आत्महत्या से हत्या की ओर पूरे प्रकरण को मोड़ रही है।  पुलिस ने अपनी जांच में इस बिंदु को शामिल करते हुए अब अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

बीआरडी मेडिकल कालेज के एचओडीज, सीनियर डॉक्टर्स और कर्मचारियों के साथ ही स्टूडेंट्स भी इस बेहोशी की दवा की डोज को लेकर न सिर्फ चर्चा कर रहे हैं बल्कि डॉ आरती की मौत को हत्या मानने की ओर अपने विश्लेषणों से बढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में डॉ आरती की मौत को लेकर संवेदना जाहिर करने वालों का एक स्वर कहना कि बेहोशी की दवा का सच सामने आना जरूरी है। डॉ. आरती के शरीर में इस दवा की मौजूदगी भी अभी तक साबित नहीं हो सकी है। बिसरा जांच में ही इसका सच पता चल सकेगा।

जिले की फोरेंसिक टीम को हॉस्टल में डॉ. आरती को आवंटित 35 नंबर कमरे में बेड के पास से खाली सीरिंज तो मिली थी लेकिन बेहोशी के इंजेक्शन का वायल नहीं मिला। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुँची पुलिस और फोरेंसिक एक्सपर्ट ने वायल के न मिलने पर यह आशंका जताई थी कि इंजेक्शन को सीरिंज में भरने के बाद उसे खिड़की से झाड़ियों में फेंक दिया गया हो। बाद में जब झाड़ियों की जांच हुई तो वहाँ भी बेहोशी का वह इस्तेमाल किया गया वायल नहीं मिला।

सबसे बड़ा सवाल यह कि ऑपरेशन के वक्त मरीजों को बेहोश करने के लिए जिस दवा का इस्तेमाल बड़े सर्जन भी नहीं जानते, उसके बारे में गायनी की स्टूडेंट को कैसे पता चला ? बेहोशी की इस दवा के इस्तेमाल के लिए बड़े-बड़े सर्जन भी विशेषज्ञ को बुलाते हैं। कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों ने नाम न प्रकाशित किये जाने की शर्त पर बताया कि इस दवा की डोज सिर्फ एक्सपर्ट को ही मालूम होती है। ऐसे में मरने लायक इसकी डोज तय करना स्टूडेंट के लिए मुश्किल है।

एक्सपर्ट्स चिकित्सकों का तर्क यह भी है कि बेहोशी की दवा दो सेकेंड में असर करने लगती है और अधिकतम 30 सेकेंड में वह पूरी तरह से बेहोश कर देती है। ऐसे में डॉ आरती ने खुद कैसे ये बेहोशी की पूरी दवा अपने हाथ में लगे इंट्राकैथ के माध्यम से इंजेक्ट कर लिया।  यह भी संभव नहीं है कि बेहोशी की उस दवा को एक झटके में कोई खुद इंजेक्ट कर ले यदि वह ऐसा करने का प्रयास करता भी है तो बेहोशी की दवा खुद इंट्राकैथ से बाहर आ जाएगी।  सबसे अहम सवाल तो यह है कि बेहोशी की वह दवा डॉ आरती के पास कैसे पहुँची।

डॉ. आरती की मौत को आत्महत्या बताते हुए इसके पीछे बेहोशी की दवा के इस्तेमाल का दावा महज एक सीरिंज की बरामदगी पर टिका हुआ है। पोस्टमार्टम में मौत के कारण का पता न चलने और घर वालों के कहने पर अब बिसरा को जांच के लिए लखनऊ भेजा गया है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है।

 

Related posts