Templates by BIGtheme NET
Home » साहित्य - संस्कृति » यात्रा संस्मरण » गंगटोक : खूबसूरत शहर , प्यारे लोग
gangtok 8

गंगटोक : खूबसूरत शहर , प्यारे लोग

सिक्किम यात्रा-4 (समाप्त)

सगीर ए खाकसार

अगर आप गंगटोक जा रहे हैं तो कम से कम पांच दिन या हफ्ते भर का प्रोग्राम अवश्य बनाएं। गंगटोक के चारों दिशाओं में कुछ न कुछ घूमने लायक़ है। गंगटोक के बारे में पहले से ज़्यादा कुछ न मालूम होने की वजह से हम लोगों को बहुत से खूबसूरत जगहों को देखने से बंचित रहना पड़ा। न चाहते हुए अलविदा कहना पड़ा।

gangtok 7

गंगटोक मुझे माफ़ करना। वक़्त की तंगी ने  मुझे तुम से जुदा होने पर मजबूर कर दिया है।अभी तो जी भर कर तुझे देखा भी नहीं था कि तुझ से जुदा होने का वक्त भी आ गया।यह शहर खूबसूरत तो है ही अपनी और आकर्षित भी करता है। तुम्हारी खूबसूरती और तुम्हारे भोलेपन ने मुझे दीवाना बना दिया है। यहां के लोग बहुत ही हेल्पिंग नेचर के हैं.

राह चलते हुए एक अनजान इंसान को यह बताना नहीं भूलते कि एक्सक्यूज़ मी! आप के जूते का लैस खुला हुआ। प्लीज़ !इसे बांध लें।(एमजी मार्ग पर टहलते हुए एक युवती ने मुझ से कहा) छंगू जाने के क्रम में मेरे टैक्सी वाले ने मुझे बाजरा स्टैंड के बजाए किसी और स्टैंड पर उतारा दिया उसके जाने के बाद मुझे पता चला कि मैं गलत जगह उतर गया हूँ। मैंने उसे फ़ोन करके पूरी बात बताई वह फौरन लौट पड़ा और मुझे सही जगह पर पहुंचा दिया।

gangtok 6

इसी तरह आज शहर  के स्थानीय पर्यटक स्थलों को घूमते हुए हमारे टैक्सी ड्राइवर जेपी ने तय स्थानों से ज़्यादा स्थल दिखाए।
अभी तो इस शहर को जी भर कर बाहों में समेटना था।गले लगाना था।खूब बातें करनी थीं। एम जो मार्ग पर फक्कड़ों की तरह वक्त गुज़रना था। बस कल एक बच्चे के साथ शाम को थोड़ी देर बैडमिंटन ही तो खेला था मैंने।अभी तो बहुत सारे अरमान पूरे करने थे। नक्शा उठाकर नया शहर ढूंढने की नौबत ही अभी कहां आयी थी। अभी तो सबसे मुलाकात भी नहीं हुई थी।बातें भी नहीं हुई थी और बिछड़ने का वक़्त भी आ गया।

गंगटोक की वरिष्ठ पत्रकार बहन पवित्रा भंडारी से सिर्फ फ़ोन पर ही बात हो पाई थी।गलती मेरी थी मैंने उन्हें यहां अपने आने की खबर ज़रा देर सी दी।बहरहाल फ़ोन पर किसी तरह वक़्त निकाल कर मिलने की बात हुई । उन्हें आज पूर्व निर्धारित किसी कार्यक्रम के तहत शहर से बाहर जाना था। लगातार वो मेरे संपर्क में रहीं लेकिन अफसोस मुलाकात नहीं हो पायी। पवित्रा भंडारी से न मिलने की कसक हमेशा ही रहेगी। मुझे आज दोपहर बाद इस शहर को अलविदा कहना होगा।कोई नया शहर और नए लोग मेरा इंतेज़ार जो कर रहे हैं! खैर

तुम इसी मोड़ पर हमें मिलना
लौटकर हम ज़रूर आएंगे।

About गोरखपुर न्यूज़ लाइन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*