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बरेलवी उलेमा के नजदीक नहीं दिखा माह-ए-रमज़ान का चांद, पहला रोजा शुक्रवार को

– बरेलवी आज से पढ़ेगे  तरावीह की नमाज

-देवबंदी उलेमा ने किया चांद का ऐलान, पहला रोजा आज

-तहरीक दावत-ए-इस्लामी हिंद का सामूहिक एतिकाफ आज से होगा शुरू

गोरखपुर। बुधवार की शाम मुस्लिम समुदाय के लोग आसमान पर नजरें गड़ाए रहे, लेकिन माह-ए-रमज़ान के चांद का दीदार नहीं हुआ। उलेमा बरेलवी (उलेमा-ए-अहले सुन्नत) ने पुष्टि की है कि माह-ए-रमज़ान चांद का दीदार मुल्क में कहीं भी नहीं हुआ है, इसलिए अब माह-ए-रमज़ान का पहला रोज़ा शुक्रवार (जुमा) से शुरू होगा। जबकि तरावीह की नमाज गुरुवार रात से शुरू हो जाएगी। माह-ए-रमज़ान शरीफ का पहला रोजा करीब 15 घण्टे 12 मिनट का होगा। वहीं देवबंदी उलेमा ने चांद के ऐलान की घोषणा बुधवार को कर दी। देवबंदी मकतबे फिक्र के मानने वालों ने बुधवार रात तरावीह की नमाज भी पढ़ी और गुरुवार का रोजा भी रखा।

बताते चलें कि दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद नार्मल स्थित तंजीम उलेमा-ए-अहले सुन्नत की एक मीटिंग बुधवार को देर रात दरगाह परिसर में हुई। जिसमें विभिन्न मस्जिदों के इमाम व कमेटी के लोगों ने शिरकत की। मीटिंग में रमज़ान के चांद की पुष्टि के लिए अहले सुन्नत वल जमात (बरेलवी) के बड़े मदरसों के मुफ्तियों, आलिमों व खानकाहों से राब्ता कायम किया गया लेकिन चांद की कोई पुष्टि कहीं से नहीं हुई। इसलिए तंजीम ने फैसला लिया है कि अहले सुन्नत वल जमात के नजदीक पहला रोजा शुक्रवार से शुरू होगा। तरावीह की नमाज गुरुवार रात से पढ़ी जाएगी। मीटिंग में मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही, मुफ्ती मो. अजहर शम्सी, मौलाना मोहम्मद अहमद, मौलाना गुलाम दस्तगीर, मौलाना नूरुलहोदा, कारी अंसारुल हक, कारी शराफत हुसैन कादरी, दरगाह सदर इकरार अहमद सहित तमाम उलेमाओं ने शिरकत की।

उधर बाजार में सहरी एवं इफ्तार के सामान की दुकानें सजने लगी हैं। बाजारों में रौनक छा गई है। नखास, रेती, घंटाघर, शाहमारुफ सहित मुस्लिम बाहुल्य मोहल्लों की फिज़ा में अलग सी चमक दिख रही है। जो इस बात की तस्दीक कर रही है कि रमज़ान में बाजार भी गुलजार होने को तैयार है। सहरी व इफ्तारी के सामानों की खरीददारी तेज हो हो गई। साहबगंज में खाद्य पदार्थों की खरीद फरोख्त बढ़ गई है। नखास पर सेवई, खजूर, टोपी व इत्र का जलवा है।

गुरुवार को दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद नार्मल सहित सभी अहले सुन्नत वल जमात की मस्जिदों में तरावीह की नमाज पढ़ी जाएगी। दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद व मदरसा दारूल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार में भारी भीड़ उमड़ेगी। तकरीबन हर मस्जिद नमाजियों से खचाखच भरी नजर आएगी। तहरीक दावत-ए-इस्लामी हिन्द द्वारा रसूलपुर जामा मस्जिद में तीस दिनों का सामूहिक एतिकाफ गुरुवार शाम से शुरू हो जाएगा। जिसमें करीब 50 अकीदतमंद शामिल होंगे। शहर में इस तरह का पहला एतिकाफ है जिसमें इतने लोग शामिल हो रहे है।

वहीं तंजीम उलेमा-ए-अहले सुन्नत द्वारा जारी रमज़ान हेल्प लाइन पर सवालों का सिलसिला जारी हो गया है। पहले दिन जकात, सदका व चांद के मुताल्लिक सवाल किए गए। जिनका उलेमा ने जवाब दिया। शहर की सात मस्जिदों में तीस दिनों तक चलने वाला रमजान का विशेष दर्स शुक्रवार से शुरू होगा।

“मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया के मुफ्ती अख्तर हुसैन अजहर मन्नानी (मुफ्ती-ए-गोरखपुर) ने बताया कि मजहब-ए-इस्लाम के पांच अरकानों मे से रोज़ा भी एक अहम रुकन है। रमज़ान शरीफ में अल्लाह ने बंदों की रहनुमाई के लिए अपनी पाक किताब कुरआन शरीफ उतारी।
“गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर के इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद ने बताया कि रमज़ान शरीफ का रोजा परहेजगारी पैदा करने का बेहतरीन जरिया है।
“दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद नार्मल के इमाम मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने बताया कि दरगाह पर बनी चांद कमेटी ने माह-ए-रमजान का चांद देखने की भरपूर कोशिश की लेकिन चांद नहीं दिखा। इसलिए जुमा को पहला रोजा होगा। वहीं गुरुवार की रात से तरावीह की नमाज पढ़ी जाएगी।”

“तंजीम कारवाने अहले सुन्नत के सदर मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने बताया कि इस्लाम मजहब के पाक माह रमज़ान की शुरूआत चांद के दीदार के साथ होती है। रमज़ान शरीफ का महीना मजहब-ए-इस्लाम में खास अहमियत रखता है। इस माह में मजहब-ए-इस्लाम को मानने वाले लोग पूरा महीना रोजा रखते हैं।

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