साहित्य - संस्कृति

पर्यावरण संतुलन का संदेश दे गया नाटक ‘ चौथा बंदर ’

गोरखपुर । पर्यावरण जागरूकता अभियान के तहत युवा नाट्य मंच द्वारा गुरुवार को मुंशी प्रेमचंद पार्क में बने मुक्ताकाशी मंच पर अनिल कुमार दत्ता द्वारा लिखित व अरुण बच्चन द्वारा निर्देशित नाटक ”  चौथा बंदर ” का  मंचन किया गया जिसमें संस्था के 14 कलाकारों ने नाटक में अपनी प्रतिभा दिखलाई ।

नाटक “चौथा बंदर” पूर्णतया पर्यावरण व प्रदूषण पर आधारित है जिसमें बापू के तीन बंदरों को पर्यावरण के तीन विभिन्न प्रदूषणों से बचने हेतु ; क्रमश: कान ,आंखे और मुंह बंद रख कर ध्वनि प्रदूषण, प्रकाश व रासायनिक प्रदूषण एवं खाद्य व जल प्रदूषण से बचने की सलाह देते हुए प्रस्तुत किया गया है । नाटक में जमूरा के माध्यम से काव्यात्मक संवादों द्वारा रोंगटे खड़े कर देने वाले तथ्य उजागर किए गए हैं  यथा -‘ पल पल कटते जंगल देखें मानव प्रकृति के दंगल देखें ‘ , ‘ पेड़ों की जगह मकान खड़े हैं दफ्तर में दुकान खड़े हैं ‘ , ‘ धू धू जलती वादियां देखी जहरीली हवाओं की आंधिया ‘  देखी । नाटक में उस्ताद द्वारा जब यह प्रश्न उठाया जाता है कि क्या यह जरूरी है कि विकास की नींव विनाश ही हो ? तो उद्योगपति द्वारा यह दलील दी जाती है कि नींव ना भी हो तो भी हम विकास को विनाश से अलग नहीं कर सकते क्योंकि विकास और विनाश एक ही सिक्के के दो पहलू हैं । ना तो हम विकास को रोक सकते हैं और न विनाश को। इसी क्रम में उस्ताद द्वारा एक अन्य तथ्य सामने लाया जाता है कि बम के फटने पर जान माल और पर्यावरण का भारी विनाश होता है यह जानते हुए भी हम इनका उत्पादन और उपयोग बढ़ाने में प्रयासरत हैं बम बने हैं तो कभी ना कभी अवश्य फटेंगे । एक साथ भी फट सकते हैं । फिर समूचा पर्यावरण नष्ट हो जाएगा । क्योंकि बम फटेंगे तो प्रदूषण बढ़ेगा और प्रदूषण सीमाओं के रेखा गणित और धर्मों के दायरों को नहीं मानता ।

उस्ताद की भूमिका में अरुण बच्चन ,जमूरे की भूमिका में शालिनी ,बंदर एक मुस्कान श्रीवास्तव ,बंदर दो अंकिता श्रीवास्तव, बंदर तीन अर्पिता श्रीवास्तव ,उद्योगपति पवन मणि उपाध्याय, किसान रजत श्रीवास्तव ,सुत्रधार रामदयाल गौड़ ।

इस नाटक के मंचन के पहले मुख्य अतिथि शहर के महापौर माननीय सीताराम जायसवाल ने  पार्क में स्थापित कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नाटक को पूरे देश में करने की जरूरत है। मैं चाहता हूं कि इस नाटक का जिले के हर वार्ड और हर एक गांव में पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिए अभियान चलाया जाए और जनता को नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरुक किया जाए। कार्यक्रम का सफल संचालन बेचन सिंह पटेल ने किया । युवा नाट्य मंच के युवा वरिष्ठ रंगकर्मी अरुण बच्चन ने आए हुए सभी आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट किया।

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