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डा. संदीप पांडेय ने बालू खनन के खिलाफ बिरवट कोन्हवलिया आन्दोलन को समर्थन दिया

बोले -स्थानीय लोगों की सहमति के बिना बालू खनन करना अवैधानिक

विधायक अजय कुमार लल्लू को जनसुनवाई आयोजित करने का सुझाव दिया

कुशीनगर। प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता डा. संदीप पांडेय ने बिरवट कोन्हवलिया में एपी तटबंध के पास बालू खनन के पट्टे को निरस्त करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को समर्थन किया है। शुक्रवार को वह धरना स्थल पहुंचे और कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू की अगुवाई में चल रहे इस आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त की।

प्रदेश सरकार ने नारायणी नदी बड़ी गंडक नदी से बिरवट कोन्हवलिया गांव के पास बालू खनन के लिए तीन पट्टे आवंटित किए हैं। बालू खनन के लिए दिया गया पट्टा एपी तटबंध के एकदम करीब हैं। पिछले कुछ वर्षों से नदी की धारा तटबंध के काफी करीब आ गई है और लगातार तटबंध और तटबंध के अंदर स्थित गांवों व खेतांे को काट रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बालू खनन से कटान की समस्या और गंभीर हो जाएगी और तटबंध का बचना नामुमकिन हो जाएग। तटबंध की देखरेख करने वाले बाढ़ खंड के अभियंताओं ने भी सरकार और प्रशासन को पत्र लिखकर बालू खनन से तटबंध को नुकसान पहुंचने की बात कही है। इसके बावजूद जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार बालू खनन के पट्टे को निरस्त नहीं कर रही है।

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क्षेत्रीय विधायक अजय कुमार लल्लू की अगुवाई में ग्रामीण 3 फरवरी से अनवरत धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों के आंदोलन केे कारण बालू खनन बंद है। छह अप्रैल को प्रशासन ने पुलिस के बल पर बालू खनन शुरू कराने की कोशिश की जिसका ग्रामीणों ने जबर्दस्त प्रतिरोध किया। प्रशासन ने विधायक अजय कुमार लल्लू सहित 19 लोगों को गिरफतार कर जेल भेज दिया। एक सप्ताह बाद विधायक सहित 17 लोग जमानत पर छूट गए जबकि दो लोग अभी भी जेल में हैं।

प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता डा. संदीप पांडेय 20 अप्रैल को दोपहर बिरवट कोन्हवलिया पहुंचे। आज ग्रामीणों के आंदोलन का 77वंा दिन था। उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता सर्वेश दुबे और पत्रकार मनोज कुमार सिंह थे। डा. संदीप पांडेय ने ग्रामीणों से बातचीत कर आंदोलन के बारे में पूरी जानकारी ली। उन्होंने ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उनका जुझारू आंदोलन काबिलेतारीफ है। सरकार और प्रशासन बालू खनन कराकर 40 से अधिक गांवों और एक लाख से अधिक लोगों की जिंदगी से खिलवाड कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगांे का संवैधानिक हक है। स्थानीय लोग ही निर्णय करेंगे कि प्राकृतिक संसाधन का किस तरह और कैसे उपयोग है। नदी और उसका बालू भी प्राकृतिक संसाधन है और इसके बारे में निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय लोगों का ही है। स्थानीय लोगों से बातचीत किए बिना बालू खनन के तीन पट्टे दिया जाना अवैधानिक है। यह जानते हुए भी कि नदी की धारा तटबंध की तरफ मुड़ गई है और हर वर्ष कई गांव और सैकड़ों हेक्टेयर खेत कटान के शिकार हो रहे हैं, फिर भी यहां बालू खनन की अनुमति देना, सरकार-प्रशासन के जनता के प्रति रूख को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को तत्काल बालू खनन का पट्टा निरस्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह आंदोलन को तेज करने में मदद करेंगे। इस मामले को न्यायालय और नेशनल ग्रीन टिब्यूनल में ले जाएंगे। उन्होंने आंदोलनकारियों को बड़ी जनसुनवाई आयोजित करने का सुझाव दिया और कहा कि यह जनसुनवाई आयोजित होगी तो वह मेधा पाटकर सहित कई प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ इसमें शामिल होंगे।

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पत्रकार मनोज सिंह ने कहा कि बालू खनन की अनुमति देेना हैरान करने वाला है। एक तरह सरकार तटबंध को नदी की कटान से बचाने के लिए हर वर्ष 20 से 40 करोड़ रूपए खर्च करती है तो दूसरी तरफ बालू खनन कराकर तटबंध को कट जाने की पूरी गारंटी कर रही है। बालू खनन से सरकार को सिर्फ 7.50 करोड़ रूपए राजस्व मिलेगा लेकिन यह खनन करोड़ों खर्च कर बने तटबंध, उसकी मरम्मत करने में हर वर्ष खर्च हो रहे करोड़ों रूपए के साथ-साथ 40 से अधिक गांवों और एक लाख लोगों की जिंदगानी को खतरे में डाल देगा।

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विधायक अजय कुमार लल्लू ने आंदोलन को समर्थन देने के लिए डा.संदीप पांडेय को धन्यवाद दिया और कहा कि यह लड़ाई निर्णायक मुकाम तक जारी रहेगी। सरकार ने हमें और ग्रामीणों को जेल भेजकर हमारे इरादों को और मजबूत बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर उनका दमन किया जा रहा है ताकि वे टूट जाएं और बालू खनन शुरू हो सके। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ भी सरकार ने तमाम मुकदमे दर्ज कर लिए हैं और उनको लम्बे समय तक जेल भेजने की साजिश कर रही है लेकिन वह सरकार के दमनकारी रवैये से नहीं दबेंगे। यह लड़ाई लाखों लोगों की जिंदगी से जुड़ी है और हम अपनी जान देकर भी यह संघर्ष जारी रखेेंगे।
इस मौके पर जयगोविंद सिंह, गोपीचन्द कुशवाहा, लालजी कुशवाहा, बुटन कुशवाहा, सिंघलदीप सिंह, शिवपूजन सिंह, जवाहर सिंह, दिनेश सिंह, बब्लू प्रसाद, संजय सिंह, बुधई यादव, बाबुनन्द यादव, शिवनारायण यादव, राजकिशोर सिंह, रामाधार सिंह, रामनरेश गोड़, हरिहर सिंह, कैलाश प्रसाद,केश्वर प्रसाद, अमर चौरसिया,नगीना दास,सतन यादव,रामअवध सिंह, दूधनाथ साहेब,प्रदीप सिंह,राजेन्द्र प्रसाद ,रोशन सिंह, श्रीराम सिंह, ओम प्रकाश पटेल, बांकी सिंह, जगरनाथ प्रसाद, आदि तमाम ग्रामीण मौजूद रहे।

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